दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग: असम में है 126 फुट ऊंचा है शिवलिंग, लगा भक्तों का तांता
मंदिर का उद्घाटन प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 22 फरवरी से शुरू हुआ और 25 फरवरी 2021 को समाप्त हुआ। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा और पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल उपस्थित रहे।
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सावन के पवित्र महीने में दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर (महा मृत्यंजय मंदिर) में जलाभिषेक के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है। वैसे तो सारा साल ही यहां पर भक्तों की भीड़ रहती है, लेकिन सावन के महीने में खास तौर पर सोमवार के दिन यहां भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है। यह मंदिर बरदुआ क्षेत्र नौगांव, असम में स्थित है, जो गुवाहाटी से करीब 120 किमी दूर है। मंदिर अपने स्थापत्य की दृष्टि से विशेष है, क्योंकि इसे शिवलिंग के रूप में बनाया गया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा और ऊंचा शिवलिंग है, जिसकी ऊंचाई 126 फुट है। इस विशेषता ने इसे भक्तों के लिए अद्वितीय और बहुत आकर्षक बना दिया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा मंदिर के चेयरमैन हैं। रोजाना यहां भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन सावन के दिनों में यहां रोजना एक लाख से अधिक भक्त पहुंच रहे हैं।
दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने की थी यहां तपस्या
पुराणों के अनुसार दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने किया था, यहीं पर तपस्या की थी। धरती के नीचे करीब 48 फीट नीचे एक शिवलिंग की स्थापना की थी। इसी विचार के साथ आचार्य भृगु गिरि महाराज ने इस स्थान को मंदिर निर्माण के लिए चुना था। मंदिर का निर्माण महामृत्यंजय सेवा ट्रस्ट ने 2003 में आचार्य भृगु गिरि महाराज की देखरेख में शुरू किया। महाराज के बेटे सजय शर्मा ने बताया कि जब आचार्य भृगु गिरि महाराज ने देह त्यागा तो उनका अनुसरण करने वाले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इसे पूरा करने संकल्प लिया।
उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव
मंदिर का उद्घाटन प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 22 फरवरी से शुरू हुआ और 25 फरवरी 2021 को समाप्त हुआ। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, असम के तत्कालीन स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री और मौजूदा सीएम हिमंत बिस्व सरमा और उस वक्त के सीएम सर्बानंद सोनोवाल उपस्थित थे। यज्ञ के लिए 108 यज्ञ कुंडों की स्थापना की गई थी और लगभग 250 पुजारी प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ करने के लिए तमिलनाडु से आए थे। प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ के पूरा होने के बाद मंदिर 26 फरवरी 2021 से भक्तों के लिए खोल दिया गया।
भूकंप से आई थी मामूली दरार
- 28 अप्रैल 2021 को असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक बड़ा भूकंप आया था, रिक्टर पैमाने पर 6.7 मापी गई थी। भूकंप के कारण मंदिर के ऊपरी हिस्से में मामूली दरार देखी गई थी, लेकिन किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ। पुराणों के अनुसार दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने किया था यहीं पर तपस्या की थी। धरती के नीचे करीब 48 फीट नीचे एक शिवलिंग की स्थापना की थी।
- इसी विचार के साथ आचार्य भृगु गिरि महाराज ने इस स्थान को मंदिर निर्माण के लिए चुना था। मंदिर का निर्माण महामृत्यंजय सेवा ट्रस्ट ने 2003 में आचार्य भृगु गिरि महाराज की देखरेख में शुरू किया। महाराज के बेटे सजय शर्मा ने बताया कि जब आचार्य भृगु गिरि महाराज ने देह त्यागा तो उनका अनुसरण करने वाले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इसे पूरा करने संकल्प लिया।