{"_id":"650b044a02516007dd0a2c1c","slug":"women-s-reservation-bill-how-justified-is-the-demand-for-giving-separate-reservation-to-obc-muslim-women-2023-09-20","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"महिला आरक्षण विधेयक: ओबीसी-मुस्लिम महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की मांग कितनी सही?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
महिला आरक्षण विधेयक: ओबीसी-मुस्लिम महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की मांग कितनी सही?
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
महिला आरक्षण विधेयक
- फोटो :
सोशल मीडिया
विस्तार
संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मुद्दा 1996 से चल रहा है, लेकिन तमाम अवरोधों के कारण अब तक यह संसद से पास नहीं हो सका। इस बार भी जब नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद में 'नारी शक्ति वंदन विधेयक' पेश कर दिया है, इस पर सबसे बड़ा हमला ओबीसी समुदाय की महिलाओं को अलग से आरक्षण दिए जाने को लेकर किया जा रहा है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने इसी मुद्दे के सहारे केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की है।इसी मुद्दे पर कभी एक नेता ने कहा था कि वे ऐसा कानून नहीं पास होने देंगे जिससे संसद में केवल 'परकटी महिलाओं' को ही प्रतिनिधित्व मिले। उनका इशारा उच्च वर्ण की महिलाओं के द्वारा महिला आरक्षण का पूरा लाभ उठा लेने से था। वे महिला आरक्षण में ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षण के अंदर आरक्षण दिए जाने की मांग कर रहे थे।
'नारी शक्ति वंदन विधेयक' का जो प्रारूप सामने आया है, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि बिल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए अलग इन वर्गों के लिए पहले से आरक्षित सीटों में से एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से कोई कोटा नहीं निर्धारित किया गया है।
सोनिया ने भी उठाया ओबीसी का मुद्दा
इसे लेकर तमाम विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हो गए हैं। सोनिया गांधी ने ओबीसी समुदाय की महिलाओं के लिए कोटा निर्धारित करने की मांग करते हुए बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि यह राजीव गांधी सरकार का लाया हुआ बिल है। उन्होंने पंचायती व्यवस्था में महिलाओं के लिए आरक्षण शुरू किया था। लेकिन उन्होंने महिला आरक्षण में पिछड़े, दलित, आदिवासी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण दिए जाने की वकालत की।
राहुल गांधी ने किया हमला
राहुल गांधी ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक पर कहा कि देश के पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी महिला आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को महिला आरक्षण तत्काल लागू करना चाहिए। इसके लिए जनगणना का पेंच फंसाकर मामले को देर करने का रास्ता तैयार कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को तुरंत आरक्षण देने में कोई बाधा नहीं है।
मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा
वहीं, असदुद्दीन ओवैसी ने यह कहकर इस बिल की मंशा पर प्रश्न खड़े किए हैं कि इस बिल में मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में संसद में मुस्लिम समुदाय की महिलाओं की बात नहीं उठाई जाएगी। हालांकि, भाजपा ने ओवैसी पर यह कहते हुए पलटवार किया है कि इस समय भी धार्मिक आधार पर कोई आरक्षण नहीं दिया गया है। संविधान में केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए लोकसभा में सीटों का आरक्षण दिया गया है। इसमें धार्मिक आधार पर कोई आरक्षण पहले भी नहीं दिया जा रहा है, इसलिए महिला आरक्षण में धार्मिक आधार पर आरक्षण की मांग करना अनुचित है।
हालांकि, महिलाओं के लिए आरक्षण का कानून लागू होने के बाद भी केवल 181 सीटों पर ही महिला आरक्षण लागू होगा। शेष 362 सीटों पर कोई भी दल मुसलमान सहित किसी भी समाज की महिलाओं को प्रत्याशी बनाने के लिए स्वतंत्र होगा। ऐसे में महिलाओं के आरक्षण में महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग करना अनुचित है।
मुलायम की राह पर सपा
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई ने अमर उजाला से कहा कि इस बिल को लेकर उनकी राय बहुत स्पष्ट है। मुलायम सिंह यादव के जमाने से समाजवादी पार्टी यह मानती रही है कि महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए। लेकिन, इसमें पिछड़े, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद में सोनिया गांधी का बयान पूरी तरह मुलायम सिंह की इस मुद्दे पर राय के अनुरूप है।
महिला को हर वर्ग के पुरुषों से आजादी की आवश्यकता
महिला अधिकार कार्यकर्ता अंबर जैदी ने अमर उजाला सेे कहा कि महिला किसी भी वर्ग की हो, उसे केवल महिला के रूप में देखा जाना चाहिए। हर धर्म-जाति और संप्रदाय की महिलाओं को थोड़े-बहुत अंतर के साथ एक जैसे भेदभाव का सामना करना पड़ता है। जब किसी महिला के साथ अत्याचार होता है, तब अपराधी यह नहीं देखता कि वह किस जाति या धर्म की है, वह उसे महिला के रूप में देखता है और उसी कारण उस पर हमला करता है। इसलिए उनकी अपील है कि हर वर्ग की महिलाओं को एक समान रूप से आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे धार्मिक या जातीय आधार पर इस ऐतिहासिक बिल को पास होने से न रोकें।
अंबर जैदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीन तलाक विरोधी कानून पास किया था, तब भी वे इसे महिला विरोधी कदम बता रहे थे। उस समय ओवैसी ने कहा था कि यदि मोदी सरकार महिलाओँ की हितैषी है तो उसे महिला आरक्षण का कानून लाना चाहिए। लेकिन आज जब कानून आ रहा है तो उसकी राह में रोड़े अटकाने का काम किया जा रहा है। यदि ये दल महिला हितैषी हैं तो उन्हें बताना चाहिए कि स्वयं उनकी पार्टी में शीर्ष पदों पर कितनी महिलाएं हैं और उन्होंने कितनी महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा। उन्होंने कहा कि अब एक तिहाई आरक्षण होने के बाद हर राजनीतिक दल महिला प्रत्याशियों को उतारने के लिए मजबूर होगा और इससे महिला सशक्तीकरण का बड़ा लाभ होगा।