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Dowry: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हवा से भी तेज फैलती है दहेज के लिए बहू को प्रताड़ित करने की बात, सास को किया बरी

Fri, 29 Aug 2025 08:49 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 29 Aug 2025 08:49 PM IST
सार

Supreme Court On Dowry: देश की सर्वोच्च अदालत ने दहेज से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि दहेज के लिए बहू को प्रताड़ित करने की बात हवा से भी तेज फैलती है। वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए सास को बरी कर दिया है।

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Word spreads faster than wind about daughter-in-law being harassed for dowry: SC
Supreme Court - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि 'जब बहू को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता है, तो इसकी खबर हवा से भी तेज फैलती है।' अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए उत्तराखंड की एक महिला (सास) को बरी कर दिया, जिसे पहले दहेज उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया था।
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क्या था पूरा मामला?
मृतका के पिता ने जून 2001 में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी बेटी अपने ससुराल में मृत पाई गई। उस समय वह गर्भवती थी। पिता का आरोप था कि उनकी बेटी ने कई बार बताया था कि उसकी सास उस पर दहेज को लेकर ताना मारती थी और व्यंग्य करती थी। शिकायत में यह भी कहा गया कि घटना के समय पति शहर में मौजूद नहीं था।
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निचली अदालत और हाई कोर्ट का फैसला
इस मामले में मृतका की सास, ससुर और देवर पर मुकदमा चलाया गया। ट्रायल कोर्ट ने पति और अन्य पुरुष रिश्तेदारों को बरी कर दिया, लेकिन सास को तीन साल की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि मृतका ने अपने परिवार को दहेज उत्पीड़न की बात बताई थी और इसी कारण उसने आत्महत्या की। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को सही ठहराया।


मामले में सुप्रीम कोर्ट की दलील
इस मामले को लेकर सास ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। इस सुनवाई के दौरान एक पड़ोसी गवाह ने कहा कि उसने कभी सास को दहेज की मांग करते नहीं सुना। ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट ने इस गवाही को नजरअंदाज कर दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह नजरअंदाजी गलत थी, क्योंकि ऐसे मामलों में सच अक्सर घर की चारदीवारी से बाहर आ जाता है।

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सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
अदालत ने कहा कि दहेज की मांग किसी भी रूप में हो, वह अपराध मानी जाएगी। किसी महिला को प्रताड़ित करके उससे या उसके परिवार से अवैध मांग पूरी कराने की कोशिश करना 'क्रूरता' की परिभाषा में आता है। लेकिन इस मामले में मृतका की मां और परिवार की गवाही से यह साबित नहीं होता कि सास ने दहेज मांगा था या इतनी प्रताड़ना दी कि उसकी वजह से आत्महत्या हुई। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया, ने कहा कि सबूत पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया गया। सास को दोषमुक्त करार देते हुए पूरी तरह बरी कर दिया गया।
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