फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Crime ›   the story of Sufferable girls from captivity of Boko Haram

बोको हराम की कैद से छूटी लड़कियों की आपबीती पढ़कर आपकी रूह कांप जाएगी

Fri, 23 Mar 2018 03:47 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Fri, 23 Mar 2018 03:47 PM IST
विज्ञापन
the story of Sufferable girls from captivity of Boko Haram
बोकोहरम की कैद में लड़कियां

नाइजीरिया में बोको हराम के लड़ाकों ने बुधवार की तड़के सुबह दापची शहर में महीने भर पहले अगवा की गई लड़कियों में से अधिकांश को छोड़ दिया। नाइजीरिया की सरकार का कहना है कि अगवा किए 105 लड़कियों के साथ एक लड़के को भी छोड़ गया है। इनमें से 104 लड़कियां स्कूल जाती हैं। सरकार ने इस बात का खंडन किया है कि लड़कियों के बदले किसी तरह की फिरौती दी गई है।

विज्ञापन


लड़कियों के आजाद होने की खबर से शहर में खुशी का माहौल है। बोको हराम की क़ैद में अब एक ही लड़की बची है। वो लड़की ईसाई है। उस लड़की के माता-पिता ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि बोको हराम लड़की पर इस्लाम अपनाने का दवाब डाल रहा है लेकिन लड़की इससे इनकार कर रही है। क़ैद से छूटने के बाद लड़कियों ने अपनी आपबीती अपने परिवारों के साथ साझा की।
विज्ञापन


लड़कियों को कैसे अगवा किया गया?

फरवरी की 19 तारीख, दिन सोमवार, कथित इस्लामी चरमपंथी समूह बोको हराम के लड़ाकों ने शहर पर धावा बोला। वो हवा में गोलियां चलाते हुए लड़कियों के बोर्डिंग स्कूल की तरफ बढ़ते हैं। कैद से छूटने के बाद 13 साल की फातिमा अव्वल ने बीबीसी को बताया कि हमलवरों ने चप्पलें और सैंडल पहने हुए थे। वो कहती हैं कि उन लोगों ने लंबी दाढ़ी रखी हुई थी और उनके सिर पर पगड़ियां बंधी हुई थीं। फातिमा अगवा नहीं की जा सकी थीं लेकिन उनकी बेस्ट फ्रेंड को अग़वा कर लिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


कैद से आज़ाद हुई नूर बताती हैं कि जब वो लड़ाके आए थे तब उन्होंने जोरदार धमाके की आवाज सुनी थी। वो कहती हैं, "हमें लगा था कि बिजली का ट्रांसफॉर्मर जल गया है। वे लोग स्कूल के मेन गेट से अंदर घुसे और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ रहे थे।" "उन्होंने हमें कपड़ों से ढका और अपनी गाड़ियों की तरफ खींचने लगे। पांच लड़कियों की उस वक्त मौत हो गई थी।"

कैद से छूटी यागना ने बीबीसी को बताया, "कई लड़कियां और शिक्षक पेड़ों के पीछे छिपने के लिए भागने लगे। बोको हराम के लड़ाकों ने उन्हें धमकी दी कि अगर वो हिले तो उनकी जान ले ली जाएगी। जिसके बाद उन्होंने दौड़ना बंद कर दिया।" वो कहती हैं, "हमें कुछ समझ नहीं आ रहा था। उन्होंने हमें ट्रक में बैठने को कहा और हमलोगों ने ऐसा ही किया। इसके बाद वो हमें ले कर चले गए।"

अगवा करने के बाद का सफर

लाराई नाम की लड़की ने नाइजीरिया के अखबार 'द प्रीमियम टाइम्स' को बताया कि दापची से बाहर निकलने के बाद उन्हें खाना खिलाया गया था। लाराई ने बताया, "उन्होंने पूछा कि हमलोगों में से कौन-कौन उपवास पर हैं। जो उपवास पर थे उन्हें गाड़ी से उतरने के लिए कहा। फिर उन्हें खाने के लिए मांस, मूंगफली की पट्टी और पानी दिया गया। खाना खाने के बाद हमलोगों ने नमाज पढ़ी।" वो कहती हैं कि इसके बाद उन्होंने कार से आगे का सफर किया है। बस एक 'बड़े से पेड़ के पास' एक ही जगह पर रुके थे। वो आगे बताती हैं, पेड़ के पास पहुंच कर उन्होंने हमें खाना बनाने के लिए कहा। अंधेरा हो गया था इसीलिए उन्होंने लाइटें जला दी थीं।"

