{"_id":"27-30904","slug":"Jammu-30904-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"हवा महल बनाने से पूरे नहीं होते सपने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हवा महल बनाने से पूरे नहीं होते सपने
Jammu
Updated Mon, 25 Mar 2013 05:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। हवाई किले बनाने से बेहतर है कुछ काम करना। यही संदेश नटरंग की ओर से संडे थिएटर के तहत मंचित हास्य नाटक ‘हवा हवाई’ दे गया। केएम मिश्र के लिखे लघु नाटक में निर्देशन सुमित शर्मा का था। नाटक की कहानी सपने देखने की बजाय काम करने की सीख दे गई।
नाटक की कहानी मध्यम वर्गीय व्यक्ति सुरेश के इर्द-गिर्द घूमती है। सुरेश नौकरी कर रहा होता है, लेकिन उस नौकरी से उसको इतना ही मिल पाता है जिससे उसके जीवन की जरूरतें बड़ी मुश्किल से पूरी होती हैं। इसका परिणाम यह होता है कि वह सपने देखना शुरू कर देता है और सपनों के माध्यम से वह अपनी खुशियों को तलाशना शुरू कर देता है। एक दिन वह अखबार में समाचार पढ़ता है कि हवाई जहाज जल्द ही आम आदमी की पहुंच में होगा क्योंकि वैज्ञानिक ऐसा टू सीटर विमान बनाने जा रहे हैं जो बहुत कम कीमत पर ग्राहकों को मिलेगा। इस खबर से उत्साहित हो सुरेश अपना स्कूटर बेचने के साथ-साथ लोन की योजना तैयार करता है ताकि उसके जीवन का स्तर ऊंचा उठ सके। और तो और वह खुली आंखों से उड़ने का सपना देखन भी शुरू कर देता है।
वह देखता है कि उसके रिश्तेदारों के साथ-साथ उसके दोस्त इससे जल जाते हैं। वह अपनी पूरी योजना और परिवार और मित्र विनोद को सुनाता है। सुरेश की योजना सुनकर सभी उस पर अंदर ही अंदर हंसते हैं, लेकिन सभी की हैरानगी की सीमा का उस समय अंत नहीं रहता है जब खबर के अंत में लिखा होता है कि ऐसा विमान अगले 40 वर्षों के भीतर बन कर तैयार हो जाएगा। सुरेश को अहसास होता है कि उसको सपने देखने की बजाय कोई काम करना चाहिए। नाटक में पवन वर्मा, सुमित शर्मा, शकुंतला, गोपी शर्मा आदि ने विभिन्न भूमिकाएं निभाईं।
विज्ञापन
विज्ञापन
नाटक की कहानी मध्यम वर्गीय व्यक्ति सुरेश के इर्द-गिर्द घूमती है। सुरेश नौकरी कर रहा होता है, लेकिन उस नौकरी से उसको इतना ही मिल पाता है जिससे उसके जीवन की जरूरतें बड़ी मुश्किल से पूरी होती हैं। इसका परिणाम यह होता है कि वह सपने देखना शुरू कर देता है और सपनों के माध्यम से वह अपनी खुशियों को तलाशना शुरू कर देता है। एक दिन वह अखबार में समाचार पढ़ता है कि हवाई जहाज जल्द ही आम आदमी की पहुंच में होगा क्योंकि वैज्ञानिक ऐसा टू सीटर विमान बनाने जा रहे हैं जो बहुत कम कीमत पर ग्राहकों को मिलेगा। इस खबर से उत्साहित हो सुरेश अपना स्कूटर बेचने के साथ-साथ लोन की योजना तैयार करता है ताकि उसके जीवन का स्तर ऊंचा उठ सके। और तो और वह खुली आंखों से उड़ने का सपना देखन भी शुरू कर देता है।
विज्ञापन
वह देखता है कि उसके रिश्तेदारों के साथ-साथ उसके दोस्त इससे जल जाते हैं। वह अपनी पूरी योजना और परिवार और मित्र विनोद को सुनाता है। सुरेश की योजना सुनकर सभी उस पर अंदर ही अंदर हंसते हैं, लेकिन सभी की हैरानगी की सीमा का उस समय अंत नहीं रहता है जब खबर के अंत में लिखा होता है कि ऐसा विमान अगले 40 वर्षों के भीतर बन कर तैयार हो जाएगा। सुरेश को अहसास होता है कि उसको सपने देखने की बजाय कोई काम करना चाहिए। नाटक में पवन वर्मा, सुमित शर्मा, शकुंतला, गोपी शर्मा आदि ने विभिन्न भूमिकाएं निभाईं।
विज्ञापन