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Hindi News ›   India News ›   Working of Public Accounts Committee should be flexible to match expectations of people: Om Birla

पीएसी का शताब्दी वर्ष: बिड़ला बोले- लोगों की अपेक्षाएं बढ़ीं, इसलिए संसद और विधानसभाओं की समितियों का साझा प्लेटफॉर्म जरूरी

Sun, 05 Dec 2021 05:34 PM IST
सुरेंद्र जोशी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 05 Dec 2021 05:34 PM IST
सार

बिड़ला ने कहा कि समय के साथ, लोक लेखा समिति की प्रासंगिकता बढ़ी है। लोगों की अपेक्षाएं भी समिति से बढ़ी हैं। इसलिए, यह पीएसी की जिम्मेदारी है कि वह इसे विकसित करे।

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Working of Public Accounts Committee should be flexible to match expectations of people: Om Birla
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला - फोटो : PTI

विस्तार

संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के शताब्दी वर्ष समारोह का समापन रविवार को हुआ। समापन भाषण में लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि लोक लेखा समिति का काम जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने संसद व विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों का साझा प्लेटफार्म बनाने का भी सुझाव दिया। 

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लोक लेखा समिति के शताब्दी वर्ष समारोह का उद्घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में किया था। रविवार को इसके समापन कार्यक्रम में स्पीकर बिड़ला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, पीएसी अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी शामिल हुए। उनके अलावा केंद्रीय मंत्री, संसद सदस्य, राज्य विधायी निकायों के पीठासीन अधिकारी, राज्यों की लोक लेखा समितियों के अध्यक्ष और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे। 
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बिड़ला ने कहा कि समय के साथ, लोक लेखा समिति की प्रासंगिकता बढ़ी है। लोगों की अपेक्षाएं भी समिति से बढ़ी हैं। इसलिए, यह पीएसी की जिम्मेदारी है कि वह इसे विकसित करे। इसकी प्रक्रियाओं में लचीलापन लाए। उसे देश के विकास के लिए कार्यपालिका को जवाबदेह बनाना चाहिए और सरकार के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए। 
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स्पीकर ने सुझाव दिया कि संसद और राज्य विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों का एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया जाना चाहिए, ताकि समितियां अपने श्रेष्ठ कार्यों को साझा कर सकें। उनकी सिफारिशों पर अमल की निगरानी कर सकें। बिड़ला ने कहा कि इन समितियों को अपना कामकाज लचीला बनाने के साथ लोगों से बातचीत भी करना चाहिए, ताकि उनकी प्रतिक्रिया जानकर अपनी सिफारिशों को और प्रभावी व अर्थपूर्ण बना सकें।

भ्रष्टाचार ने लोकतंत्र को लहूलुहान किया: नायडू   वहीं, एक अन्य कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि भ्रष्टाचार ने लोकतंत्र के हृदय को लहूलुहान कर रखा है और उन्होंने इसके प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने की अपील की। उन्होंने भ्रष्टाचार के दोषी असैन्य नौकरशाहों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कड़ी एवं समयबद्ध कार्रवाई की जरूरत पर बल दिया। नायडू ने नौकरशाहों के भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे पर भी जोर दिया।

उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि जो अधिकारी उचित कार्रवाई करते हैं उन्हें हतोत्साहित नहीं करना चाहिए या उनका उत्पीड़न नहीं किया जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति सचिवालय की तरफ से जारी बयान के अनुसार, भ्रष्ट असैन्य नौकरशाहों से कड़ाई से निपटा जाना चाहिए, लेकिन हमें जनहित में अधिकारियों को साहसिक फैसले लेने से हतोत्साहित नहीं करना चाहिए। नायडू ने ये बातें पूर्व कैबिनेट सचिव और झारखंड के पूर्व राज्यपाल प्रभात कुमार की पुस्तक के विमोचन के अवसर पर कही।


उपराष्ट्रपति ने कहा कि ईमानदार असैन्य नौकरशाहों की उपलब्धियों का जश्न मनाने और उनके योगदान को सराहने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह न केवल युवा अधिकारियों के लिए प्रोत्साहन होगा बल्कि वे और अच्छा कार्य करने को प्रेरित होंगे।

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