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रामलीला का मंचन श्ाुरू
ब्यूूराे/अमर उजाला, जम्मूू
Updated Fri, 26 Sep 2014 02:10 AM IST
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शहर के प्रमुख दीवाना और बिल्लू मंदिर में कलाकारों ने रामलीला से जुड़े विभिन्न दृश्यों पर दर्शकों को बांधे रखा।
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पहले दिन श्रवण कुमार, नारद मोह, वेदवती रावण संवाद, देवते, दशरत दरबार, ताड़का बध आदि दृश्यों का मंचन किया गया। इससे पहले दीवाना मंदिर में बाढ़ में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए श्रद्धांजलि दी गई।
इसके अलावा रामलीला के कलाकार आेम प्रकाश आैर सत समोत्रा को भी श्रद्धांजलि दी। बिल्लू मंदिर में सरस्वती ड्रामाटिक क्लब की ओर से सरस्वती वंदना के साथ रामलीला की शुरुआत की गई। शो से पहले रामलीला के आर्ट निदेशक बुआदास को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद नारद मोह का मंचन किया गया।
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इसमें नारद को तपस्या करते हुए दिखाया जाता है। जब कामदेव भी नारद की तपस्या भंग नहीं कर पाते, तो नारद को अपने पर घमंड हो जाता है। नारद यह बात अपने आराध्य देव श्री हरि को बताते हैं कि उनकी तपस्या को कामदेव भी भंग नहीं कर सके हैं। नारद का घमंड देख कर श्री हरि नारद का घमंड तोड़ने के लिए माया रचते हैं।
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माया के तहत महा ऋषि नारद एक सुंदर स्त्री को देखकर उस पर मोहित हो जाते हैं। उससे शादी करना चाहते हैं। इस पर वह स्त्री नारद को बताती है कि कल उसका स्वयंवर है। आप भी उसमें शामिल हो सकते हैं। नारद को जब इस बात का पता चलता है तो नारद भगवान नारायण के पास जाकर श्री हरि रूप मांगते हैं।
भगवान विष्णु नारद को वानर का रूप दे देते हैं। दूसरे दिन जब नारद स्वयंवर में शामिल होते हैं तो सभी उनको देख कर हंसते हैं। इस पर नारद जब अपना रूप ताल में देखते हैं तो उनको बहुत गुस्सा आता है।
इस पर नारद श्री हरि को श्राप देते हैं कि जिस वानर रूप से वह हंसी का पात्र बने हैं वह रूप श्री रामावतार में रावण वध में उनकी मदद करेगा। इसके अलावा रावण तपस्या को दिखाया गया। दीवान मंदिर में श्री सनातन धर्म नाटक समाज की ओर से पूजा-अर्चना के साथ रामलीला को शुरू किया गया।
शो में श्रवण कुमार के दृश्य में दिखाया गया कि दशरथ अंधे मां-बाप के बेटे श्रवण को शब्दभेदी वाण से मार देते हैं। इस बात की जानकारी जब श्रवण के माता-पिता को लगती है तो उन्होंने दशरथ को श्राप दिया कि जिस प्रकार से वह पुत्र वियोग में मर रहे हैं, उसी प्रकार से दशरथ भी पुत्र वियोग में मरेंगे।
इसके अलावा कैलाश तलहटी के दृश्य में दिखाया जाता है, जिसमें रावण भगवान शिव के कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास करता है। इस दौरान उनकी बाजू पर्वत के नीचे आ जाती है। तभी रावण ने भगवान शिव की स्तुति शिव तांडव से कर उनको प्रसन्न कर चंद्रहास तलवार वरदान के रूप में ले ली।
भगवान शिव रावण को चेतावनी भी देते हैं कि जिस दिन वह इस तलवार की पूजा नहीं करेगा, उसी दिन उसकी मृत्यु हो जाएगी। इसके अलावा वेदपति रावण, ताड़का वध आदि दृश्य दिखाए गए।