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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- फुटपाथ पर पहला हक पैदल चलने वालों का
Tue, 25 Aug 2026 10:13 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 25 Aug 2026 10:13 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फुटपाथ मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और सड़कों पर पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित व स्पष्ट रूप से चिह्नित जगह होना जरूरी है। सोमवार को जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पक्षकार बनाते हुए केंद्र के निर्देशों के पालन पर जवाब मांगा।
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पीठ ने कहा कि जहां सड़क है, वहां पैदल यात्रियों के लिए अलग और स्पष्ट जगह होनी चाहिए। उस पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए और वाहन मार्ग से उसे सुरक्षित तरीके से अलग किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को बिना डर चलने का भरोसा हो।
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सुप्रीम कोर्ट ने 19 जून के फैसले में कहा था कि चिह्नित फुटपाथ पर चलना नागरिक का मौलिक अधिकार है। यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) के तहत आवागमन के अधिकार और अनुच्छेद 21 के जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फुटपाथ पर पैदल चलने वालों का अधिकार मोटर वाहनों की आवाजाही से ऊपर है।
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स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी
कोर्ट के मुताबिक नगर निकायों, शहरी विकास प्राधिकरणों और पंचायतों की जिम्मेदारी है कि वे फुटपाथ का निर्माण, सीमांकन और रखरखाव करें और उन्हें अतिक्रमण से बचाएं। फुटपाथ के अधिकार के उल्लंघन पर नागरिक सांविधानिक और कानूनी उपाय के साथ मुआवजे की मांग भी कर सकते हैं।