फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   jharkhand high court order son to give alimony to his father quote vedas mahabharat in verdict

Jharkhand: 'पिता का स्थान स्वर्ग से ऊंचा', हाईकोर्ट ने बेटे को बुजुर्ग पिता को गुजारा भत्ता देने का दिया आदेश

Fri, 26 Jan 2024 03:19 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 26 Jan 2024 03:19 PM IST
सार

झारखंड हाईकोर्ट के जज सुभाष चंद ने अपने फैसले में महाभारत में वर्णित यक्ष प्रश्नों पर युधिष्ठिर के उत्तरों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाभारत में पांडवों में सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर ने कहा था कि पिता का स्थान सबसे ऊंचा होता है। 

विज्ञापन
jharkhand high court order son to give alimony to his father quote vedas mahabharat in verdict
Jharkhand High Court - फोटो : Social Media

विस्तार

झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए बेटे को अपने बुजुर्ग पिता को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में महाभारत और वेदों का उल्लेख किया और कहा कि बेटे का अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्य होता है। झारखंड हाईकोर्ट के जज सुभाष चंद ने अपने फैसले में महाभारत में वर्णित यक्ष प्रश्नों पर युधिष्ठिर के उत्तरों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाभारत में पांडवों में सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर ने कहा था कि पिता का स्थान सबसे ऊंचा होता है। 
विज्ञापन


क्या है मामला
झारखंड के कोडरमा में एक कुटुंब अदालत में देवकी साव (60 वर्षीय) ने याचिका दायर कर छोटे बेटे मनोज साव से गुजारा भत्ता दिलाने का अनुरोध किया था। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मनोज को अपने पिता को 3000 रुपये प्रति महीने गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया। मनोज ने कुटुंब अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की और बताया कि उसके पिता की आय के कई अन्य स्त्रोत हैं। हालांकि अब हाईकोर्ट ने भी कुटुंब अदालत के फैसले को बरकरार रखा है और अपने फैसले में वेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि 'एक बेटे का कर्तव्य होता है कि वह अपने माता-पिता की देखभाल करे।'
विज्ञापन


'पति को परिवार से अलग होने के लिए मजबूर नहीं कर सकती पत्नी'
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने एक अहम फैसले में कहा है कि पत्नी अपने पति पर उसके परिवार से अलग रहने का दबाव नहीं बना सकती। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने पति को पत्नी को गुजारा भत्ता देने से मना कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले, वेदों और मनुस्मृति का जिक्र भी किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि बहू द्वारा बूढ़ी सास या दादी सास की सेवा करना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर बिना किसी ठोस वजह के अगर पत्नी अलग रहना चाहती है, तो गुजारा भत्ता देने से इनकार किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed