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संकट में श्रमिक: अफ्रीका में फंसे झारखंड के 48 मजदूर, पिछले तीन महीने से नहीं मिली है पगार; भुखमरी की नौबत

Fri, 31 Oct 2025 08:58 PM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: तरुणेंद्र चतुर्वेदी Updated Fri, 31 Oct 2025 08:58 PM IST
सार

अफ्रीका के ट्यूनीशिया में झारखंड के 48 मजदूर पिछले तीन महीनों से फंसे हुए हैं। कंपनी ने उनका वेतन रोक दिया है, जिससे वे भूखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। मजदूरों ने वीडियो संदेश जारी कर वतन वापसी और बकाया वेतन की मांग की है, जबकि सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की अपील की है।

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48 workers from Jharkhand are stranded in Tunisia, Africa for the last three months.
गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग जिले के 48 प्रवासी मजदूर अफ्रीका के ट्यूनीशिया में फंसे हुए हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड के हजारीबाग, गिरिडीह और बोकारो जिले के मजदूरों का विदेश में फंसने का सिलसिला जारी है। गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग जिले के 48 प्रवासी मजदूर अफ्रीका के ट्यूनीशिया में फंसे हुए हैं। पिछले तीन माह से मजदूरों को कंपनी की ओर से मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इस वजह से मजदूरों के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। वहां फंसे मजदूरों ने वीडियो संदेश में अपना दर्द साझा करते हुए कहा है कि हम यहां बहुत बुरी हालत में हैं। कंपनी ने हमारा वेतन रोक दिया है और हमारे पास खाने तक के पैसे नहीं बचे हैं। हम बस किसी तरह अपने घर वापस लौटना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने बकाया वेतन के भुगतान की मांग भी की है।
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कब थमेगा यह संकट
इस सिलसिले में प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने केंद्र और राज्य सरकार से मजदूरों की सकुशल वतन वापसी के लिए ठोस कूटनीतिक पहल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विदेशों में फंसने वाले मजदूरों का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार प्रवासी मजदूर ज्यादा पैसे कमाने की लालच में विदेश जाकर फंस चुके हैं। काफी मशक्कत के बाद उनकी वतन वापसी कराई गई। इसके बावजूद प्रवासी मजदूर पुरानी घटनाओं से सबक नहीं ले रहे हैं।
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वहीं, पिछले छह महीने पूर्व साउथ अफ्रीका के नाइजर से 25 अप्रैल 2025 को बगोदर के दोंदलो पंचायत के संजय महतो, चंद्रिका महतो, राजू महतो, फलजीत महतो एवं मुंडरो के उत्तम महतो का अपहरण कर लिया गया था, जिसका अब तक कुछ पता नहीं चल सका है। ऐसे में सरकार को मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए रोजगार की व्यवस्था करने की जरूरत है।
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हजारीबाग जिले से 19 मजदूर हैं
विष्णुगढ़ अमरदीप चौधरी (ऊंचाघाना), जिवाधन महतो (ऊंचाघाना), धानेश्वर महतो (ऊंचाघाना), जागेश्वर कुमार महतो (ऊंचाघाना), गोविंद कुमार महतो (ऊंचाघाना), खिरोधर महतो (ऊंचाघाना), नागेंद्र कुमार महतो (ऊंचाघाना), कैलाश महतो (ऊंचाघाना), नीलकंठ महतो (ऊंचाघाना), अनंतलाल महतो (बंदखारो), खुशलाल महतो (बंदखारो), जगतपाल महतो (बलकमक्का), मुकेश कुमार (खरकी), मंटू महतो (ज्ञानगढ़ा), गंगाधर महतो (मुरगामो), मुकेश कुमार (चानो), दिनेश तुरी (खरना), देवेंद्र ठाकुर (खरना), शंकर घांसी (खेदाडीह)।


गिरिडीह जिले से 14 मजदूर
बगोदर-नंदलाल महतो (माहुरी), संतोष महतो (अडवारा), गुरुचरण महतो (बेको), मनोज कुमार मंडल (दोंदलो), खुबलाल महतो (दोंदलो), अशोक कुमार (मुंडरो)।
सरिया-झंडू महतो (कोसी), सेवा महतो (कोसी), मुरली मंडल (उलीबार), सुखदेव सिंह (लोवाबार)।
डुमरी-संजय कुमार (जरूवाडीह)।
पिरटांड-संजय कुमार महतो (खुखरा)।
गिरिडीह-सुनील टूड्डू (बेरागढ़ा खुर्द), मिरुलाल हसदा (बेरागढ़ा खुर्द)।

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बोकारो जिले से 15 मजदूर
चंद्रपुरा-अजय कुमार (फतेहपुर), अनिल कुमार (फतेहपुर), गोपाल महतो (खलचो)।
पेटरवार-राजेश करमाली (पेटरवार)।
गोमिया-लालू करमाली (चिलगो), जगन्नाथ महतो (चिलगो), रूपलाल महतो (चुन्नू महुआटांड़), दीपक सिंह (तिसरी), कारू सिंह (तिसरी), जगन्नाथ महतो (सीधाबारा), बिरसाही तुरी (सीधाबारा), सुबोध मरांडी (तिसरी), मनोज कुमार रविदास (करी), खेदन सिंह (क्रुकनालो), सुखदेव महतो (तिसरी)।
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