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दो रुपये में चैलेंज किया जा सकता है आपका वोट, समझिए कैसे?

Mon, 15 Apr 2019 11:43 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Mon, 15 Apr 2019 11:43 AM IST
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Your vote can be challenged in two rupees, understand how?
मतदान (सांकेतिक) - फोटो : पीटीआई

वोट डालना हर नागरिक का अधिकार है, और इसे हम सभी को अवश्य इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि किसी भी वोट को दो रुपये के खर्च पर चैलेंज भी किया जा सकता है। वोट डालने से ठीक पहले होने वाले इस चैलेंज को ‘चैलेंज्ड वोट’ कहा जाता है। हालांकि किसी भी सामान्य वोटर को इस परिस्थिति से संकोच करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह प्रक्रिया फर्जी मतदान रोकने के लिए अपनाई जाती है। जानिए चैलेंज्ड और विभिन्न प्रकार के वोटों के बारे में...

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एएसडी लिस्ट 
अनुपस्थित, स्थानांतरित व मृत घोषित वोटर्स की पहचान के लिए एएसडी सूची बनती है, ताकि फर्जी मतदान रुके। गलती से वास्तविक वोटर का नाम इस सूची में आ जाए, तो वह फॉर्म 17ए भरकर वोट डाल सकता है।
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टेस्ट वोट: वीवीपैट स्लिप नहीं मिले तो

अगर मतदाता यह पाए कि उसने जिस व्यक्ति को वोट करने के लिए ईवीएम का बटन दबाया और वीवीपैट स्लिप किसी और व्यक्ति को वोट जाने की सूचना दे रही है तो निर्वाचन प्रकिया नियमावली 1961 के तहत यह प्रक्रिया अपना सकता है। मतदाता लिखित में इस गड़बड़ी की घोषणा कर उस पर हस्ताक्षर करेगा।
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-पीठासीन अधिकारी फॉर्म 17-ए में यह जानकारी दर्ज करेगा।
-इसके बाद उसी ईवीएम पर ‘टेस्ट वोट’ डाला जाएगा, इस दौरान पीठासीन अधिकारी और पोलिंग एजेंट्स भी मौजूद रहेंगे, वे पेपर स्लिप की जांच करेंगे।
-अगर मतदाता का आरोप सही निकलता है तो यहां चुनाव तत्काल रोककर रिटर्निंग ऑफिसर को सूचित किया जाएगा।
-अगर मतदाता का आरोप गलत निकलता है, तो फॉर्म 17-ए में इस प्रकरण और टेस्ट वोट की सूचना दर्ज कर उसमें मतदाता के हस्ताक्षर लिए जाएंगे।


चैलेंज्ड वोट
मतदान करने जा रहे किसी मतदाता पर अगर किसी पोलिंग एजेंट को शक है, तो वह मतदाता की पहचान को चुनौती दे सकता है। इसके लिए उसे पीठासीन अधिकारी को दो रुपये फीस देनी होती है। पीठासीन अधिकारी इस चैलेंज की जांच करते हैं और मतदाता के सही होने पर उसे वोट देने दिया जाता है। वहीं, जो व्यक्ति फर्जी मतदान करने आते हैं उन्हें वोटिंग से रोककर, लिखित शिकायत के साथ पुलिस को सौंप दिया जाता है।


रिफ्यूज्ड टू वोट...
कुछ ऐसे मतदाता होते हैं, जो अपनी-अपनी वजहों से कंट्रोल यूनिट का बटन दबने के बाद भी वोट ही नहीं डालना चाहते। ऐसे में वोटर रजिस्टर में पीठासीन अधिकारी को उनके नाम के आगे ‘रिफ्यूज्ड टू वोट’ लिखना होता है और फिर यूनिट का बटन दबाना होता है, ताकि उनके बाद के वोटर की बारी आ सके। ऐसे वोटरों की जानकारी 17सी रजिस्टर में दर्ज की जाती है। विशेष प्रकार के वोट में नोटा भी शामिल हैं। किसी भी प्रत्याशी को उपयुक्त नहीं मानने वाले मतदाता ‘नन ऑफ द अबव’ यानी नोटा का बटन दबा सकते हैं। 

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