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चांडिल डैम में बनेगा देश का दूसरा सबसे बड़ा सोलर प्लांट: 600 मेगावाट बिजली उत्पादन, 3500 करोड़ का निवेश
Fri, 02 Oct 2026 12:15 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Fri, 02 Oct 2026 12:15 PM IST
सार
सरायकेला-खरसावां के चांडिल डैम में 600 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट विकसित किया जाएगा। करीब 3,500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को पीपीपी मोड में तैयार किया जा रहा है और पीएम सूर्य सरोवर योजना के तहत 600 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है।
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चांडिल डैम
- फोटो : Social Media
विस्तार
सरायकेला-खरसावां जिले में स्थित चांडिल डैम में 600 मेगावाट क्षमता का देश का दूसरा सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट आकार लेने जा रहा है। यह संयंत्र सीधे बिजली ग्रिड से जुड़ेगा, जिससे पूरे झारखंड में सौर ऊर्जा उत्पादन को बड़ी मजबूती मिलेगी। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 में इस विशाल परियोजना को अपनी पीएम सूर्य सरोवर योजना के तहत शामिल किया है।
झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (जरेडा) ने इस दिशा में जलाशय का बाथिमेट्री सर्वे पूरा कर लिया है। बाथिमेट्री सर्वे के जरिए पानी के भीतर की परिस्थितियों, जलाशय की गहराई और उसके तल की बनावट का सही आकलन किया गया है। यह जानकारी फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म के डिजाइन, पैनलों की स्थापना और उनकी सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर के बाद झारखंड देश का दूसरा ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां 600 मेगावाट क्षमता का इतना विशाल तैरता हुआ सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होगा।
परियोजना की लागत और वित्तीय मदद
चांडिल डैम में तैयार होने वाले इस फ्लोटिंग सोलर प्लांट के निर्माण में करीब 3,500 करोड़ रुपये की लागत आएगी। जरेडा इस पूरी परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड के तहत विकसित कर रहा है। इसमें निजी निवेशक अपनी राशि का निवेश करके प्लांट का निर्माण और संचालन करेंगे। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य सरोवर योजना के तहत इस संयंत्र के लिए प्रति मेगावाट एक करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान रखा गया है। इस व्यवस्था के तहत परियोजना को कुल 600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिल सकेगी। इस सब्सिडी को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने शर्त रखी है कि सौर संयंत्र के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी लगाना अनिवार्य होगा। सामान्य सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए विशाल भूखंड की जरूरत होती है, लेकिन फ्लोटिंग सोलर प्लांट में जलाशय की सतह का उपयोग होने से भूमि पर दबाव कम होगा।
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बैटरी स्टोरेज और भूमि आवंटन
पीएम सूर्य सरोवर योजना की शर्त के अनुसार जरेडा ने बैटरी स्टोरेज सिस्टम के साथ ही इस संयंत्र की योजना बनाई है। इस अत्याधुनिक सिस्टम के माध्यम से दिन में उत्पादित सौर ऊर्जा को संचित किया जाएगा, जिससे सूर्यास्त के बाद भी निर्बाध बिजली आपूर्ति संभव हो सकेगी। झारखंड में यह पहली बार होगा, जब किसी सोलर पावर प्लांट के साथ इतना बड़ा बैटरी स्टोरेज सिस्टम बनाया जाएगा। ग्रिड और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के निर्माण के लिए जरेडा को 17.96 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन ने इस जमीन को चिह्नित कर लिया है और अब केवल जल संसाधन विभाग से औपचारिक मंजूरी मिलने का इंतजार है।
ये भी पढ़ें- झारखंड: हेमंत सोरेन पर आरोप तय, क्या अब बढ़ेगा सीएम पद से इस्तीफे का दबाव? भाजपा की मांग पर झामुमो का पलटवार
राज्य में प्रभाव और अन्य योजनाएं
पूर्व में वर्ष 2018 में चांडिल डैम में 100 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने की योजना बनी थी। बाद में वर्ष 2023 में इसकी क्षमता बढ़ाकर 600 मेगावाट कर दी गई थी। अब पीएम सूर्य सरोवर योजना में शामिल होने के बाद इस दिशा में तेजी से कार्रवाई शुरू हो गई है।
इस संयंत्र से सरायकेला-खरसावां और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों को निर्माण, स्थापना, सुरक्षा और रखरखाव के कार्यों में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही इंजीनियरिंग, विद्युत उपकरण तथा परिवहन क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को निवेश के नए मौके हासिल होंगे।
अन्य जलाशयों में भी तैयारी
