{"_id":"5b67f8d54f1c1b827d8b6e8a","slug":"ramgarh-lynching-victim-family-is-running-on-every-doorstep-to-get-death-certificate","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामगढ़ भीड़ हिंसा: एक साल बाद भी मृत्यु प्रमाण पत्र के इंतजार में भटक रहा परिवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामगढ़ भीड़ हिंसा: एक साल बाद भी मृत्यु प्रमाण पत्र के इंतजार में भटक रहा परिवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामगढ़
Updated Mon, 06 Aug 2018 12:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
29 जून 2017 को अलीमुद्दीन उर्फ असगर अंसारी को झारखंड के रामगढ़ जिले में एक भीड़ ने पीट-पीटकर मार दिया था। उनपर बीफ ले जाने के शक में हमला किया गया था। इस घटना को एक साल से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन उनके परिवार को आज तक मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिला है। वह हर दरवाजे पर जाकर प्रमाण पत्र पाने की कोशिश कर रहे हैं।
विज्ञापन
पुलिस अब तक वह रिपोर्ट जमा नहीं करवा पाई है जिससे उसकी मौत के स्थल का पता चल सके। इसी वजह से परिवार मृत्यु प्रमाणपत्र को पाने के लिए संघर्ष कर रहा है। अलीमुद्दीन के बेटे शहजाद अंसारी ने बताया, 'हम लगातार पुलिस स्टेशन, उप-मंडल अधिकारी के कार्यालय, उप-कमिश्नर के कार्यालय और रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसिंज में भागदौड़ कर रहे हैं। मेरे पिता ने कुछ बीमा योजनाए की हुई थीं। हमें बहन की शादी के लिए पैसों की जरुरत है लेकिन हम बीमा के पैसों पर दावा तभी कर सकते हैं जब हमारे पास मृत्यु प्रमाण पत्र आ जाएगा।'
विज्ञापन
अलीमुद्दीन का मामला पहला ऐसा था जिसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 12 में से 11 आरोपियों को दोषी पाया था और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि इस साल जून में 9 आरोपियों को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। जमानत मिलने के बाद आरोपी केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा से मिलने के लिए उनके आवास पर गए थे और मंत्री ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया था। जिसकी वजह से विपक्ष ने उनपर निशाना साधा था। इसके बाद उन्हें दो बार सफाई देनी पड़ी थी।
विज्ञापन