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महिला सशक्तिकरण: 'महिलाओं ने योग्यता से हर क्षेत्र में पाई उपलब्धि', बोले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता
Sun, 10 Mar 2024 08:38 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 10 Mar 2024 08:38 PM IST
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महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अन्य।
- फोटो : Amar Ujala
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हर क्षेत्र के साथ-साथ महिलाओं ने कानून के सभी क्षेत्रों में भी पुरुषों के समान अपना अधिकार स्थापित किया है। आज कल लैंगिक समानता पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन महिलाओं ने अपनी योग्यता से हर वह मंजिल पाने में सफलता हासिल की है जिसे अब तक उसके लिए अछूता माना जा रहा था। देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने महिला सशक्तिकरण दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बातें शनिवार को कहीं।
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सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स लेडीज ग्रुप (एसएलजी) द्वारा आयोजित 'सेलिब्रेटिंग द वीमन इन द लीगल फ्रैटर्निटी एंड देअर रिमार्केबल जर्नी’ कार्यक्रम में बोलते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि गलत धारणा फैलाई जा रही है कि महिलाएं कमजोर हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वतंत्रता-पूर्व युग में कानूनी प्रोफेशन में महिलाओं की भागीदारी में बाधाएं थीं, जिन्होंने प्रोफेशन में उनके विकास और भागीदारी में बाधा उत्पन्न की है। लेकिन अब यह बाधाएं पूरी तरह दूर हो चुकी हैं। मेहता ने कहा कि केवल योग्यता के आधार और अपनी क्षमता के आधार पर महिलाएं आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक हर तरह में समृद्ध हुई हैं।
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सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन ने कहा कि 35% अधीनस्थ न्यायाधीश महिलाएं हैं और उच्च न्यायालयों के मामले में यह 13% है। सर्वोच्च न्यायालय में सिर्फ तीन महिला जज ही हैं। 2022 के आंकड़ों के अनुसार, कांस्टेबल स्तर पर 12% महिलाएं ही हैं और अधिकारी स्तर पर यह संख्या घटकर 8% रह गई है। जेल प्रशासन में केवल 14% महिलाएं हैं और वे सभी निचले स्तर पर ही अटकी हुई हैं। उच्च न्यायालयों में सात दशकों में केवल 16 महिला मुख्य न्यायाधीश ही रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सुधरनी चाहिए।
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