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अंतिम नवरात्र पर महामाई के दर भक्तों का लगा मेला
Jammu
Updated Wed, 09 Apr 2014 05:31 AM IST
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जम्मू। रामनवमी पर मंगलवार को कंजक पूजन के साथ महामाई का आशीर्वाद पाया गया। सूर्य पुत्री तवी सहित अन्य बहते पानी वाले स्थानों में साख प्रवाह करने के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे। शहर के प्रमुख बावे वाली माता में भक्तों की आस्था देखते ही बनी। मां के दर्शन के लिए मंदिर के बाहर मुख्य सड़क से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले ही कतारें लगीं थीं। तेज धूप भी भक्तों का जोश और उत्साह कम नहीं कर पाई।
रामनवमी पर मंगलवार पड़ने से सुबह से ही बावे वाली माता के मंदिर में भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था और देर शाम तक यह सिलसिला चलता रहा। मां के दरबार में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पैदल पहुंचकर गुणगान किया। मंदिर के द्वार खुलने के साथ ही जय माता दी, बोल सच्चियां ज्योतां वाली माता तेरी सदा ही जय आदि के जयघोषों से पूरा माहौल महामाई के रंग में रंगा रहा। इसमें मां के दर्शन के लिए पुरुष और महिला श्रद्धालुओं को बारी-बारी छोड़ा गया। रामनवमी पर भंडारों का भी आयोजन किया गया था। बावे वाले मंदिर से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित महामाया माता मंदिर में भी आस्था का सैलाब उमड़ा। मौसम साफ होने के कारण मां के दरबार में हाजिरी देने स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी लोग ट्रैक्टर ट्रालियों पर सवार होकर पहुंचे थे। पुराने शहर के पक्का डंगा स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर में भी भक्तों की आस्था देखते ही बनी। हाईवे पर नगरोटा स्थित कोल कंडोली मंदिर में भी मां के दर्शन के लिए भक्त पहुंचेे। श्री माता वैष्णो देवी के पहले दर्शन से कोल कंडोली की काफी मान्यता है।
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रामनवमी पर मंगलवार पड़ने से सुबह से ही बावे वाली माता के मंदिर में भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था और देर शाम तक यह सिलसिला चलता रहा। मां के दरबार में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पैदल पहुंचकर गुणगान किया। मंदिर के द्वार खुलने के साथ ही जय माता दी, बोल सच्चियां ज्योतां वाली माता तेरी सदा ही जय आदि के जयघोषों से पूरा माहौल महामाई के रंग में रंगा रहा। इसमें मां के दर्शन के लिए पुरुष और महिला श्रद्धालुओं को बारी-बारी छोड़ा गया। रामनवमी पर भंडारों का भी आयोजन किया गया था। बावे वाले मंदिर से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित महामाया माता मंदिर में भी आस्था का सैलाब उमड़ा। मौसम साफ होने के कारण मां के दरबार में हाजिरी देने स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी लोग ट्रैक्टर ट्रालियों पर सवार होकर पहुंचे थे। पुराने शहर के पक्का डंगा स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर में भी भक्तों की आस्था देखते ही बनी। हाईवे पर नगरोटा स्थित कोल कंडोली मंदिर में भी मां के दर्शन के लिए भक्त पहुंचेे। श्री माता वैष्णो देवी के पहले दर्शन से कोल कंडोली की काफी मान्यता है।
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