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सर्वसम्मति से शी जिनपिंग दोबारा बने चीन के राष्ट्रपति, उनके करीबी वांग बने उपराष्ट्रपति
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 17 Mar 2018 12:39 PM IST
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शी जिनपिंग
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चीन में शी जिनपिंग दोबारा राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं वहीं उनके करीबी वांग को उप राष्ट्रति चुना गया हैं। नेशनल कांग्रेस पीपल्स ने 2,970 वोटों के साथ सर्वसम्मति से उन्हें राष्ट्रपति निर्वाचित किया है। अब वह फिर से केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष के रूप में कमान संभालेंगे।
बता दें कि वह दो बार अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद 2023 में रिटायर हो रहे थे। उन्होंने मार्च 2013 में अपना पहला कार्यभार संभाला था वहीं अक्टूबर 2017 में दूसरा कार्यकाल शुरू किया था। संसद ने संविधान में संशोधन करते हुए राष्ट्रपति पद की सीमा को हटा दिया। इसके बाद उन्हें अनिश्चितकाल तक बनाए रखने का रास्ता साफ हुआ।
आपको बता दें कि चीन ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए दो कार्यकाल की समय सीमा को समाप्त करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के प्रभुत्व को बरकरार रखने और नेतृत्व की एकता के लिए यह जरूरी था। उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी शी जिनपिंग के आजीवन राष्ट्रपति रहने के प्रस्ताव का समर्थन किया था।
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बता दें कि वह दो बार अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद 2023 में रिटायर हो रहे थे। उन्होंने मार्च 2013 में अपना पहला कार्यभार संभाला था वहीं अक्टूबर 2017 में दूसरा कार्यकाल शुरू किया था। संसद ने संविधान में संशोधन करते हुए राष्ट्रपति पद की सीमा को हटा दिया। इसके बाद उन्हें अनिश्चितकाल तक बनाए रखने का रास्ता साफ हुआ।
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आपको बता दें कि चीन ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए दो कार्यकाल की समय सीमा को समाप्त करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के प्रभुत्व को बरकरार रखने और नेतृत्व की एकता के लिए यह जरूरी था। उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी शी जिनपिंग के आजीवन राष्ट्रपति रहने के प्रस्ताव का समर्थन किया था।
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राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के दो कार्यकाल की समय सीमा को समाप्त करने का प्रस्ताव पेश किया था
शी जिनपिंग
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति ने संविधान में संशोधन करके राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के दो कार्यकाल की समय सीमा को समाप्त करने का प्रस्ताव पेश किया था। हाल ही में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने वाले शी के बारे में कहा जा रहा था कि इस प्रस्ताव से वह तीसरा कार्यकाल और उसके बाद भी आजीवन राष्ट्रपति बने रहेंगे।
इस पर चीन और विदेशों में चिंता और अटकलों का दौर शुरू हो गया था। चीनी क्रांति के बाद पार्टी के संस्थापक माओ जेदोंग ने भी निरंकुश सत्ता का उपभोग किया था। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के प्रवक्ता झांग येसूई ने पहली बार पार्टी के इस फैसले पर कहा था कि सीपीसी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति के लिए तो कार्यकाल की सीमा है, लेकिन पार्टी प्रमुख और सैन्य प्रमुख के कार्यकाल के बारे में कोई सीमा निर्धारित नहीं है। संविधान अब तक राष्ट्रपति के कार्यकाल के बारे में भी इसी परंपरा का पालन करता रहा है।
शी ने 2013 में सत्ता संभाली थी। इसके अलावा वह पार्टी और सेना के अध्यक्ष रहे। चीन में पार्टी और सेना के प्रमुख का पद महत्वपूर्ण होता है, जबकि राष्ट्रपति का पद कुल मिलाकर रस्मी होता है।
इस पर चीन और विदेशों में चिंता और अटकलों का दौर शुरू हो गया था। चीनी क्रांति के बाद पार्टी के संस्थापक माओ जेदोंग ने भी निरंकुश सत्ता का उपभोग किया था। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के प्रवक्ता झांग येसूई ने पहली बार पार्टी के इस फैसले पर कहा था कि सीपीसी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति के लिए तो कार्यकाल की सीमा है, लेकिन पार्टी प्रमुख और सैन्य प्रमुख के कार्यकाल के बारे में कोई सीमा निर्धारित नहीं है। संविधान अब तक राष्ट्रपति के कार्यकाल के बारे में भी इसी परंपरा का पालन करता रहा है।
शी ने 2013 में सत्ता संभाली थी। इसके अलावा वह पार्टी और सेना के अध्यक्ष रहे। चीन में पार्टी और सेना के प्रमुख का पद महत्वपूर्ण होता है, जबकि राष्ट्रपति का पद कुल मिलाकर रस्मी होता है।