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Jharkhand: हाईकोर्ट ने देवघर के पूर्व उपायुक्त के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द की, दो साल पहले दर्ज हुआ था मुकदमा
Mon, 12 Aug 2024 11:04 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 12 Aug 2024 11:04 PM IST
सार
Jharkhand: झारखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को देवघर के पूर्व उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द की। दो साल पहले उनके खिलाफ गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे मुकदमा दर्ज कराया था।
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झारखंड हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
झारखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को पूर्व उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द की। गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत पर देवघर के कुंडा पुलिस थाने में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जिसके बाद से भजंत्री मुकदमे का सामना कर रहे थे।
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दुबने ने राजद्रोह और सरकारी गोपनीयता अधिनियम के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए 31 अगस्त, 2022 को दिल्ली में उनके खिलाफ एक शून्य प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिसे बाद में देवघर के कुंडा पुलिस थाने में स्थानांतरित कर दिया गया था। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी ने मामले की सुनवाई की। जिसके बाद उन्होंने भजंत्री के खिलाफ प्राथमिकी और आपराधिक मुकदमे को रद्द कर दिया।
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पूरा मामला कहां से शुरू हुआ
भजंत्री ने अगस्त 2022 में देवघर के कुंडा थाने में एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें निशिकांत दुबे के साथ-साथ सांसद मनोज तिवार और उनके दो बेटों कनिष्कांत दुबे और महिकांत दुबे सहित कई अन्य को आरोपी बनाया गया था। पूर्व उपायुक्त ने आरोप लगाया था कि सभी नौ लोगों ने देवघर हवाई अड्डे पर एटीसी कक्ष में घुसकर और उड़ान भरने के लिए जबरन मंजूरी लेकर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया।
भजंत्री ने प्राथमिकी में क्या आरोप लगाए
इस प्राथमिकी के चलते दुबे और भजंत्री के बीच ट्विटर विवाद हुआ था। प्राथमिकी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए हवाई अड्डे पर रात में उड़ान भरने या उतरने की कोई सुविधा न होने के बावजूद एटीसी से जबरन अनुमति ली गई। अधिकारियों ने बताया कि सभी नौ लोगों के खिलाफ विमान अधिनियम के अलावा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
उच्च न्यायालय ने दिया था ये आदेश
इसके बाद दुबे ने दिल्ली पहुंचने पर भजंत्री के खिलाफ एक शून्य प्राथमिकी दर्ज कराई। जिसे भजंत्री ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने इससे पहले दुबे को मामले में पेश होने और अफनी दलीलें रखने के लिए नोटिस जारी किया था। पीठ ने यह भी आदेश दिया था कि पीठ के समक्ष मामला लंबित रहने तक भजंत्री के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।