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विश्व को भारत की अहिंसा और करुणा की जरूरत: दलाई लामा
Thu, 21 Nov 2019 09:35 PM IST
अमित मंडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Thu, 21 Nov 2019 09:35 PM IST
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तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा
- फोटो : अमर उजाला (file photo)
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत की अहिंसा और करुणा की प्राचीन परंपराओं की आज की दुनिया में जरूरत है क्योंकि लोग धर्म और क्षेत्रीय विवादों को लेकर लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी उच्च नैतिक शिक्षाओं की 3,000 साल पुराने प्राचीन परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ बनाए रखना चाहिए। दलाई लामा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में यूनिवर्सल एथिक्स पर भाषण दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारत को अपनी शिक्षा प्रणाली में क्रांति लाने की आवश्यकता है और धार्मिक शिक्षा देने के बजाए उसे अहिंसा, प्रेम, दयालुता और करुणा जैसे मानवीय गुणों को शिक्षा देनी चाहिए। जैसे दुनिया के कई हिस्सों मेें शिया और सुन्नी मुसलमान आपस में लड़ रहे हैं लेकिन भारत में ऐसा कोई संघर्ष नहीं है। इस असवर पर जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल एनएन वोहरा और आईसीसीआर अध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे ने भी लोगों को संबोधित किया।
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उन्होंने कहा कि भारत को अपनी शिक्षा प्रणाली में क्रांति लाने की आवश्यकता है और धार्मिक शिक्षा देने के बजाए उसे अहिंसा, प्रेम, दयालुता और करुणा जैसे मानवीय गुणों को शिक्षा देनी चाहिए। जैसे दुनिया के कई हिस्सों मेें शिया और सुन्नी मुसलमान आपस में लड़ रहे हैं लेकिन भारत में ऐसा कोई संघर्ष नहीं है। इस असवर पर जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल एनएन वोहरा और आईसीसीआर अध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे ने भी लोगों को संबोधित किया।
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