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Jharkhand Assembly Polls: इस खास वजह से महिला वोटरों को रिझाने की चल रही होड़; जमकर पैसा लुटा रहे सियासी दल
Fri, 15 Nov 2024 05:09 AM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Fri, 15 Nov 2024 05:09 AM IST
सार
Jharkhand Vidhan Sabha Chunav 2024: झारखंड में भाजपा ने महिलाओं को 21 सौ रुपये देने का वादा किया तो सरकार ने मासिक भत्ता बढ़ाकर 25 सौ कर दिया।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक पार्टियों में महिला मतदाताओं को रिझाने की होड़ सी लगी हुई है। मतदान को लेकर महिलाओं में बढ़ी जागरूकता को देखते हुए उन्हें लुभाने की कोशिश में वे जमकर पैसा लुटा रही हैं। इसके लिए महिला मतदाताओं को नकद राशि भी दी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक निजी बैंक की ओर से किए गए शोध विभाग की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। कई पार्टियां देश की करीब 67 करोड़ महिलाओं में से करीब पांचवें हिस्से को लुभाने के लिए ऐसी योजनाएं पेश कर रही हैं। विश्लेषक कहते हैं कि भारत में राजनीतिक पार्टियां चुनाव के समय महिला मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए नकद लाभ देने की रणनीति अपना रही हैं। इसका उद्देश्य महंगाई और बेरोजगारी की चिंता को कम करना है।
झारखंड विधानसभा चुनावों से कुछ ही हफ्ते पहले अक्तूबर में झारखंड सरकार ने लगभग 50 लाख महिलाओं को मिलने वाले मासिक भत्ते को एक हजार रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया। यह तब हुआ, जब भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में महिलाओं को 2,100 रुपये प्रति माह देने का वादा कर दिया। विश्लेषकों के मुताबिक, पिछले दशक में भारत में महिलाओं के वोट डालने का प्रतिशत बढ़ा है। कई जगह तो पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। इस वजह से राजनीतिक पार्टियों में महिलाओं को अपनी ओर खींचने की होड़ मची हुई है। विशेषतौर से ऐसा तब है, जब अक्तूबर में महंगाई 14 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई और बेरोजगारी दर भी 8.9 फीसदी पर है।
लाभ योजनाओं के लिए हर साल 2 लाख करोड़ खर्च
एक्सिस का अनुमान है कि भारत के 36 में से एक तिहाई राज्य या संघीय क्षेत्र महिलाओं के लिए लाभ योजनाओं पर हर साल करीब 2 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं, जो कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.6 फीसदी है। पिछले एक साल में कई ऐसी घोषणाएं राष्ट्रीय या स्थानीय चुनावों के समय की गई हैं। महाराष्ट्र में अगले हफ्ते चुनाव है। भाजपानीत सत्ताधारी महायुति ने अगस्त से निम्न-आय वर्ग की महिलाओं को 15 सौ रुपये देने शुरू किए थे। विपक्ष ने इस राशि को दोगुना करने का वादा किया है।
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आर्थिक मदद का असर
रिपोर्ट में चेताया गया है कि राज्यों में होने वाली वित्तीय ढील अंततः राष्ट्रीय बजट पर असर डाल सकती है। हालांकि, महिला वर्ग में अधिक नकद राशि पहुंचने से पारंपरिक पुरुष-प्रधान समाज में कुछ सकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं।
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झारखंड विधानसभा चुनावों से कुछ ही हफ्ते पहले अक्तूबर में झारखंड सरकार ने लगभग 50 लाख महिलाओं को मिलने वाले मासिक भत्ते को एक हजार रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया। यह तब हुआ, जब भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में महिलाओं को 2,100 रुपये प्रति माह देने का वादा कर दिया। विश्लेषकों के मुताबिक, पिछले दशक में भारत में महिलाओं के वोट डालने का प्रतिशत बढ़ा है। कई जगह तो पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। इस वजह से राजनीतिक पार्टियों में महिलाओं को अपनी ओर खींचने की होड़ मची हुई है। विशेषतौर से ऐसा तब है, जब अक्तूबर में महंगाई 14 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई और बेरोजगारी दर भी 8.9 फीसदी पर है।
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लाभ योजनाओं के लिए हर साल 2 लाख करोड़ खर्च
एक्सिस का अनुमान है कि भारत के 36 में से एक तिहाई राज्य या संघीय क्षेत्र महिलाओं के लिए लाभ योजनाओं पर हर साल करीब 2 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं, जो कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.6 फीसदी है। पिछले एक साल में कई ऐसी घोषणाएं राष्ट्रीय या स्थानीय चुनावों के समय की गई हैं। महाराष्ट्र में अगले हफ्ते चुनाव है। भाजपानीत सत्ताधारी महायुति ने अगस्त से निम्न-आय वर्ग की महिलाओं को 15 सौ रुपये देने शुरू किए थे। विपक्ष ने इस राशि को दोगुना करने का वादा किया है।
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आर्थिक मदद का असर
रिपोर्ट में चेताया गया है कि राज्यों में होने वाली वित्तीय ढील अंततः राष्ट्रीय बजट पर असर डाल सकती है। हालांकि, महिला वर्ग में अधिक नकद राशि पहुंचने से पारंपरिक पुरुष-प्रधान समाज में कुछ सकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं।