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झारखंड: नाबालिग को एसिड पिलाने के मामले में पुलिस की कार्रवाई से हाईकोर्ट नाराज, डीजी को दिए यह निर्देश
Sat, 11 Jul 2020 08:55 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, रांची
पीटीआई, रांची
Published by: देव कश्यप
Updated Sat, 11 Jul 2020 08:55 AM IST
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झारखंड हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
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झारखंड उच्च न्यायालय ने हजारीबाग में एक नाबालिग छात्रा को एसिड पिलाने के मामले में पुलिस की धीमी जांच से नाराज होकर शुक्रवार को कहा कि ऐसा लगता है कि इस मामले में पुलिस आरोपियों को बचा रही है। साथ ही न्यायालय ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को मामले में शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिये हैं।
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झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ. रविरंजन एवं सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने शुक्रवार को हजारीबाग में एक नाबालिग छात्रा को एसिड पिलाने के मामले की पुलिस जांच पर गहरी नाराजगी जताई और राज्य के डीजीपी को शपथपत्र दाखिल कर जांच की अद्यतन स्थिति बताने को कहा।
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पीठ ने कहा कि 'पुलिस इस मामले के आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है, लेकिन उसकी पॉलीग्राफी टेस्ट पर मंतव्य मांग रही है। इससे प्रतीत होता है कि पुलिस आरोपी को बचाने का प्रयास कर रही है। अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को अगले सप्ताह नया शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।'
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पिछले वर्ष दिसंबर में हजारीबाग की एक नाबालिग स्कूली छात्रा को कुछ लोगों ने एसिड पिला दिया था। छात्रा का पटना एम्स और रांची के रिम्स में इलाज चल रहा था। एसिड पिलाने के कारण वह दो माह तक कुछ बोल नहीं पा रही थी। अखबारों में खबर प्रकाशित होने के बाद अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने इस पर संज्ञान लिया और मामले को जनहित याचिका में बदल दिया था।
19 जून को न्यायालय ने इस मामले में सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। शुक्रवार को पुलिस विभाग की ओर से जो शपथपत्र दाखिल किया गया उसमें कोई ठोस जानकारी नहीं थी। अभियुक्त को फरार बताया गया। शपथपत्र में कहा गया था कि आरोपी की पॉलीग्राफी टेस्ट कराने के लिए मंतव्य लिया जाएगा।