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भ्रष्टाचार के आरोप से बीडीओ और जेई बरी
Jammu
Updated Wed, 12 Jun 2013 05:30 AM IST
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जम्मू। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जम्मू जफर हुसैन बेग ने पुुंछ के तत्कालीन ब्लाक विकास अधिकारी (बीडीओ) मोहम्मद शरीफ मलिक निवासी वार्ड नंबर तीन पुुंछ, जूनियर इंजीनियर (जेई) मंजूर हुसैन निवासी बैंच पुंछ, विलेज लेवल वर्कर गिरिश चंद्र निवासी वार्ड नंबर नौ पुंछ, मोेहम्मद रशीद निवासी खनेतर पुंछ, ठेकेदार लेख राज निवासी जल्लास हवेली पुंछ को भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी के आरोपों से बरी कर दिया। इन अधिकारियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करके 1992-93 में रूरल सैनिटेशन प्रोग्राम के तहत 56 शौचालय बनाए। इनके निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ है।
विजिलेंस केस के अनुसार एडवोकेट ताज हुसैन शाह पुंछ और अन्यों ने 29 जून 1993 और 16 अप्रैल 1994 में दो लिखित शिकायत पेश कीं। इस शिकायत में बताया गया कि रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत बाढ़ राहत एवं विकास कार्यों के लिए विशेष फंड आया। असिस्टेंट कमिश्नर रेवन्यू पुंछ जीएम डार और अन्य राजस्व अधिकारियों ने सरकारी खजाने से 62 लाख रुपये निकाले, जो बाढ़ पीड़ितों में बांटे जाने थे। इन अधिकारियों ने केवल 12 लाख रुपयों का ही वितरण किया। बाकी 50 लाख रुपया फर्जी दस्तावेज बनाकर हेराफेरी करके डकार लिए। जल्लास और पुंछ के अन्य क्षेत्रों में रूरल सैनिटेशन प्रोग्राम के तहत कई ऐसे काम करवाए, जिनमें कोताही बरती गई। इस शिकायत पर विजिलेंस ने मामला दर्ज कर लिया। जांच के दौरान संबंधित दस्तावेज भी हासिल किए। सीमेंट के नमूने भी लिए। जांच में पाया कि निर्माण किए गए शौचालय मापदंडों के आधार पर नहीं थे। जल्लास में 84 शौचालय तैयार हुए जो घटिया क्वालिटी के थे। एक शौचालय तैयार करने मेें 64 सौ रुपये खर्च किए गए, जबकि लाभ पाने वाले लोगों ने स्वयं मजदूरी की है। कई निर्माण की सामग्री फारेंसिक लैब के निदेशक को भेजी गई। रिपोर्ट सही नहीं पाई गई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जम्मू ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और पाया कि लैबोरेटरी में भेजे गए नमूने की रासायनिक जांच की गई। फाइल मेें मौजूद रिपोर्ट में बताया नहीं गया कि निर्माण के लिए घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। अन्य चार आरोप भी साबित नहीं हुए। न्यायालय ने आरोपियों के जमानती बांड रद्द कर उन्हें बरी करने के आदेश दिए। जेएनएफ
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विजिलेंस केस के अनुसार एडवोकेट ताज हुसैन शाह पुंछ और अन्यों ने 29 जून 1993 और 16 अप्रैल 1994 में दो लिखित शिकायत पेश कीं। इस शिकायत में बताया गया कि रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत बाढ़ राहत एवं विकास कार्यों के लिए विशेष फंड आया। असिस्टेंट कमिश्नर रेवन्यू पुंछ जीएम डार और अन्य राजस्व अधिकारियों ने सरकारी खजाने से 62 लाख रुपये निकाले, जो बाढ़ पीड़ितों में बांटे जाने थे। इन अधिकारियों ने केवल 12 लाख रुपयों का ही वितरण किया। बाकी 50 लाख रुपया फर्जी दस्तावेज बनाकर हेराफेरी करके डकार लिए। जल्लास और पुंछ के अन्य क्षेत्रों में रूरल सैनिटेशन प्रोग्राम के तहत कई ऐसे काम करवाए, जिनमें कोताही बरती गई। इस शिकायत पर विजिलेंस ने मामला दर्ज कर लिया। जांच के दौरान संबंधित दस्तावेज भी हासिल किए। सीमेंट के नमूने भी लिए। जांच में पाया कि निर्माण किए गए शौचालय मापदंडों के आधार पर नहीं थे। जल्लास में 84 शौचालय तैयार हुए जो घटिया क्वालिटी के थे। एक शौचालय तैयार करने मेें 64 सौ रुपये खर्च किए गए, जबकि लाभ पाने वाले लोगों ने स्वयं मजदूरी की है। कई निर्माण की सामग्री फारेंसिक लैब के निदेशक को भेजी गई। रिपोर्ट सही नहीं पाई गई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जम्मू ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और पाया कि लैबोरेटरी में भेजे गए नमूने की रासायनिक जांच की गई। फाइल मेें मौजूद रिपोर्ट में बताया नहीं गया कि निर्माण के लिए घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। अन्य चार आरोप भी साबित नहीं हुए। न्यायालय ने आरोपियों के जमानती बांड रद्द कर उन्हें बरी करने के आदेश दिए। जेएनएफ
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