झारखंड सरकार राज्य के अन्य जलाशयों में भी ऐसे संयंत्र लगाने की तैयारी कर रही है। इनमें तेनुघाट डैम में 400 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट प्रस्तावित है। इसके अलावा बोकारो और गुमला के ऊपरी शंख डैम, मैथन डैम और मसानजोर डैम में भी तैरते सौर संयंत्र लगाने की योजना है। वर्तमान में मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में 600 मेगावाट, केरल के कायमकुलम में 92 मेगावाट, तेलंगाना के रामागुंडम में 100 मेगावाट तथा आंध्र प्रदेश के सिम्हाद्री में 25 मेगावाट का प्लांट संचालित है। रांची के गेतलसूद डैम में 100 मेगावाट की परियोजना की पहली इकाई से 50 मेगावाट उत्पादन जारी है, जबकि टाटा स्टील परिसर स्थित कूलिंग पोंड में 108 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट कार्यरत है।
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झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (जरेडा) ने इस दिशा में जलाशय का बाथिमेट्री सर्वे पूरा कर लिया है। बाथिमेट्री सर्वे के जरिए पानी के भीतर की परिस्थितियों, जलाशय की गहराई और उसके तल की बनावट का सही आकलन किया गया है। यह जानकारी फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म के डिजाइन, पैनलों की स्थापना और उनकी सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर के बाद झारखंड देश का दूसरा ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां 600 मेगावाट क्षमता का इतना विशाल तैरता हुआ सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होगा।
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परियोजना की लागत और वित्तीय मदद
चांडिल डैम में तैयार होने वाले इस फ्लोटिंग सोलर प्लांट के निर्माण में करीब 3,500 करोड़ रुपये की लागत आएगी। जरेडा इस पूरी परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड के तहत विकसित कर रहा है। इसमें निजी निवेशक अपनी राशि का निवेश करके प्लांट का निर्माण और संचालन करेंगे। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य सरोवर योजना के तहत इस संयंत्र के लिए प्रति मेगावाट एक करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान रखा गया है। इस व्यवस्था के तहत परियोजना को कुल 600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिल सकेगी। इस सब्सिडी को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने शर्त रखी है कि सौर संयंत्र के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी लगाना अनिवार्य होगा। सामान्य सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए विशाल भूखंड की जरूरत होती है, लेकिन फ्लोटिंग सोलर प्लांट में जलाशय की सतह का उपयोग होने से भूमि पर दबाव कम होगा।
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बैटरी स्टोरेज और भूमि आवंटन
पीएम सूर्य सरोवर योजना की शर्त के अनुसार जरेडा ने बैटरी स्टोरेज सिस्टम के साथ ही इस संयंत्र की योजना बनाई है। इस अत्याधुनिक सिस्टम के माध्यम से दिन में उत्पादित सौर ऊर्जा को संचित किया जाएगा, जिससे सूर्यास्त के बाद भी निर्बाध बिजली आपूर्ति संभव हो सकेगी। झारखंड में यह पहली बार होगा, जब किसी सोलर पावर प्लांट के साथ इतना बड़ा बैटरी स्टोरेज सिस्टम बनाया जाएगा। ग्रिड और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के निर्माण के लिए जरेडा को 17.96 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन ने इस जमीन को चिह्नित कर लिया है और अब केवल जल संसाधन विभाग से औपचारिक मंजूरी मिलने का इंतजार है।
ये भी पढ़ें- झारखंड: हेमंत सोरेन पर आरोप तय, क्या अब बढ़ेगा सीएम पद से इस्तीफे का दबाव? भाजपा की मांग पर झामुमो का पलटवार
राज्य में प्रभाव और अन्य योजनाएं
पूर्व में वर्ष 2018 में चांडिल डैम में 100 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने की योजना बनी थी। बाद में वर्ष 2023 में इसकी क्षमता बढ़ाकर 600 मेगावाट कर दी गई थी। अब पीएम सूर्य सरोवर योजना में शामिल होने के बाद इस दिशा में तेजी से कार्रवाई शुरू हो गई है।
इस संयंत्र से सरायकेला-खरसावां और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों को निर्माण, स्थापना, सुरक्षा और रखरखाव के कार्यों में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही इंजीनियरिंग, विद्युत उपकरण तथा परिवहन क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को निवेश के नए मौके हासिल होंगे।
अन्य जलाशयों में भी तैयारी
झारखंड सरकार राज्य के अन्य जलाशयों में भी ऐसे संयंत्र लगाने की तैयारी कर रही है। इनमें तेनुघाट डैम में 400 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट प्रस्तावित है। इसके अलावा बोकारो और गुमला के ऊपरी शंख डैम, मैथन डैम और मसानजोर डैम में भी तैरते सौर संयंत्र लगाने की योजना है। वर्तमान में मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में 600 मेगावाट, केरल के कायमकुलम में 92 मेगावाट, तेलंगाना के रामागुंडम में 100 मेगावाट तथा आंध्र प्रदेश के सिम्हाद्री में 25 मेगावाट का प्लांट संचालित है। रांची के गेतलसूद डैम में 100 मेगावाट की परियोजना की पहली इकाई से 50 मेगावाट उत्पादन जारी है, जबकि टाटा स्टील परिसर स्थित कूलिंग पोंड में 108 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट कार्यरत है।