महिला आरक्षण: सरकार का फॉर्मूला तय, OBC कोटा नहीं; लोकसभा सीटों में 50% बढ़ोतरी के साथ 2029 चुनाव से लागू होगा
Nari Shakti Vandan Act: महिला आरक्षण बहुप्रतीक्षित कानून को लेकर अब सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है। लोकसभा चुनाव 2029 से महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण लागू होगा, लेकिन ओबीसी कोटा शामिल नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही लोकसभा में सीटों की संख्या में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी करने का फॉर्मूला तय किया गया है।
विस्तार
अगले आम चुनाव में महिलाओं के लिए एक तिहाई स्थान सुरक्षित करने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं। इस विषय पर केवल विपक्षी दलों से ही नहीं बल्कि सत्ताधारी गठबंधन के भीतर भी गहन चर्चा की जा रही है। बुधवार को हुई बैठक में पिछड़ा वर्ग के लिए अलग कोटे जैसे कुछ प्रश्नों के बीच संविधान संशोधन विधेयक पर सहमति बन गई है। सरकार अब कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों से अंतिम वार्ता के बाद इस विधेयक को प्रस्तुत करने का समय निर्धारित करेगी।
बैठक के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने गठबंधन के सहयोगियों को विस्तार से बताया कि सरकार इस विषय पर इतनी सक्रिय क्यों हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के बाद होने वाली सीमा निर्धारण की प्रक्रिया 2029 तक ही पूर्ण हो पाएगी। ऐसी स्थिति में सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम को आगामी आम चुनाव में लागू करने का अपना वचन पूरा करना चाहती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि विभिन्न क्षेत्रों में सीटों की संख्या को आनुपातिक आधार पर 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा।
विधानसभा चुनावों पर प्रभाव नहीं
सरकार जिस योजना पर विपक्ष से संवाद कर रही है उसके अनुसार महिला आरक्षण को वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाना है। सत्ता पक्ष की बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि वर्ष 2023 में विधेयक लाते समय इसे दो हजार उन्नतीस में प्रभावी करने का ही संकल्प लिया गया था। विपक्षी नेताओं का भी यही मानना है कि सरकार ने आगामी वर्षों में होने वाले उत्तर प्रदेश या अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में इसे लागू करने का कोई संकेत नहीं दिया है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को आगामी आम चुनाव में लागू करने का अपना वचन पूरा करना चाहती है सरकार। -अमित शाह
पिछड़ा वर्ग कोटे पर सांविधानिक स्थिति
बैठक में जब पिछड़ा वर्ग के लिए अलग आरक्षण का प्रश्न उठा तो गृह मंत्री ने कहा कि सांविधानिक रूप से ऐसा करना संभव नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि महिला आरक्षण लागू होते ही पिछड़ा वर्ग से आने वाले जनप्रतिनिधियों की संख्या स्वयं ही बढ़ जाएगी। इसका कारण यह है कि कोई भी राजनीतिक दल टिकट वितरण के समय इतने बड़े वर्ग की अनदेखी कर अपना राजनीतिक नुकसान नहीं करना चाहेगा।
जातिगत गणना की चुनौतियां
बैठक में 2027 की गणना में जातियों के आंकड़े एकत्रित करने पर भी विमर्श हुआ। एक वरिष्ठ मंत्री ने पुरानी गणना की स्मृतियां साझा करते हुए बताया कि तब लाखों की संख्या में जातियां और उपजातियां सामने आने के कारण उन आंकड़ों का उपयोग कठिन हो गया था। चूंकि जाति बताने का कोई निश्चित स्वरूप नहीं है और यह व्यक्ति की अपनी जानकारी पर आधारित है इसलिए इस बार भी यह संख्या बहुत अधिक बढ़ सकती है।
विधेयक प्रस्तुत करने की रणनीति
सरकार इस महत्वपूर्ण निर्णय पर विपक्षी दलों से संवाद के बाद ही अंतिम निर्णय लेगी। वर्तमान में दो विकल्पों पर विचार हो रहा है। पहला विकल्प वर्तमान सत्र के समापन के बाद इसी कार्य के लिए दो दिन की अतिरिक्त बैठक बुलाने का है और दूसरा विकल्प पांच राज्यों के चुनाव बाद मई माह में विशेष सत्र बुलाने का है। सरकार के सूत्रों के अनुसार प्रमुख विपक्षी दल सैद्धांतिक रूप से इस पर सहमत हैं और अन्य दलों से चर्चा बाकी है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.