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अस्थमा के मरीजों पर आफत आएगी
Jammu
Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
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जम्मू। दीवाली के नजदीक आते ही आतिशबाजी होना लाजमी है, लेकिन हवा में बढ़ता प्रदूषण शहरवासियों की सेहत ढीली करेगा। इस प्रदूषण से खासकर बच्चों और बुजुर्गों के साथ सांस संबंधी रोगियों की दिक्कतें बढ़ेंगी। अस्थमा से पीड़ित मरीजों को अपनी सेहत पर खास ध्यान देने की जरूरत है। डाक्टरों के अनुसार दीवाली पर होने वाली आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण का असर कई दिनों तक रहेगा। इसके अलावा बारिश न होने से हवा में कई तरह के वायरल रोग पनप रहे हैं। सीडी अस्पताल के अधीक्षक एवं छाती विशेषज्ञ डा. रविंद्र रतन पाल के अनुसार दीवाली पर प्रदूषण बढ़ने की समस्याएं होती हैं, लेकिन पहले से भी प्रदूषण की मार झेल रहे शहर में आतिशबाजी के बाद वातावरण में कई तरह के केमिकल पहुंचकर सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। पटाखों से कार्बन डायआक्साइड, फासफोरस, कार्बन मोनोआक्साइड सहित अन्य केमिकल हवा में मिलकर सांस संबंधी रोगों का कारण बनते हैं। इसमें ब्रोंकाइटिस (खांसी), एलर्जी रिनटिक (नाक संबंधी एलर्जी), क्रानिक अबस्ट्रटिव (हवा संबंधी रोग) का ज्यादा जोर रहेगा। प्रदूषण से अस्थमा से पीड़ित ज्यादा प्रभावित होंगे। ऐसे रोगियों के फेफड़ों में पहले से ही आक्सीजन की कमी रहती है, जिस पर ऐसे केमिकल भीतर जाकर ज्यादा परेशान करते हैं। ऐसे वातावरण में पीड़ित को अस्थमा का अटैक होने की आशंका ज्यादा रहती है। एक साथ भारी आतिशबाजी से कई दिनों तक हवा में इसका असर रहता है। बारिश न होने पर हालात ज्यादा खराब रहते हैं। वहीं, गांधीनगर अस्पताल के अधीक्षक डा. रोमेश गुप्ता का कहना है कि आतिशबाजी के बाद कई हानिकारक केमिकल हवा में रहकर लोगों की सेहत खराब करते हैं। वारयल रोगों से बचने के लिए तापमान के हिसाब से कपड़े पहने, ठंडे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
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