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ओडिशा: 2 सालों से विकास के रास्ते पर चल पड़ा है ये पिछड़ा गांव, अब लोगों के पास हैं सभी सुविधाएं

Sat, 29 Sep 2018 01:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गजपति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गजपति Updated Sat, 29 Sep 2018 01:43 PM IST
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Women of Guadang Gorjang village working hard for their development

देश के कई हिस्सों में जहां सरकार द्वारा बड़े बदलाव किए जा रहे हैं वहीं कई हिस्से ऐसे भी हैं जहां तक सरकार नहीं पहुंच पाई है। लेकिन उन इलाकों में से कुछ ने अपने विकास का जिम्मा खुदपर ही ले लिया है। ऐसा ही एक गांव है गौरांग गोरजंग। यह गांव ओडिशा राज्य के गजपति जिले में स्थित है। राजधानी भुवनेश्वर से इस गांव की दूरी 350 किमी है।


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देश के कई हिस्सों में जहां सरकार द्वारा बड़े बदलाव किए जा रहे हैं वहीं कई हिस्से ऐसे भी हैं जहां तक सरकार नहीं पहुंच पाई है। लेकिन उन इलाकों में से कुछ ने अपने विकास का जिम्मा खुदपर ही ले लिया है। ऐसा ही एक गांव है गौरांग गोरजंग। यह गांव ओडिशा राज्य के गजपति जिले में स्थित है। राजधानी भुवनेश्वर से इस गांव की दूरी 350 किमी है।

यहां हर शनिवार को गांव की महिलाएं एक जगह एकत्रित होती हैं और बाद में तीन-तीन महिलाओं के समूह बनाए जाते हैं। जिसके बाद ये महिलाएं मिलकर सड़कों और नालियों की साफ सफाई करती हैं। इसके अलावा रोज घर के काम निपटाकर गांव की महिलाएं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ भी बैठती हैं और बच्चों की प्रतिरक्षा एवं उनके स्कूल में दाखिले की महत्ता संबंधित कई बातों को सीखती हैं।

महिलाएं शौचालयों को इस्तेमाल करने का सही तरीका सीखती हैं और इस बारे में दूसरे लोगों को भी बताती हैं। पुरुषों की शराब की लत छुड़ाने का जिम्मा भी गांव की महिलाओं ने ले लिया है। जिसके लिए वह हर संभव कोशिश कर रही हैं।

यूं तो देश के नक्शे में ये गांव महज एक बिंदी के समान है लेकिन बीते 2 सालों में यहां बहुत से बदलाव देखने को मिले हैं। 54 घरों वाला ये गांव अन्य गांवों को भी विकास के लिए प्रेरणा दे रहा है। करीब 260 गांव वाले लंजीया सौरा जनजाति से संबंध रखते हैं। जो कि राज्य के विशेष रूप से 13 सबसे कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) में से एक है।

गांव वालों को मिल रही हैं सभी सुविधाएं

गांव के लोगों ने अपनी मदद खुद करने का विचार किया है। साथ ही सरकार पर निर्भर न होने का एक बड़ा उदाहरण भी पेश किया है। इस गांव से जुड़ी एक खास बात ये भी है कि यहां की महिलाएं एक खास तरह का वस्त्र पहनती हैं। जिसे लंजीया कहा जाता है। जिसका अर्थ होता है परिवर्तन का नेतृत्व करना।

गांव की महिलाओं द्वारा की जा रही मेहनत भी अब देखी जा सकती है। गांव में सभी सड़कें और नालियां साफ हैं। साथ ही यहां के घरों में साफ पानी, बिजली और धुंआरहित चूल्हे भी मौजूद हैं। इसके अलावा हर घर में शौचालय बने हुए हैं। लोगों ने बदलाव के लिए काम पीपल रूरल एजुकेशन मूवमेंट (पीआरईएम) नामक एनजीओ की मदद से शुरू किए हैं, जो कि एक बैंक द्वारा संचालित फाउंडेशन की मदद से चलाया जाता है।

एनजीओ के प्रेजिडेंट जैकोब थंडली का कहना है कि उनके गांव में आने से पहले गांव में कोई विकास नहीं था। लेकिन गांव के लोगों ने उनका खुले हाथों से स्वागत किया। तभी ये सब संभव हो पाया है। यह गांव एनजीओ के 'मॉडल विलेज' नामक स्कीम के अंतर्गत आता है।

अब एक बोरवेल की सहायता से साफ पानी और सरकार की मदद से लोगों के घरों तक बिजली पहुंचाई जा रही है। गांव के लोग अब सरकार की सभी योजनाओं के बारे में जानते हैं। वहीं अगर एनजीओ की बात करें तो यह 149 अन्य गांवों में भी ऐसे ही काम कर रहा है।
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