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मीटिंग न होने पर व्यापारी भड़के
Jammu
Updated Fri, 22 Mar 2013 05:31 AM IST
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जम्मू। रियासत के बजट में कई आइटमों पर पड़ोसी राज्यों के मुकाबले ज्यादा वैट लागू करने पर व्यापारियों में रोष है। इतना ही नहीं, बजट पेश होने के बाद वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर द्वारा पोस्ट बजट मीटिंग न बुलाए जाने पर भी व्यापारी भड़क गए।
चैंबर भवन में आयोजित बैठक में व्यापारियों ने तलख तेवर दिखाते हुए कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो वे कड़ा संघर्ष करने को मजबूर होंगे। चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रेसीडेंट वाईवी शर्मा ने कहा कि प्री बजट मीटिंग में उद्यमियोें और व्यापारियोें द्वारा दिए गए कुछ सुझावों पर वित्त मंत्री ने विचार किया, लेकिन कई ऐसे सुझाव हैं, जिस पर सरकार की ओर से ध्यान नहीं दिया गया।
शर्मा ने कहा कि देसी घी, ड्राई फ्रूट, जूते और सर्फ ऐेसी आइटम हैं, जिस पर पड़ोसी राज्य पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा के अलावा दिल्ली से भी ज्यादा वैट रियासत में लगाया गया है। देसी घी पर पंजाब में पांच फीसदी वैट है, जबकि जम्मू-कश्मीर में 13 फीसदी है।
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लोग रियासत में देसी घी खरीदने की बजाय पंजाब से लाने लगे हैं। इसके अलावा ब्रांडेड साबुन, ड्राई फ्रूट और जूतों पर 13.5 फीसदी वैट लगाया गया है। खास बात यह है कि इससे राज्य का राजस्व बढ़ने की बजाय घटेगा। इतना ही नहीं, लोग लखनपुर से टैक्स चोरी कर माल लाएंगे और रियासत के व्यापारियों का कारोबार ठप हो जाएगा। उन्होेंने कहा कि यदि प्रतिस्पर्धा के दौर में रियासत के व्यापारियोें का अस्तित्व बचाना है तो पड़ोसी राज्यों के मुकाबले ही वैट तय करना होगा।
चैंबर प्रेसीडेंट ने कहा कि बजट के बाद भी उन्होेंने वित्तीय विभाग के अफसरोें से संपर्क कर पोस्ट बजट मीटिंग करवाने का प्रयास किया था लेकिन अभी तक विभाग से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होेंने व्यापारियोें को आश्वासन दिया कि वे पोस्ट बजट मीटिंग के लिए एक बार फिर प्रयास करेंगे, ताकि वैट की भिन्नता को लेकर होने वाली समस्या को दूर किया जा सके। इस मौके पर चैंबर के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट शाम लाल लंगर, सेक्रेटरी दीपक अग्रवाल और ट्रेजरर भारत भूषण गुप्त भी उपस्थित थे।
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चैंबर भवन में आयोजित बैठक में व्यापारियों ने तलख तेवर दिखाते हुए कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो वे कड़ा संघर्ष करने को मजबूर होंगे। चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रेसीडेंट वाईवी शर्मा ने कहा कि प्री बजट मीटिंग में उद्यमियोें और व्यापारियोें द्वारा दिए गए कुछ सुझावों पर वित्त मंत्री ने विचार किया, लेकिन कई ऐसे सुझाव हैं, जिस पर सरकार की ओर से ध्यान नहीं दिया गया।
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शर्मा ने कहा कि देसी घी, ड्राई फ्रूट, जूते और सर्फ ऐेसी आइटम हैं, जिस पर पड़ोसी राज्य पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा के अलावा दिल्ली से भी ज्यादा वैट रियासत में लगाया गया है। देसी घी पर पंजाब में पांच फीसदी वैट है, जबकि जम्मू-कश्मीर में 13 फीसदी है।
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लोग रियासत में देसी घी खरीदने की बजाय पंजाब से लाने लगे हैं। इसके अलावा ब्रांडेड साबुन, ड्राई फ्रूट और जूतों पर 13.5 फीसदी वैट लगाया गया है। खास बात यह है कि इससे राज्य का राजस्व बढ़ने की बजाय घटेगा। इतना ही नहीं, लोग लखनपुर से टैक्स चोरी कर माल लाएंगे और रियासत के व्यापारियों का कारोबार ठप हो जाएगा। उन्होेंने कहा कि यदि प्रतिस्पर्धा के दौर में रियासत के व्यापारियोें का अस्तित्व बचाना है तो पड़ोसी राज्यों के मुकाबले ही वैट तय करना होगा।
चैंबर प्रेसीडेंट ने कहा कि बजट के बाद भी उन्होेंने वित्तीय विभाग के अफसरोें से संपर्क कर पोस्ट बजट मीटिंग करवाने का प्रयास किया था लेकिन अभी तक विभाग से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होेंने व्यापारियोें को आश्वासन दिया कि वे पोस्ट बजट मीटिंग के लिए एक बार फिर प्रयास करेंगे, ताकि वैट की भिन्नता को लेकर होने वाली समस्या को दूर किया जा सके। इस मौके पर चैंबर के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट शाम लाल लंगर, सेक्रेटरी दीपक अग्रवाल और ट्रेजरर भारत भूषण गुप्त भी उपस्थित थे।