झारखंड: टाटा स्टील समेत 12 संस्थानों को 180 दिन का अल्टीमेटम, जनरेटरों पर लगाना होगा प्रदूषण नियंत्रण उपकरण
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने डीजल जनरेटरों से प्रदूषण फैलाने पर टाटा स्टील समेत 12 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किया है। छह महीने में उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण लगाने का निर्देश दिया है। उल्लंघन पर प्रतिदिन 25 हजार रुपये तक जुर्माना लगेगा।
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झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने डीजल जनरेटरों से फैलते जहरीले धुएं पर कड़ा रुख अपनाते हुए टाटा स्टील समेत 12 प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किया है। बोर्ड ने हवा को जहरीला होने से बचाने के लिए सभी संस्थानों को छह महीने यानी 180 दिन के भीतर उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण लगाने का सख्त निर्देश दिया है।
जनरेटरों के धुएं से बढ़ता स्वास्थ्य संकट
बिजली कटने पर वैकल्पिक स्रोत के रूप में इस्तेमाल होने वाले ये डीजल जनरेटर हवा में भारी मात्रा में सूक्ष्म कण और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे विषैले तत्व छोड़ते हैं। यह जहरीला धुआं शहर की हवा को बुरी तरह प्रदूषित कर रहा है, जिससे आम लोगों में अस्थमा और सांस की गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बोर्ड ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि संस्थान अपने जनरेटरों की क्षमता के अनुसार रेट्रोफिट उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण लगाएं अथवा अन्य स्वीकृत तकनीकी समाधानों को अपनाएं ताकि वायु प्रदूषण पर रोक लगाई जा सके।
नोटिस की जद में आए प्रमुख संस्थान
नियम उल्लंघन पर लगेगा भारी जुर्माना
पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर बोर्ड ने दैनिक आधार पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है। जनरेटर की क्षमता और लापरवाही के स्तर के अनुसार उल्लंघनकर्ताओं से 7,500 रुपये, 15,000 रुपये तथा 25,000 रुपये प्रतिदिन की दर से पर्यावरणीय मुआवजा वसूला जाएगा। झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन ने सूचना का अधिकार अधिनियम के माध्यम से मिली जानकारी के आधार पर यह गंभीर मामला उठाया था। संस्था के केंद्रीय अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने कहा कि स्वच्छ वातावरण में सांस लेना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और औद्योगिक प्रगति जनस्वास्थ्य की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।