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योगी सरकार का मानवीय चेहरा: विवेकाधीन कोष से जरूरतमंदों तक पहुंची लगभग 860 करोड़ की आर्थिक सहायता

Sun, 05 Apr 2026 10:14 PM IST
Rahul Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ। Published by: Rahul Kumar Updated Sun, 05 Apr 2026 10:14 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष राज्य के जरूरतमंदों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभरा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस कोष के माध्यम से लगभग 860 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई, जिसका लाभ 50 हजार से अधिक लोगों को मिला।

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Yogi govt provided financial assistance of approximately ₹860 crore to needy through its discretionary fund
सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में संवेदनशील और जवाबदेह शासन का एक मजबूत उदाहरण सामने आया है, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों के लिए एक बड़े सहारे के रूप में स्थापित हुआ है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस कोष के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2025-26 (अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक) में लगभग 860 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है, जो विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधियों के जरिए 50 हजार से अधिक लाभार्थियों तक पहुंची है। यह आंकड़ा न केवल सहायता के व्यापक दायरे को दर्शाता है, बल्कि सरकार के मानवीय पक्ष और उसकी प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट करता है।
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हर वर्ग तक पहुंच, बिना किसी भेदभाव के
इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि सहायता वितरण में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया। चाहे सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधि हों या विपक्ष के, शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग हो या आकस्मिक संकट से जूझ रहा परिवार, हर जरूरतमंद तक समान संवेदनशीलता के साथ मदद पहुंचाई गई। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण के साथ अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाना है।
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हर जरूरत का समाधान
विवेकाधीन कोष के अंतर्गत ₹50,000 जैसी छोटी सहायता से लेकर कई मामलों में ₹3 करोड़ से अधिक की बड़ी स्वीकृतियां प्रदान की गईं हैं। यह दिखाता है कि सरकार ने हर स्तर की जरूरत को प्राथमिकता दी है, चाहे वह व्यक्तिगत चिकित्सा सहायता हो, आकस्मिक दुर्घटना हो या अन्य आपात स्थिति। विगत वित्तीय वर्ष में अयोध्या, अमेठी, बाराबंकी, आजमगढ़, बलिया और फिरोजाबाद जैसे जनपदों कुछ बड़े केस के कारण सर्वाधिक धनराशि स्वीकृत की गई। वहीं पार्टी की बात करें तो सत्तारूढ़ भाजपा का साथ साथ समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य दलों के जनप्रतिनिधियों ने भी समान रूप से इस योजना के तहत जरूरतमंदों की मदद करने में सरकार का सहयोग किया। 
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जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मजबूत कनेक्ट
इस योजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि सहायता वितरण पूरी तरह निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी स्तर पर राजनीतिक भेदभाव की गुंजाइश न रहे। सभी दलों के जनप्रतिनिधियों, चाहे वे सत्तापक्ष से हों या विपक्ष से, उनके अनुरोधों पर समान गंभीरता और तत्परता से कार्रवाई की गई। विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी इस बात का मजबूत प्रमाण है कि सरकार ने स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों को न केवल महत्व दिया, बल्कि उन्हें विश्वास और जिम्मेदारी के साथ जोड़ा। 

जहां जरूरत, वहां सहायता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विवेकाधीन कोष का संचालन एक बेहद व्यावहारिक और मानवीय सिद्धांत पर आधारित रहा है, “जहां जरूरत, वहां सहायता”। इस व्यवस्था में किसी प्रकार का पूर्व निर्धारित कोटा या सीमित आवंटन प्रणाली लागू नहीं की गई, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि सहायता का वितरण केवल औपचारिकताओं तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक जरूरत के अनुरूप हो। जहां जिस स्तर की आवश्यकता सामने आई, वहां उसी अनुपात में धनराशि स्वीकृत की गई। इस नीति का सबसे बड़ा लाभ यह रहा कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों, आकस्मिक दुर्घटनाओं या आपदा जैसी परिस्थितियों से प्रभावित परिवारों को न केवल समय पर, बल्कि पर्याप्त आर्थिक सहायता मिल सकी। इससे कई मामलों में इलाज में देरी नहीं हुई और परिवारों को आर्थिक संकट से उबरने में वास्तविक मदद मिली।

त्वरित स्वीकृति से मिली राहत
सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को केवल संवेदनशील ही नहीं, बल्कि तेज और प्रभावी भी बनाया है। आवेदन प्राप्त होने से लेकर उसकी स्वीकृति तक की प्रक्रिया को सरल और त्वरित रखा गया, जिससे जरूरतमंदों को लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सामना नहीं करना पड़ा। इस तेज निर्णय प्रणाली के कारण हजारों मरीजों और संकटग्रस्त परिवारों को समय रहते सहायता मिल पाई। विशेष रूप से चिकित्सा सहायता के मामलों में यह व्यवस्था कई बार जीवनरक्षक साबित हुई, क्योंकि समय पर मिली आर्थिक मदद ने इलाज को संभव बनाया और गंभीर परिस्थितियों में लोगों को राहत पहुंचाई।


सरकार का मानवीय चेहरा
विवेकाधीन कोष के जरिए सरकार ने यह साबित किया है कि संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता के साथ जरूरतमंदों तक सीधे राहत पहुंचाई जा सकती है। गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्ग के लिए यह कोष आज एक प्रभावी तत्काल राहत तंत्र के रूप में स्थापित हो चुका है, जिसने हजारों परिवारों को कठिन परिस्थितियों में सहारा दिया है। चाहे गंभीर बीमारी हो, आकस्मिक संकट हो या आर्थिक विपदा, इस व्यवस्था ने समय पर मदद पहुंचाकर न सिर्फ आर्थिक बोझ कम किया, बल्कि लोगों में सरकार के प्रति भरोसा भी मजबूत किया है।

विवेकाधीन कोष से ऐसे पा सकते हैं सहायता (आसान भाषा में):

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह एक खास फंड है, जिससे जरूरतमंद लोगों को तुरंत आर्थिक मदद दी जाती है।
  • इसमें मदद किसे और कितनी मिलेगी, यह पूरी तरह जरूरत और परिस्थिति देखकर तय किया जाता है।
  • इसका मकसद उन लोगों की मदद करना है, जिन्हें समय पर सरकारी योजनाओं से सहायता नहीं मिल पाती।
  • किन लोगों को मिलती है मदद:
    • गंभीर बीमारी (जैसे कैंसर, हार्ट सर्जरी, किडनी आदि) से जूझ रहे मरीज
    • आर्थिक रूप से कमजोर परिवार
    • दुर्घटना या किसी आकस्मिक संकट के शिकार लोग
    • कुछ मामलों में शिक्षा या विशेष जरूरत वाले लोग
  • आवेदन कैसे करें:
    • अपने क्षेत्र के विधायक (MLA) या सांसद (MP) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं
    • या सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रार्थना पत्र दे सकते हैं
  • आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज:
    • मेडिकल रिपोर्ट (अगर बीमारी का मामला है)
    • आय प्रमाण पत्र
    • इलाज या खर्च का अनुमान
    • अन्य संबंधित कागजात
  • आवेदन की जांच के बाद जरूरत के अनुसार सहायता राशि मंजूर की जाती है।
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