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#नोटबंदी 18वां दिन: वेतन देने के लिए ऐसे जुगाड़ लगा रहीं कंपनियां

Sat, 26 Nov 2016 06:56 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 26 Nov 2016 06:56 PM IST
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your salary structure may be change this month due to demonetisation
- फोटो : अमर उजाला

नोटबंदी के बाद दिसंबर में पहली सैलरी आने वाली है। लेकिन नोटबंदी के बाद कई सेक्‍टर्स में काम कर रहे कर्मचारियों को सैलरी मिलने में परेशानी हो सकती है। हालांकि आरबीआई से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सैलरी का समय पास आने के सा‌थ ही आरबीआई ने तैयारी कर ली है।

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गौरतलब है कि हर माह के पहले हफ्ते एटीएम में दोगुना भीड़ होती है,नोटबंदी के कारण पहले से ही लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं ऐसे में अगले हफ्ते भीड़ बढ़ना तय है। जानकारों की माने तो सबसे अधिक परेशानी एसएमई कैटेगिरी की कंपनियों के साथ-साथ अनऑर्गेनाइज्‍ड सेक्‍टर में काम कर रहे कर्मचारियों को आ सकती है।
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बड़ी-बड़ी कंपनियों में भी सैलरी के एक पार्ट को लेकर दिक्‍कत हो सकती है। इस वजह से सभी कंपनियां सैलरी के तरीके में बदलाव करने की रणनीति में जुटी हैं। कंपनी मैनेजमेंट में इन दिनों इस पर विचार विमर्श चल रहा है।  

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नोटबंदी का हर तबके की सैलरी पर पड़ेगा असर 

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मजदूर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

गौरतलब है कि कई बड़ी कंपनियां में सैलरी का एक कैश पार्ट होता है। ऐसा पार्ट, जिसका भुगतान कैश में किया जाता है और कंपनी बाउचर पेमेंट दिखाती है। कई कर्मचारी या अधिकारी कैश पेमेंट लेने में इसलिए तैयार हो जाते हैं, क्‍यों‍कि इससे वे अपना इनकम टैक्‍स बचा लेते हैं।

अब जब सरकार ने 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए हैं और कैश इतना आसानी से मिल नहीं पा रहा है तो ऐसे में कंपनियां भुगतान के नए तरीके पर विचार करने पर विवश हो गयीं हैं। जानकार बता रहे हैं कि अकाउंट में जो रकम भेजी जाती थी वो तो वैसे ही जाएगी पर कैश पार्ट का भुगतान कंपनियां आगे एडजस्ट करने पर विचार कर रही हैं।

वहीं छोटी कंपनियों में दिहाड़ी कामगारों की संख्या बहुत अधिक होती है ऐसे में कैश संकट के चलते सबसे ज्यादा दिक्कत ऐसी ही छोटी कंपनियों में आने वाली है। ये कंपनियां सैलरी का भुगतान अकाउंट के बजाय कैश में रोज कर देती हैं। अब कैश संकट के कारण इनके सामने सैलरी की समस्या उत्पन्न हो गयी है। ऐसे में वो कामगारों को उनके बैंक अकाउंट में सैलरी ट्रांसफर करने का मन बना रहे हैं। साथ ही जिन कामगारों का अकाउंट नहीं है कंपनियां वो खुलवा रही हैं।

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