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मुलाजिमों को रास नहीं आया बजट

Thu, 07 Mar 2013 05:32 AM IST
Jammu
Jammu Updated Thu, 07 Mar 2013 05:32 AM IST
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जम्मू। सरकारी मुलाजिमों ने रियासत की गठबंधन सरकार के वर्ष 2013-14 के बजट को रूटीन बजट की संज्ञा दी है। उनका कहना है कि कर्मचारियों के लिए बजट में कोई खास प्रावधान नहीं किया गया है और जिन मांगों को पूरा करने के लिए समय-समय पर समझौते हुए उन्हें भी पूरा नहीं किया गया है।
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जम्मू कश्मीर नेशनल ट्रेड यूनियन फ्रंट के प्रधान एवं जेसीसी की कोर कमेटी के सदस्य मोहम्मद गफूर डार का कहना है कि बजट में मुलाजिमों के लिए कुछ खास नहीं है। न तो डेलीवेजर, कैजुअल वर्कर्स को नियमित करने का कोई प्रावधान है और न ही सरकारी मुलाजिमों को आसमान छूती महंगाई में कोई खास रियायत दी गई है। कर्मचारियों के लिए बस रूटीन बजट है। डेलीवेजरों की दैनिक दिहाड़ी को 125 से 150 रुपये किया गया है और मुलाजिमों की डीए किश्तों के लिए राशि का प्रावधान करना रूटीन की कवायद है। डेलीवेजरों की दैनिक दिहाड़ी को मौजूदा महंगाई के हिसाब से बढ़ाया जाना चाहिए था।
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इंप्लाइज ज्वाइंट एक्शन कमेटी (आर) के प्रधान राम कुमार शर्मा का कहना है कि वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर का बजट रूटीन बजट ही है। अस्थायी मुलाजिमों को न तो रोजगार सुरक्षा और न ही अन्य कोई खास रियासत दी गई है। डेलीवेजरों को बंधुआ मजदूर की तरह काम में लाया जा रहा है। 125 से दिहाड़ी बढ़ाकर 150 किया जाना काफी नहीं है। स्टेट गवर्नमेंट इंप्लाइज ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सीनियर नेता सुभाष वर्मा का कहना है कि न्यूनतम दिहाड़ी भी डेलीवेजर और कैजुअल वर्कर्स को नहीं दी जा रही। बजट से काफी आशाएं थीं लेकिन 125 से दिहाड़ी बढ़ाकर 150 रुपये करना बेहद कम है। बाजार में श्रमिक 250 रुपये दिहाड़ी ले रहे हैं। कम से कम इतनी दिहाड़ी का प्रावधान तो किया जाना चाहिए था। सरकारी मुलाजिमों की ज्वलंत मांगों खासतौर से जिस पर सरकार ने सहमति जताई हुई है, उनके लिए भी कोई बजट प्रावधान नहीं है। मुलाजिमों को बजट से मायूसी ही हुई है।
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