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BJP: झारखंड में कहां चूक गई भाजपा, आदिवासियों को लेकर नई रणनीति की जरूरत

Sat, 23 Nov 2024 02:13 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Sat, 23 Nov 2024 02:13 PM IST
सार

झारखंड में 1.29 करोड़ के लगभग महिला मतदाता हैं। लगभग 45 लाख महिलाओं को मैया सम्मान योजना का लाभ मिल चुका है। माना जा रहा है कि इन महिलाओं ने झारखंड मुक्ति मोर्चा की किस्मत बदल दी। 

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Jharkhand Assembly Election Results 2024 BJP Tribals new policy against JMM know analysis news and updates
झारखंड चुनाव के नतीजे। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

झारखंड में भाजपा को बहुत बड़ा झटका लगा है। पार्टी नेताओं को यह उम्मीद थी कि पार्टी झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार को पलटते हुए बड़ी जीत हासिल करेगी, लेकिन चुनाव के रुझान और अब तक मिले परिणाम यह इशारा कर रहे हैं कि झारखंड मुक्ति मोर्चा, राजद और कांग्रेस गठबंधन एक बार फिर झारखंड में मजबूत सरकार बनाने जा रही है। भाजपा ने झारखंड का चुनाव जीतने के लिए आदिवासी मतदाताओं पर खूब जोर लगाया था। झामुमो के बागी नेता चम्पई सोरेन और हेमंत सोरेन के परिवार की बहू को अपने साथ लाकर भी पार्टी ने आदिवासियों के बीच पकड़ मजबूत बनाने की कोशिश की थी, लेकिन पार्टी की कोई भी रणनीति काम नहीं आई।  
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झारखंड में 1.29 करोड़ के लगभग महिला मतदाता हैं। लगभग 45 लाख महिलाओं को मैया सम्मान योजना का लाभ मिल चुका है। माना जा रहा है कि इन महिलाओं ने झारखंड मुक्ति मोर्चा की किस्मत बदल दी। यानी इस चुनाव परिणाम में हेमंत सोरेन सरकार की मैय्या सम्मान योजना ने बहुत कारगर भूमिका निभाई है, ऐसा माना जा रहा है। 
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साथ ही आदिवासी मतदाताओं ने इस चुनाव से यह संकेत दे दिया है कि उनके लिए आज भी शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन ही उनके नेता हैं।  भाजपा को आदिवासियों के बीच सर्वमान्य नेता उभारने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना पड़ेगा।  बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा के सहारे झारखंड में अब पार्टी चुनाव नहीं जीत सकती,  इस बात के संकेत मिल रहे हैं। 
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आदिवासियों के एक समूह ने खुद की पहचान हिन्दू धर्म की बजाय एक अलग धार्मिक समूह के रूप में किये जाने की मांग की थी। हेमंत सोरेन ने इस वर्ग की यह मांग स्वीकार कर ली थी, यह भी आदिवासियों के झामुमो के साथ खड़ा होने के पीछे बड़ा कारण बन गया। 

 
माना यह भी जा रहा है कि जिस तरीके से भाजपा ने 'बंटोगे तो कटोगे' जैसा नारा झारखंड में दिया था उसका उल्टा असर हुआ है। मुस्लिम मतदाता पूरी तरह झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के साथ खड़े हो गए, जबकि हिंदू मतदाताओं में विभाजन हुआ और इसका भाजपा को नुकसान हुआ जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा को इसका लाभ होगा।
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