झारखंडः किसी भी राज्य सरकार द्वारा पहला प्रयास, लद्दाख में फंसे 60 कामगारों को विमान से मंगवाया
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झारखंड सरकार द्वारा प्रदेश के 60 श्रमिकों को लेह से विमान द्वारा लाने के प्रयास ने जहां-तहां फंसे प्रदेश के अन्य श्रमिकों की उम्मीदें जगा दी हैं। राज्य सरकार ने हिमालयी क्षेत्र से इन श्रमिकों को निकालने का पहला प्रयास किया है। दो महीने की परेशानी और अनिश्चितता के बाद सीमा सड़क संगठन परियोजना से जुड़े 60 श्रमिकों का जत्था शुक्रवार दोपहर दिल्ली पहुंचा। शाम 6 बजे यहां से दूसरी फ्लाइट लेकर रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पहुंचें। झारखंड के मुख्यमंत्री ने इस दौरान एयरपोर्ट पहुंचकर इन प्रवासियों का स्वागत किया।
घरेलू उड़ान शुरू होने के बाद हालांकि संस्थानों और नियोक्ताओं द्वारा श्रमिकों को भेजने की कई कहानी चल रही है, लेकिन किसी राज्य सरकार द्वारा इस पैमाने पर श्रमिकों को विमान से उनके घर पहुंचाने का यह पहला मामला है। ये सभी प्रवासी मजदूर झारखंड के दुमका जिले के हैं और लॉकडाउन के कारण कारगिल जिले के बटालिक के गोरगोडोह गांव में फंसे हुए थे।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 60 श्रमिकों को लाने के लिए एक छोटी टीम बनाई और सभी औपचारिकता पूरी करने के बाद उनकी सुरक्षित वापसी करवाई। श्रमिकों को लाने पर करीब 8 लाख रुपये खर्च हुए हैं। झारखंड के करीब साढ़े सात लाख पंजीकृत मजदूरों में से अन्य राज्यों में फंसे करीब साढ़े तीन से चार लाख श्रमिक अपने घर पहुंच चुके हैं। मुख्यमंत्री के एक करीबी सहयोगी ने बताया कि अंडमान से भी 320 श्रमिकों को लाने के लिए दो फ्लाइटों की व्यवस्था की गई है।