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ट्यूटोरियल सेंटर की इमारत से सीलिंग हटाने के आदेश
Jammu
Updated Sat, 21 Jun 2014 05:35 AM IST
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जम्मू। नवनीत महाजन द्वारा दर्ज एक याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम को उस इमारत की सीलिंग हटाने का आदेश दिया, जिसमें ट्यूटोरियल सेंटर चलता था।
याचिकाकर्ता के अनुसार 5-ए त्रिकुटा नगर में उसका एक 60 गुणा 90 फीट का प्लाट है। जेडीए से जमीन का कब्जा लेने के बाद उन्होंने निगम के पास इमारत निर्माण के लिए आवेदन किया। 9 मार्च 2010 को जारी आदेश के तहत उसे ग्राउंड, फर्स्ट और सेकेंड फ्लोर पर निर्माण की इजाजत दी गई। निर्माण शुरू करने के बाद याचिकाकर्ता को पता चला कि पश्चिम छोर पर दर्शाया गया प्लाट छोटा निकला। उस छोर को बरकरार रखने के क्रम में थोड़ा अतिक्रमण हो गया।
31 मई 2011 को निगम ने कोबा की धारा 7(1) के तहत नोटिस जारी किया। इसके बाद उसने ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील की, जहां उन्हें यथास्थिति बहाल करने को कहा गया। याचिकाकर्ता के अनुसार उसके बाद उन्होंने कोई निर्माण नहीं किया, लेकिन 28 फरवरी 2013 को प्रतिवादी ने अधिनियम 8(1) के तहत नया आदेश जारी करते हुए इमारत को सील करने के आदेश जारी कर दिए जबकि वादी को इस संबंध में अपना पक्ष रखने का भी मौका नहीं दिया गया। आदेश में रिहायशी इमारत को कामर्शियल बनाने का आरोप लगाया गया।
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याचिकाकर्ता के वकील प्रणव कोहली और जेएमसी के वकील एसएस नंदा की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस बंसी लाल भट ने 28 फरवरी 2013 को जारी आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही प्रतिवादी को इमारत से सील हटाने के निर्देश जारी किए। मामले में पारित बिल्डिंग प्लान का उल्लंघन करने के आरोप में मामला ट्रिब्यूनल के समक्ष पूर्व की तरह चलता रहेगा। जेएनएफ
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याचिकाकर्ता के अनुसार 5-ए त्रिकुटा नगर में उसका एक 60 गुणा 90 फीट का प्लाट है। जेडीए से जमीन का कब्जा लेने के बाद उन्होंने निगम के पास इमारत निर्माण के लिए आवेदन किया। 9 मार्च 2010 को जारी आदेश के तहत उसे ग्राउंड, फर्स्ट और सेकेंड फ्लोर पर निर्माण की इजाजत दी गई। निर्माण शुरू करने के बाद याचिकाकर्ता को पता चला कि पश्चिम छोर पर दर्शाया गया प्लाट छोटा निकला। उस छोर को बरकरार रखने के क्रम में थोड़ा अतिक्रमण हो गया।
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31 मई 2011 को निगम ने कोबा की धारा 7(1) के तहत नोटिस जारी किया। इसके बाद उसने ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील की, जहां उन्हें यथास्थिति बहाल करने को कहा गया। याचिकाकर्ता के अनुसार उसके बाद उन्होंने कोई निर्माण नहीं किया, लेकिन 28 फरवरी 2013 को प्रतिवादी ने अधिनियम 8(1) के तहत नया आदेश जारी करते हुए इमारत को सील करने के आदेश जारी कर दिए जबकि वादी को इस संबंध में अपना पक्ष रखने का भी मौका नहीं दिया गया। आदेश में रिहायशी इमारत को कामर्शियल बनाने का आरोप लगाया गया।
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याचिकाकर्ता के वकील प्रणव कोहली और जेएमसी के वकील एसएस नंदा की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस बंसी लाल भट ने 28 फरवरी 2013 को जारी आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही प्रतिवादी को इमारत से सील हटाने के निर्देश जारी किए। मामले में पारित बिल्डिंग प्लान का उल्लंघन करने के आरोप में मामला ट्रिब्यूनल के समक्ष पूर्व की तरह चलता रहेगा। जेएनएफ