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WMO Report: भारत में अत्यधिक गर्मी से घटी अनाज की पैदावार, बाढ़ और भूस्खलन ने मचाई तबाही
Sat, 22 Apr 2023 05:46 AM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Sat, 22 Apr 2023 05:46 AM IST
सार
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की ओर से शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में बाढ़ और भूस्खलन से करीब 700 लोगों की मौत हो गई, वहीं 900 अन्य लोग आसमानी बिजली गिरने से मारे गए। बाढ़ के कारण असम में 6.63 लाख लोग विस्थापित हो गए।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत में पिछले वर्ष अत्यधिक गर्मी से अनाज की पैदावार कम हो गई और उत्तराखंड में कई जंगलों में आग लग गई। जून में उत्तर पूर्व में बाढ़ की खबर आई। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की ओर से शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में बाढ़ और भूस्खलन से करीब 700 लोगों की मौत हो गई, वहीं 900 अन्य लोग आसमानी बिजली गिरने से मारे गए। बाढ़ के कारण असम में 6.63 लाख लोग विस्थापित हो गए।
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‘स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट 2022’ रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन में संघर्ष की शुरुआत के बाद भारत में गेहूं और चावल के निर्यात पर पाबंदियां लगीं। इससे अनाज की कमी से प्रभावित देशों के लिए भारी जोखिम पैदा हो गया।
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2015 से लेकर आठ साल अब तक के सबसे गर्म
वर्ष 2015 से लेकर आठ साल पृथ्वी पर अब तक के सबसे गर्म साल रहे। 2022 में वैश्विक औसत तापमान औसत से 1.15 डिग्री सेल्सियस अधिक था।
तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री से नीचे रखना जरूरी
जलवायु परिवर्तन के सबसे बुरे प्रभावों से बचने के लिए वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा से नीचे रखना जरूरी है। डब्ल्यूएमओ ने कहा कि 2022 में मानसून से पहले की अवधि में भारत और पाकिस्तान में अत्यधिक गर्मी थी।
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जलस्तर बढ़ने की दोगुनी रफ्तार
डब्ल्यूएमओ ने कहा कि समुद्र का जलस्तर 1993-2002 के मुकाबले दोगुनी गति से बढ़ रहा है। यह सहस्राब्दियों तक जारी रह सकता है। एजेंसी ने जलवायु परिवर्तन के कहर का ब्योरा देते हुए कहा है कि 2013-22 के बीच ग्लेशियरों के अत्यधिक पिघलने और रिकॉर्ड महासागरीय गर्मी के स्तर ने जलस्तर में 4.62 मिमी प्रति वर्ष की औसत वृद्धि में योगदान दिया है। यह 1993-2002 के दशक में रिकॉर्ड गति से लगभग दोगुनी है, जिससे 1990 के दशक की शुरुआत से 10 सेमी से अधिक की कुल वृद्धि हुई है। बढ़ते जलस्तर से प्रशांत महासागर में स्थित द्वीप राष्ट्र तुवालु और कुछ समुद्र तटीय शहरों के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है।
वहीं, अंटार्कटिका में समुद्री बर्फ पिछले जून और जुलाई में पिघलकर रिकॉर्ड स्तर पर पीछे खिसकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महासागर सबसे गर्म दर्ज किए गए, उनकी लगभग 58 प्रतिशत सतहों पर समुद्री हीटवेव का अनुभव हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल यूरोप में लू के दौरान करीब 15,000 लोगों की मौत हुई थी। चिंता की बात है कि चरम मौसम के पैटर्न 2060 तक जारी रहेंगे, चाहे हम ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन कम करने के लिए कोई भी कदम उठाएं।