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महाराष्ट्र में महायुति का बड़ा फैसला: भाजपा-शिवसेना-एनसीपी साथ लड़ेंगे चुनाव, सहयोगियों पर बयानबाजी से भी परहेज

Tue, 25 Aug 2026 10:15 AM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: शिवम गर्ग Updated Tue, 25 Aug 2026 10:15 AM IST
सार

महाराष्ट्र में महायुति के घटक दल आगामी चुनाव मिलकर लड़ेंगे और एक-दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी से बचेंगे। भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के नेताओं की बैठक में बेहतर समन्वय, विकास निधि और चुनावी रणनीति पर भी चर्चा हुई। 

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Maharashtra Mahayuti to Contest Elections Together, Leaders Asked to Avoid Public Criticism
महायुति का बड़ा फैसला - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति के घटक दल आगामी चुनाव मिलकर लड़ेंगे। साथ ही गठबंधन के किसी भी दल के नेता एक-दूसरे के खिलाफ आलोचनात्मक या विरोधाभासी बयान नहीं देंगे। यह जानकारी राज्य के राजस्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार को महायुति के नेताओं की बैठक के बाद दी। महायुति में भाजपा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी प्रमुख घटक हैं। गठबंधन के नेताओं की बैठक में चुनावी रणनीति, विकास निधि के इस्तेमाल और आपसी समन्वय को लेकर चर्चा हुई।

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क्या महायुति मिलकर लड़ेगी आगामी चुनाव?

बावनकुले ने कहा कि आगामी चुनाव स्थानीय निकायों के हों या अन्य, उन्हें महायुति के घटक के तौर पर मिलकर लड़ने का फैसला किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन का फॉर्मूला सभी दलों के लिए अनिवार्य रहेगा। उन्होंने कहा कि महायुति में शामिल दलों के बीच किसी तरह का भ्रम या विरोधाभासी बयान नहीं होना चाहिए। सहयोगी दलों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आलोचना से भी बचना होगा।

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क्यों लिया गया बयानबाजी रोकने का फैसला?

महायुति में सहयोगी दलों के नेताओं के बीच हाल के विवादों की पृष्ठभूमि में यह फैसला अहम माना जा रहा है। भाजपा नेताओं की कथित ऑडियो क्लिप में दूसरे नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर विवाद हुआ था। वहीं, शिवसेना के कुछ विधायकों ने एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे को लेकर भी आलोचनात्मक टिप्पणियां की थीं। बावनकुले ने कहा कि गठबंधन के भीतर मतभेदों पर आपस में चर्चा की जा सकती है, लेकिन सार्वजनिक तौर पर सहयोगियों की आलोचना नहीं होनी चाहिए।

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क्या बदले जाएंगे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस?

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों पर भी बावनकुले ने स्थिति साफ करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बदलने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल फडणवीस को हटाने की बातें इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे अपना राजनीतिक काम नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महायुति को जनता ने बड़ा जनादेश दिया है, ऐसे में नेतृत्व बदलने का कोई कारण नहीं है।

विकास निधि और बेहतर समन्वय पर भी चर्चा

महायुति की बैठक में विकास निधि के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा हुई। बावनकुले के मुताबिक, गठबंधन के सभी दलों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय बनाए रखने पर सहमति बनी है। उन्होंने बताया कि महायुति में करीब 12 राजनीतिक दल शामिल हैं और सभी के साथ प्रभावी संवाद बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा। सरकार अपने चुनावी वादों को भी गठबंधन के तौर पर मिलकर पूरा करेगी।

एक महीने में निगमों में नियुक्तियां पूरी करने का दावा

बावनकुले ने कहा कि राज्य में करीब 170 निगम हैं, जिनमें 650 से ज्यादा सदस्यों की नियुक्तियां होनी हैं। गठबंधन के सभी दलों ने इन नियुक्तियों की प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी करने पर सहमति जताई है। जिला पालक मंत्रियों को विकास निधि के इस्तेमाल और उसके लिए तय फॉर्मूले की जानकारी भी दी गई है।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर बावनकुले ने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में व्यापक बदलाव की दिशा में काम कर रही है। स्कूलों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए उपलब्ध धन का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बदलाव एक साल में पूरा नहीं होगा, लेकिन सरकार इस दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।

राहुल गांधी के बयान पर क्या बोले बावनकुले?

आदिवासी विकास विभाग के छात्रावासों में प्रवेश से जुड़े मुद्दे पर राहुल गांधी के समर्थन को लेकर भी बावनकुले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले ही इस मामले को देख चुके हैं। बावनकुले ने कहा कि 30 वर्ष से अधिक उम्र के कुछ छात्रों के आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में रहने से जुड़ा मामला सरकार के संज्ञान में है। उन्होंने राहुल गांधी पर टिप्पणी करने से पहले पूरी जानकारी लेने की सलाह दी।

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