Zika Virus: पुणे में जून से अब तक जीका वायरस के 66 मामले सामने आए, 26 गर्भवती महिलाएं भी शामिल; चार की मौत
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि पुणे में जून से अब तक जीका वायरस के 66 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 26 गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं।
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महाराष्ट्र के पुणे में जून से जीका वायरस के 66 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि इस दौरान वायरस से संक्रमित चार मरीजों की मौत हो गई, हालांकि जिन मरीजों की मौत हुई उन्हें पहले से ही स्वास्थ्य समस्याएं थीं और उनकी उम्र 68 से 78 साल के बीच थी। पुणे नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि देश में जीका वायरस से सीधे तौर पर कोई मौत नहीं हुई है।
अधिकारियों ने बताया कि पुणे में जीका का पहला मामला 20 जून को सामने आया था, जब 46 साल के एक डॉक्टर का टेस्ट का परिणाम पॉजिटिव आया था। इसके बाद डॉक्टर की 15 साल की बेटी भी संक्रमित पाई गई थी।
26 गर्भवती महिलाएं भी शामिल
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, "संक्रमित लोगों में 26 गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं, जिन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। उनमें से अधिकतर महिलाएं स्वस्थ्य हैं।"
गर्भावस्था के दौरान जीका वायरस संक्रमण माइक्रोसेफली का कारण बन सकता है। माइक्रोसेफली एक ऐसी स्थिति है जहां मस्तिष्क के असामान्य विकास के कारण बच्चे का सिर काफी छोटा हो जाता है। यह वायरस संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है, जो डेंगू और चिकनगुनिया भी फैलाता है।
पीएमसी स्वास्थ्य विभाग मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए निगरानी और धूम्रीकरण सहित प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए उपाय कर रहा है।
जीका वायरस का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जीका वायरस मच्छरों के काटने से होने वाली संक्रामक बीमारी है। जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, उनमें इसका खतरा अधिक हो सकता है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोग संक्रमण का ठीक तरीके से मुकाबला नहीं कर पाते हैं। चूंकि उम्र बढ़ने के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है इसलिए उम्रदराज लोगों में इस संक्रामक रोग का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। इसके अलावा गर्भवती और बच्चों में इस संक्रमण के कारण गंभीर रोग विकसित होने का खतरा हो सकता है।
जीका संक्रमण में क्या होते हैं लक्षण?
जीका के कारण होने वाली जटिलताओं को कम करने के लिए समय रहते इसके लक्षणों की पहचान करना जरूरी है। वैसे तो जीका से संक्रमित कई लोगों में शुरुआत में लक्षण नहीं दिखाई देते हैं, जिससे संक्रमण की पहचान करना भी कठिन हो जाता है। हालांकि संक्रमण के सबसे आम लक्षण बुखार, त्वचा पर दाने, सिरदर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द और आंखें लाल होना है। इन संकेतों पर ध्यान देते रहना बहुत आवश्यक है।
गर्भावस्था के दौरान जीका वायरस संक्रमण बच्चों में मस्तिष्क या आंख से संबंधित जन्मजात दोष पैदा कर सकता है। इसमें बच्चों के सिर का आकार छोटा होना (माइक्रोसेफली) सबसे आम है। इसके अलावा बच्चों के मस्तिष्क के विकास की समस्याएं, खाने की समस्याएं जैसे निगलने में कठिनाई, सुनने-देखने की समस्या होना, जोड़ों की गति में कमी और मांसपेशियों में अकड़न जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।