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कालेज पर 22 लाख का हर्जाना

Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
Jammu
Jammu Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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जम्मू। जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने इंस्टीट्यूट आफ डेंटल कालेज सियोड़ा के 88 छात्रों के भविष्य पर गौर करते हुए जम्मू विश्वविद्यालय को सभी छात्रों का रजिस्ट्रेशन करने और उन्हें डिग्री प्रदान करने के आदेश दिए। हाईकोर्ट ने छात्रों को राहत देने के अलावा कालेज प्रबंधन को 14 लाख रुपये और प्रत्येक छात्र को दस दस हजार रुपये हर्जाना भी ठोका। हर्जाना की रकम को स्टेट लीगल सर्विस अथारिटी और समाज कल्याण के लिए खर्च करने के भी हाईकोर्ट ने आदेश दिए।
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न्यायाधीश हसनैन मसूदी ने वर्ष 2006 सत्र के 88 छात्रों को राहत देते हुए पाया कि जो बीडीएस का कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं। उनकी डिग्री जारी करने और प्रति छात्र दस हजार रुपये हर्जाना रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल हाईकोर्ट में जमा करने के आदेश दिए। आदेश के अनुसार इंस्टीट्यूट अपने मैनेजमेंट कोटा से वर्ष 2013 और 2014 में प्रत्येक वर्ष 14 सीटें सरेंडर करेगा। इन सीटों को वर्ष 2013 और 2014 में बोर्ड आफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन द्वारा कामन एंट्रेेंस टेस्ट लिए जाए। उन टेस्ट में मेरिट आने वाले छात्रों को 28 सीटें अलाट की जाएं। दूसरे शब्दों में इंस्टीट्यूट का मैनेजमेंट कोटा इन दो वर्षों में कम होकर 46 सीटों का ही रहेगा। इंस्टीट्यूट का प्रबंधन इन 28 छात्रों से हासिल की जाने वाली फीस में से 50 हजार रुपये प्रति छात्र के हिसाब से हर्जाना भरेगा। इससे जमा होने वाली कुल राशि जम्मू कश्मीर लीगल सर्विस अथारिटी को जमा कराई जाएगी। अथारिटी इस जमा राशि से अनुसूचित जाति एवं जनजाति व पिछड़ी जाति के लिए लीगल लीटरेसी प्रोग्राम कराकर समाज के इस वर्ग को जागरूक करेगी। इस राशि को स्टेट लीगल सर्विस अथारिटी के कार्यकारी चेयरमैन खर्च के लिए अनुमति देंगे। दस हजार रुपये प्रति छात्र की दर से जमा होने वाली राशि को सोशल वेलफेयर विभाग द्वारा चलाए जा रहे ब्लाइंड स्कूल फार ब्वायज जम्मू, नेशनल फेडरेशन आफ ब्लाइंड द्वारा चलाए जा रहे ब्लाइंड स्कूल फार गर्ल्ज जम्मू और अनाथ स्कूल वेद मंदिर को दी जाए। यह स्कूल इस राशि को मूल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए खर्च करेंगी। जैसे ही इंस्टीट्यूट 14 लाख और प्रति छात्र दस हजार रुपये रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल हाई कोर्ट के पास जमा करा देते हैं। लीगल सर्विस कमेटी के सचिव और रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल तुरंत रजिस्ट्रार जम्मू विश्वविद्यालय को इसकी सूचना देंगे। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सभी 88 छात्रों का रजिस्ट्रेशन करके डिग्री जारी करेगा।
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इस मामले का विवाद तब शुरू हुआ जब भारत सरकार ने डेंटल काउंसिल आफ इंडिया की प्रस्ताव पर 22 सितंबर 2006 को त्रिकुटा चेरीटेबल ट्रस्ट को जम्मू में इंस्टीच्यूट आफ डेंटल कालेज सयोड़ा के नाम से कालेज खोलने का अनुमति पत्र लिखा। प्रत्येक वर्ष बीडीएस कोर्स के लिए सौ सीटों का कोटा दिया गया। इस पत्र में एक शर्त रखी गई डेंटल सर्जरी कोर्स (बीडीएस) में एडमीशन तभी हो सकती है जब केंद्र सरकार से जारी औपचारिक अनुमति पत्र मिलेगा। कालेज परफारमेंस बैंक गारंटी व अन्य शर्तों को पूरा करने और वादा करने की एवज में एडमीशन प्रक्रिया में आगे बढ़ सकता है। ट्रस्ट ने इन सभी शर्तों को 26 सितंबर 2006 को पूरा कर लिया। इस पर सरकार ने 28 सितंबर 2006 को ट्रस्ट को एडमीशन करने की अनुमति दे दी। इस एडमीशन को एक साल के लिए वैध माना गया। ट्रस्ट को केवल 2006-2007 के सत्र के लिए सौ छात्रों को प्रवेश करने की अनुमति थी। एडमिशन प्रक्रिया को 30 सितंबरर तक पुरा करना था। ट्रस्ट को बताया गया। जेएनएफ
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