नूर ने बीबीसी को बताया, "हमने वहां एक रात बिताई। उन्होंने हमें खाना पकाने के लिए कहा। हमने उनसे कहा कि हमें छोड़ दें। उन्होंने ऐसा करने का वादा किया और फिर हमें दूसरे स्थान पर ले जाया गया।" लाराई ने अखबार 'द प्रीमियम टाइम्स' को बताया, "खाना खाने के बाद हम लंबे समय तक यात्रा करते रहे। आखिर में हम एक ऐसी जगह पहुंचे जहां नदी थी। उन्होंने हमें ट्रकों से उतरने के लिए कहा जिसके बाद हम नदी पार करने के लिए छोटी-छोटी नावों पर सवार हुएं।"

लाराई बताती हैं कि उन्हें जंगल में ले जाया गया था, जहां पर उन्हें रखा गया था। "नदी के पार, वो हमें एक गांव के एक घर में ले गए। मुझे नहीं पता वो कौन सा गांव था। हम कुछ समय तक वहां रहें। अगले दिन उन्होंने हमें बाहर आने के लिए कहा फिर नदी का रास्ते हमें कहीं और ले जाया गया। हम जंगल के एक ऐसे इलाके में पहुंचे जो काफी घना था। तब से हमें वहीं रखा गया था।"यात्रा के दौरान चार या पांच लड़कियों की मौत हो गई।

लाराई ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "करीब पांच लड़कियां मर गईं। ऐसा नहीं कि उन्होंने उन्हें मारा, लेकिन थकाने वाले सफर और तनाव के कारण वो कमजोर हो गई थीं और मर गईं।" तलाऊ ने रॉयटर्स को बताया कि उसकी "दो सहेलियों की मौत हो गई थी। सफर के दौरान वो गिर गई थीं और उनके ऊपर से लोग गुजर गए।" वो बताती हैं, "जहां हमें रखा गया था जो एक बड़ी जगह थी और चारों ओर से ढकी हुई थी। किसी को भी हम नहीं दिख सकते थे। आसमान भी देखना असंभव था।" नूर बताती हैं, "उन्होंने हमारे साथ कुछ भी नहीं किया था। उन्होंने हमें बस वहां रखा था। हमें वक्त पर खाना और पानी देते थे।"

कैद से छोड़ा जाना 

लड़कियों के अभिभावकों ने बताया कि 21 मार्च को 9 गाड़ियों में भर कर लड़कियों को दापची लाया गया था। लड़कियों की आपबीती मानें तो उसके लिए उनका सफर कम से कम चार-पांच दिन पहले शुरु हुआ होगा। समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार एक लड़की ने बताया कि उन्हें चाड झील पर मौजूद टापूओं में से किसी पर रखा गया होगा। इन टापुओं को इस्लामिक स्टेट समर्थन प्राप्त अबु मुसाब अल-बरनावी के नेतृत्व में बोको हराम के समूह के लड़ाकों का गढ़ माना जाता है।

लादी ने एएफपी को बताया कि, "उन्होंने 17 मार्च को हमें तैयार होने के लिए और नाव पर चढ़ने के लिए कहा। हम नाव में तीन दिन तक रहें, जिसके बाद ही हमने जमीन पर कदम रखा। उन्होंने हमें गाड़ियों में भरा और बताया कि वो हमें हमारे घर छोड़ने जा रहे हैं।" एक लड़की के पिता ने रॉयटर्स को बताया कि सेना के रंग से रंगी कुछ गाड़ियां हमारी लड़कियों को ले कर आई थीं। उन्होंने कहा, "उन लड़ाकों ने हमसे कहा कि हम यहां से भागें नहीं। उन्होंने शहर के बीचोंबीच अली की चाय की दुकान के सामने लड़कियों को उतारा और चले गए।"

एक लड़की के पिता ने बीबीसी को बताया कि उनकी बेटी ने उन्हें बताया था कि वो घर लौटने के लिए 18 तारीख से सफर कर रही हैं। वो कहते हैं, "उसने बहुत कुछ भुगता है। ईश्वर की कृपा है कि अब वो आजाद है।"


एक लड़की के पिता ने बीबीसी को बताया, "बोको हराम ने हमारी लड़कियों को छोड़ दिया। उन्होंने हमसे कहा कि हम इन्हें आजाद कर रहे हैं लेकिन इन्हें पश्चिमी शिक्षा के लिए स्कूलों में भर्ती मत कराना, नहीं तो हम फिर से इन्हें अगवा कर लेंगे।" कुछ अभिभावकों ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि वो लोग उनके पास आए, उनसे हाथ मिलाया और जाने से पहले उनके साथ तस्वीरें भी लीं। कैद से छोड़े जाने के कुछ घंटों बाद ही इन लड़कियों को राजधानी अबूजा ले जाया गया जहां उन्होंने राष्ट्रपति महमदू बुहारी से मुलाकात की।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed