World Arthritis Day: क्या है विश्व गठिया दिवस? क्यों हो रही इसकी चर्चा, जानिए सबकुछ
पर्यावरण और जीवनशैली के बदलाव अर्थराइटिस को बढ़ावा देने के सबसे बड़े कारण हैं। हर साल 12 अक्तूबर को दुनिया भर में विश्व गठिया दिवस मनाया जाता है। इस साल की थीम ‘यह आपके हाथ में, कार्रवाई करें’ है, जिसका मतलब है कि बीमारी की रोकथाम और निदान आपके हाथ में है।
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विस्तार
अर्थराइटिस और दृष्टिबाधा यह दोनों देश के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती हैं। बीते कुछ दशक में दृष्टिबाधा के मामलों में करीब 52 फीसदी कमी आई है, लेकिन इससे कई गुना ज्यादा अर्थराइटिस मरीजों की संख्या बढ़ी है।
इन बीमारियों के प्रति जागरूकता लाने के लिए आज दुनियाभर में विश्व अर्थराइटिस दिवस और विश्व दृष्टि दिवस मनाया जा रहा है, जिसके बारे में चर्चा करती परीक्षित निर्भय की रिपोर्ट।
जीवनशैली में बदलाव वजह
पर्यावरण और जीवनशैली के बदलाव अर्थराइटिस को बढ़ावा देने के सबसे बड़े कारण हैं। हर साल 12 अक्तूबर को दुनिया भर में विश्व गठिया दिवस मनाया जाता है।
इस साल की थीम ‘यह आपके हाथ में है', जिसका मतलब है कि बीमारी की रोकथाम और निदान आपके हाथ में है। समय पर कदम उठाने से जीवन को बचाया जा सकता है।
हमारे देश में गंभीर समस्या
अर्थराइटिस को सामान्य भाषा में गठिया कहा जाता है। यह सूजन संबंधी स्थिति है, जो जोड़ों में दर्द और कठोरता का कारण बनती है।
हमारे देश में यह गंभीर समस्या इसलिए बनी है क्योंकि बड़ी आबादी में व्यायाम का अभाव और गतिहीन जीवन शैली के कारण मोटापे में भी बढ़ोतरी होना है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में गठिया के मामले अधिक हैं।
7 लक्षण, जो सामान्य नहीं हैं
हर दिन जोड़ों का दर्द, जोड़ों में अकड़न और सूजन दैनिक दिनचर्या में आपकी गति की सीमा भी कम हो सकती है। जोड़ के आसपास लाल त्वचा, दर्द आमतौर पर बुखार के साथ होता है। दर्द के कारण दैनिक कार्य में कठिनाई, दर्द निवारक दवाएं भी जोड़ों के दर्द को ठीक नहीं कर सकतीं।
दो तरह का गठिया सबसे ज्यादा
यह अधिकांश बुजुर्गों को प्रभावित करता है, 50 साल से ऊपर की आयु वालों को दर्द या सूजन के रूप में परेशान करती है। यह बीमारी शरीर के किसी भी जोड़ को नुकसान पहुंचा सकती है। आमतौर पर घुटनों और कूल्हों जैसे वजन उठाने वाले जोड़ों में दर्द होता है।
यह एक चिरकालिक रोग है, जिसमें जोड़ों में दर्द, कड़ापन व सूजन आ जाती है। यह इम्यून सिस्टम में असंतुलन के कारण होता है। सामान्यतः यह रोग 20 से 30 वर्ष में होता है। इस बीमारी से पीड़ित नौकरीपेशा युवक युवतियां हैं। इसके कारण कलाई, हाथ के जोड़ और पैरों में सूजन आ जाती है।
ऐसे लोग जिन्हें हो सकता है रोग
- मोटापा ग्रस्त लोगों में गठिया विकसित होने की संभावना अधिक होती है। आप जितना अधिक वजन डालेंगे, आपके कूल्हों, पीठ और पैरों पर उतना ही अधिक बोझ पड़ेगा।
- चीनी और सफेद आटे जैसे अधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के सेवन से वजन बढ़ सकता है, जो जोड़ों के दर्द पर भारी पड़ता है। उन्हें फलों, मेवों और साबुत अनाज से बदलें।
- बार-बार टेक्स्ट करने और अपने फोन को एक ही स्थिति में रखने से ‘स्मार्टफोन थंब’ हो सकता है। टेक्स्टिंग से आपके हाथों के जोड़ों पर तनाव पड़ता है, खासकर आपके अंगूठे पर।
- हर समय ऊंची एड़ी की सैंडिल पहनने से पैर अजीब स्थिति में आ जाते हैं, जिससे जोड़ों पर दबाव पड़ता है, मांसपेशियों में खिंचाव होता है और पीठ का संतुलन बिगड़ सकता है।
अर्थराइटिस के रोगियों में लक्षण एक समान नहीं होते हैं
किसी को बुखार, लिम्फ नोड्स में सूजन, वजन में कमी, थकान, हाथ का उपयोग करने में असमर्थता, चलने में कठिनाई और खराब नींद का अनुभव हो सकता है।
इलाज: गठिया का इलाज व्यावसायिक या भौतिक चिकित्सा, व्यायाम और ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक दवा के माध्यम से किया जा सकता है। आयुर्वेद, औषधीय तेलों से मालिश और होम्योपैथी जैसी वैकल्पिक चिकित्सा से भी शुरुआती दौर में राहत मिलती है। दिल्ली एम्स के अध्ययन में पता लगा है कि योग के जरिये अर्थराइटिस पर काफी हद तक नियंत्रण पा सकते हैं।
बचाव
शरीर का स्वस्थ वजन बनाए रखें और समझदारी से खाएं। अपने वजन पर नियंत्रण रखें और नियमित रूप से व्यायाम करें जो कि घुटने की समस्याओं को
दूर रखने के मंत्र हैं।
अपनी मुद्रा पर ध्यान दें, ऊंची एड़ी की सैंडिल से बचें और चोट से बचें। अपने विटामिन बी 12 और विटामिन डी 3 के स्तर पर नियमित नजर रखें, गठिया के मामले में विटामिन डी 3 थोड़ा अधिक महत्वपूर्ण है।