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पूर्व तैनाती पर जाने को शिक्षक तैयार नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
Updated Wed, 21 Jan 2015 01:32 AM IST
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शिक्षकों के लिए हाल में ही जारी किए गए डिटैचमेंट के आदेश ने उनकी दुविधा बढ़ा दी है। आदेश के अनुसार शिक्षकों को वापस पूर्व स्थान पर ड्यूटी के लिए जाना है। इस पर शिक्षकों का तर्क है कि जब वह वहां अपनी नियुक्ति का समय पूरा कर चुके हैं तो वहां क्यों जाएं। शिक्षकों ने इस आदेश के विरोध में प्रदर्शन भी किया है और सप्ताह भर में आदेश वापस लेने की मांग की।
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गौर करने वाली बात है कि जिले में अब भी एक हजार से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं। इसके चलते विद्यार्थियों की शिक्षा बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। आदेश के अनुसार चुनाव से पहले जो भी अटैचमेंट, डिप्लायमेंट या फिर तबादला किया गया, उसे रद्द कर दिया गया है।
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आदेश में कहा गया है कि उपरोक्त प्रक्रिया के रद्द होने पर शिक्षकों को उनके पूर्व स्थान पर ड्यूटी के लिए जाना होगा। यानी जो शिक्षक अपने दो साल के कार्यकाल को बाहरी जिलों में पूरा कर आ चुके हैं, उन्हें फिर से उसी जिले और स्कूल में जाना होगा। आदेश के अनुसार अगर किसी शिक्षक ने तबादला करवाया है तो वह भी रद्द माना जाएगा।
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टीचर्स फोरम की आपत्ति- जम्मू-कश्मीर टीचर्स फोरम के प्रांतीय सचिव अमरनाथ ठाकुर ने कहा कि आदेश तानाशाही फरमान है। उन्होंने कहा कि आदेश विभाग और जीएडी के नियमों को तोड़ रहा है। जब कोई कर्मचारी किसी स्थान पर दो साल का कार्यकाल पूरा कर लेता है तो उसका तबादला किया जाता है। लेकिन आदेश के अनुसार अब शिक्षक को फिर उनके पूर्व स्थान पर जाना होगा।
उन्होंने कहा कि जब शिक्षकों ने वहां नियुक्ति का समय पूरा कर लिया है तो उन्हें वापस जाने के लिए क्यों कहा जा रहा है। जिले में शिक्षकों की जरूरत है, इसलिए आदेश को वापस लिया जाना चाहिए।