फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Womens reservation bill back in focus ahead of Parliament Winter session

Parliament Session: फिर चर्चा में आया महिला आरक्षण विधेयक, सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने उठाया मुद्दा

Tue, 06 Dec 2022 10:11 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Tue, 06 Dec 2022 10:11 PM IST
सार

Parliament Session: लंबे समय से महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने की मांग हो रही है। इस विधेयक को पहली बार 1996 में संसद में पेश किया गया था। इसके बाद इसे कई बार पेश किया जा चुका है। साल 2010 में इस बिल को राज्यसभा में पारित किया गया था, लेकिन 2014 में 15वीं लोकसभा के भंग होने के बाद इसकी मियाद खत्म हो गई।

विज्ञापन
Womens reservation bill back in focus ahead of Parliament Winter session
संसद का शीतकालीन सत्र - फोटो : ANI

विस्तार

संसद का शीतकालीन सत्र बुधवार (सात दिसंबर) से शुरू हो रहा है। इससे पहले एक बार फिर महिला आरक्षण विधेयक को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कभी इसका विरोध कर चुके जेडीयू समेत कई विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण विधेयक को इस सत्र में पेश करने और पारित कराए जाने की मांग की है। विपक्षी दलों ने शीतकालीन सत्र को लेकर मंगलवार को हुई दो अहम बैठकों में महिला आरक्षण विधेयक का मुद्दा उठाया। शीतकालीन सत्र से पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक हुई।
विज्ञापन


बीजेडी नेता सस्मित पात्रा ने रक्षा मंत्री और लोकसभा में उपनेता राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में यह मांग उठाई. टीएमसी, कांग्रेस, एनसीपी और टीआरएस सहित कई अन्य विपक्षी दलों ने भी इस मांग का समर्थन किया। बीएसी की बैठक में टीएमसी नेता सुदीप बंदोपाध्याय और कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी यह मांग उठाई। डीएमके, शिअद और जेडीयू ने उनका समर्थन किया और मांग की कि इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन


टीएमसी सांसद बंदोपाध्याय ने कहा कि लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में कई दलों ने यह मांग उठाई और हमने सरकार को सुझाव दिया कि उसे इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। वहीं, शिअद नेता हरसिमरत कौर बादल ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि विधेयक को पारित किया जाए और महिलाओं को उनका हक दिया जाए। जेडीयू नेता राजीव रंजन सिं ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने का समय है और सरकार को यह बिल लाना चाहिए और हम इसका समर्थन करेंगे।

1996 में पहली बार पेश किया गया था विधेयक
लंबे समय से महिला आरक्षण विधेयक के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने की कोशिश हो रही है। इस विधेयक को पहली बार 1996 में संसद में पेश किया गया था। इसके बाद इसे कई बार पेश किया जा चुका है। साल 2010 में इस बिल को राज्यसभा में पारित किया गया था, लेकिन 2014 में 15वीं लोकसभा के भंग होने के बाद इसकी मियाद खत्म हो गई।  बता दें, लोकसभा में लंबित कोई भी विधेयक सदन के भंग होने के साथ ही समाप्त हो जाता है। राज्यसभा में लंबित विधेयकों को 'लाइव रजिस्टर' में रखा जाता है और वे लंबित रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed