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आटे की तर्ज पर डिपो से चावल के बैग मिलेंगे
Jammu
Updated Sat, 20 Apr 2013 05:30 AM IST
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जम्मू। संभाग के राशन कार्ड धारकों को नई सुविधा देने पर उपभोक्ता और जन वितरण विभाग काम कर रहा है। अब लोगों को राशन डिपो से चावल भी आटे की तर्ज पर बंद बैग में मिलेगा। इस नई कवायद का मकसद राशन कार्ड धारकों को बेहतर गुणवत्ता और तौल में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से राहत दिलाना है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 15 किलो के चावल के बैग शुरू करने पर विभाग तैयारी कर रहा है। मौजूदा समय में आटे के दस किलो के बैग राशन कार्ड धारकों को मिलते हैं और यह योजना काफी सफल रही है। खुले राशन की बाजार में कालाबाजारी करने में आसानी रहती है और तौल में भी गड़बड़ी की आशंका रहती है। जबकि बैग के ऊपर सरकारी राशन का लोगो रहता है और इसे बाजार में बेचा भी नहीं जा सकता साथ ही तौल में भी गड़बड़ी की आशंका नहीं रहती।विभाग के निदेशक घार सिंह चिब के अनुसार विभाग इस दिशा में काम कर रहा है।
कंज्यूमर प्रोटेक्शन आर्गेनाइजेशन के प्रधान डीआर दानिश का कहना है कि पंद्रह किलो के चावल बंद बेग में मिलने से राशन कार्ड धारकों को काफी सुविधा होगी। उनके संगठन ने इससे पहले आटे को राशन कार्ड धारकों को बैग में देने की आवाज उठाई थी और इसके बाद सरकार ने दस किलो के बैग देने शुरू किए। यह प्रयोग काफी सफल रहा। उनका कहना है कि आटे के बैग अगर पांच किलो में भी शुरू हो तो जन वितरण प्रणाली में और सुधार आ सकता है।
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आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 15 किलो के चावल के बैग शुरू करने पर विभाग तैयारी कर रहा है। मौजूदा समय में आटे के दस किलो के बैग राशन कार्ड धारकों को मिलते हैं और यह योजना काफी सफल रही है। खुले राशन की बाजार में कालाबाजारी करने में आसानी रहती है और तौल में भी गड़बड़ी की आशंका रहती है। जबकि बैग के ऊपर सरकारी राशन का लोगो रहता है और इसे बाजार में बेचा भी नहीं जा सकता साथ ही तौल में भी गड़बड़ी की आशंका नहीं रहती।विभाग के निदेशक घार सिंह चिब के अनुसार विभाग इस दिशा में काम कर रहा है।
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कंज्यूमर प्रोटेक्शन आर्गेनाइजेशन के प्रधान डीआर दानिश का कहना है कि पंद्रह किलो के चावल बंद बेग में मिलने से राशन कार्ड धारकों को काफी सुविधा होगी। उनके संगठन ने इससे पहले आटे को राशन कार्ड धारकों को बैग में देने की आवाज उठाई थी और इसके बाद सरकार ने दस किलो के बैग देने शुरू किए। यह प्रयोग काफी सफल रहा। उनका कहना है कि आटे के बैग अगर पांच किलो में भी शुरू हो तो जन वितरण प्रणाली में और सुधार आ सकता है।
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