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कोरोना के चलते टेरर फंडिंग के मामले में गिरफ्तारी पर रोक 10 सितंबर तक बढ़ी
Mon, 17 Aug 2020 08:37 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 17 Aug 2020 08:37 PM IST
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कोरोना संक्रमण के संकट को देखते हुए झारखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को टेरर फंडिंग सहित सभी ऐसे मामलों में अंतरिम राहत की अवधि दस सितंबर तक बढ़ा दी है जिनमें आरोपियों को पहले अदालत से राहत मिल चुकी है। मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन और न्यायमूर्ति एसएन प्रसाद की पीठ ने टेरर फंडिंग के मामले में सुनवाई करते हुए दस सितंबर तक यह अंतरिम राहत बढ़ाने का निर्देश दिया। इन मामलों में राहत की अवधि आज ही समाप्त हो रही थी।
उच्च न्यायालय ने इस वर्ष दस फरवरी को आरोपियों की याचिका पर एनआइए की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। अदालत ने नक्सली संगठनों को धन मुहैया कराने से जुड़े टेरर फंडिंग के इन तीनों आरोपियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए इनको दी गयी राहत को बरकरार रखा और उसकी अवधि दस सितंबर तक बढ़ा दी।
आधुनिक पॉवर लिमिटेड के पूर्व प्रबंध निदेशक महेश अग्रवाल, ट्रासंपोर्टर विनीत व सोनू अग्रवाल ने उच्च न्यायालय में इस मामले में याचिका दाखिल की थी।
इस मामले की जांच वर्ष 2018 से राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है। इस मामले में तीनों आरोपियों ने चार फरवरी, 2020 को उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
टेरर फंडिंग समेत तमाम ऐसे मामलों में कोरोना संक्रमण को देखते हुए फिलहाल किसी दंडात्मक कार्रवाई पर उच्च न्यायालय ने सात अप्रैल को रोक लगा दी थी जिसे पहले जुलाई अंत तक और अब दस सितंबर तक बढ़ा दिया गया है।
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उच्च न्यायालय ने इस वर्ष दस फरवरी को आरोपियों की याचिका पर एनआइए की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। अदालत ने नक्सली संगठनों को धन मुहैया कराने से जुड़े टेरर फंडिंग के इन तीनों आरोपियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए इनको दी गयी राहत को बरकरार रखा और उसकी अवधि दस सितंबर तक बढ़ा दी।
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आधुनिक पॉवर लिमिटेड के पूर्व प्रबंध निदेशक महेश अग्रवाल, ट्रासंपोर्टर विनीत व सोनू अग्रवाल ने उच्च न्यायालय में इस मामले में याचिका दाखिल की थी।
इस मामले की जांच वर्ष 2018 से राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है। इस मामले में तीनों आरोपियों ने चार फरवरी, 2020 को उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
टेरर फंडिंग समेत तमाम ऐसे मामलों में कोरोना संक्रमण को देखते हुए फिलहाल किसी दंडात्मक कार्रवाई पर उच्च न्यायालय ने सात अप्रैल को रोक लगा दी थी जिसे पहले जुलाई अंत तक और अब दस सितंबर तक बढ़ा दिया गया है।
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