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घूसखोर पटवारी को दो वर्ष की कैद
Jammu
Updated Sun, 25 May 2014 05:34 AM IST
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जम्मू। भ्रष्टाचार निरोधक विशेष अदालत ने सतवारी हलका पटवारी मदन लाल को घूस लेने के आरोप में दो साल कैद और 30 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। मदन लाल को विजिलेंस ने आठ साल पहले रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था।
विजिलेंस केस के अनुसार गुरजीत सिंह ने शिकायत पेश की और बताया कि उसने बलवंत कौर से 11 मरला जमीन खरीदी। वह पटवारी चट्ठा हलका सतवारी मदन लाल से फर्द लेने के लिए पहुंचा, ताकि वह जमीन रजिस्ट्री अपने नाम करा सके। पटवारी ने कहा कि वह बलवंत कौर के नाम से आवेदन करे और उसमें अपना नाम भी लिखे। शिकायतकर्ता ने वैसे ही किया और आवेदन पटवारी को दिया। पटवारी ने फर्द काटने के 11 हजार रुपये रिश्वत के तौर पर मांगे। बातचीत के बाद नौ हजार रुपये देने का समझौता हुआ। विजिलेेंस को भी शिकायत की गई। जैसे ही नौ हजार रुपये दिए गए। विजिलेंस टीम ने छापा मारकर पटवारी को रंगे हाथों रिश्वत के रुपये लेते हुए दबोच लिया। विशेष न्यायाधीश पुनीत गुप्ता ने चीफ प्रासीक्यूटिंग अफसर हरमिंदर सिंह और एडवोकेट आरके कोतवाल की दलीलों पर पाया कि जनसेवक होने के नाते उसने अवैध तरीके से रिश्वत मांगी है। विजिलेंस बिना किसी शक के केस को साबित करने में सफल रही है। उसे आरपीसी की धारा 161 के तहत एक साल कैद और 15 हजार रुपये जुर्माना और क्रप्शन एक्ट में एक साल कैद और 15 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। सजाएं अलग-अलग चलेंगी। जेएनएफ
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विजिलेंस केस के अनुसार गुरजीत सिंह ने शिकायत पेश की और बताया कि उसने बलवंत कौर से 11 मरला जमीन खरीदी। वह पटवारी चट्ठा हलका सतवारी मदन लाल से फर्द लेने के लिए पहुंचा, ताकि वह जमीन रजिस्ट्री अपने नाम करा सके। पटवारी ने कहा कि वह बलवंत कौर के नाम से आवेदन करे और उसमें अपना नाम भी लिखे। शिकायतकर्ता ने वैसे ही किया और आवेदन पटवारी को दिया। पटवारी ने फर्द काटने के 11 हजार रुपये रिश्वत के तौर पर मांगे। बातचीत के बाद नौ हजार रुपये देने का समझौता हुआ। विजिलेेंस को भी शिकायत की गई। जैसे ही नौ हजार रुपये दिए गए। विजिलेंस टीम ने छापा मारकर पटवारी को रंगे हाथों रिश्वत के रुपये लेते हुए दबोच लिया। विशेष न्यायाधीश पुनीत गुप्ता ने चीफ प्रासीक्यूटिंग अफसर हरमिंदर सिंह और एडवोकेट आरके कोतवाल की दलीलों पर पाया कि जनसेवक होने के नाते उसने अवैध तरीके से रिश्वत मांगी है। विजिलेंस बिना किसी शक के केस को साबित करने में सफल रही है। उसे आरपीसी की धारा 161 के तहत एक साल कैद और 15 हजार रुपये जुर्माना और क्रप्शन एक्ट में एक साल कैद और 15 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। सजाएं अलग-अलग चलेंगी। जेएनएफ
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