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...तो पत्थर हटाकर अमरनाथ गुफा तक बनाया गया था रास्ता, पहले खुले में लगते थे शिविर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 26 Jun 2018 05:53 PM IST
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अमरनाथ गुफा
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अमरनाथ यात्रा में वर्ष 1930 में बालटाल-अमरनाथ गुफा और पहलगाम-गुफा तक पत्थरों को हटाकर रास्ता बनाया था। हालांकि, उस समय जम्मू शहर से होकर ही श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम के रास्ते से शिवलिंग के दर्शन करने जाते थे। तब जम्मू शहर भीड़भाड़ वाला इलाका नहीं था। अधिकांश जगह शहर में खाली थीं। इसलिए यहां श्रद्धालु खुली जगहों पर तंबुओं में आश्रय लेते थे। समूह में चलकर अमरनाथ गुफा तक पहुंचते थे। इसका खुलासा 1930 में तैयार किए वीडियो के माध्यम से हुआ है।
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उस समय अमरनाथ गुफा जहां पर पवित्र शिवलिंग है, जगह खाली होती थी। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी कर किए जाते थे। 1930 से लेकर अब तक यात्रा में काफी बदलाव आ चुका है। लोग अब जम्मू से आधार शिविर से पहलगाम तक बस या अन्य वाहनों की सहायता से पहुंचते हैं। इसके बाद पैदल अमरनाथ गुफा तक पहुंचते। लेकिन, 1930 या इससे पहले लोग जम्मू से अमरनाथ गुफा तक रुक-रुक पैदल पहुंचते थे। अब लोग हेलीकाप्टर सुविधा का लाभ भी लेते हैं।
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पहले श्रद्धालु ही बनाते थे भोजन
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आजादी से पहले लंगर व्यवस्था बहुत कम होती थी। ब्रिटिश मीडिया द्वारा 1930 में जारी किए गए फोटो में श्रद्धालु का समूह एक जगह भोजन तैयार कर रहे हैं। लोग उस समय भी घोड़ों पर बैठकर यात्रा में भाग लेते थे। अब भी यह प्राचीन परंपरा जारी है। बालटाल में भी घोड़े मिलते थे।
हमेशा खुली रहती थी गुफा
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श्रद्धालु सामान को डंडों के आगे और पीछे कपड़ों में बांधकर चलते थे। उस समय अमरनाथ गुफा दर्शन के लिए हमेशा खुली रहती थी। हिमलिंग के आगे पत्थरों को हटाकर वहां जगह बनाई गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पत्थरों को हटाकर रास्ता बनाया था। इन रास्तों पर लोग आज भी यात्रा करते हैं।