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राष्ट्रवाद की नैया से चुनावी वैतरणी पार करेगी भाजपा

Tue, 31 Oct 2017 03:13 AM IST
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Updated Tue, 31 Oct 2017 03:13 AM IST
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With the agenda of nationalism, BJP will win the Gujarat assembly elections
- फोटो : FILE PHOTO

गुजरात विधानसभा चुनाव में जिग्नेश-अल्पेश-हार्दिक की युवा तिकड़ी की चुनौती का सामना कर रही भाजपा ने कश्मीर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम के विवादास्पद बयान और दूसरे वरिष्ठ नेता से परोक्ष रूप से जुड़े अस्पताल में आतंकी के काम करने के मुद्दे को हाथोंहाथ लेने की रणनीति बनाई है। 

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इन मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के कांग्रेस पर तीखे हमले से साफ हो गया है कि पार्टी इस मुद्दे को अहम चुनावी हथियार बनाने का फैसला कर चुकी है। गौरतलब है कि कांग्रेस को अब इन मुद्दों के कारण नोट बंदी, जीएसटी और युवा तिकड़ी की ओर से उठाए गए सवालों के गौण हो जाने का डर सता रहा है। यही कारण है कि कांग्रेस ने चिदंबरम को इस मुद्दे पर चुप्पी साधने का निर्देश दिया है।
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दरअसल युवा तिकड़ी और जीएसटी की परेशानी से व्यापारी वर्ग की नाराजगी दूर करने की चुनौती का सामना कर रही भाजपा अपने प्रमुख एजेंडा राष्ट्रवाद की तलाश में थी। चिदंबरम और पटेल ने पार्टी को बैठे बिठाए इस आशय का सियासी अवसर उपलब्ध करा दिया। चिदंबरम के कश्मीरियों को और अधिक स्वायत्तता देने की वकालत पर हिमाचल की रैली में पहले पीएम ने तीखा निशाना साधा तो दूसरे दिन शाह ने भी इन मुद्दों पर दोनों कांग्रेसी नेताओं की खिंचाई की। दरअसल खासकर गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस किसी कीमत पर भाजपा को हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण में सफल नहीं होने देने की रणनीति बनाई थी। 
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पढ़ें- गुजरात चुनाव : क्या मोदी-शाह के चक्रव्यूह को तोड़ पाएंगे राहुल गांधी?


इसी रणनीति के तहत जहां अहमद पटेल को पर्दे के पीछे रखा गया, वहीं नरम हिंदुत्व की रणनीति के तहत कांग्रेस उपाध्यक्ष पहली बार मंदिरों में लगातार मत्था टेकते दिखे। मगर पहले कभी पटेल से जुड़े  रहे अस्पताल में आईएस आतंकी का कथित बतौर कर्मचारी काम करना और चिदंबरम की कश्मीरियों को स्वायत्तता की वकालत ने भाजपा के लिए राष्ट्रवाद का कार्ड खेलने का रास्ता तैयार कर दिया। 

क्यों होगा अहम मुद्दा
भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि हिमाचल के सैनिकों का गढ़ होने और गुजरात के हिंदुत्व की राजनीति का मजबूत गढ़ होने केकारण दोनों ही राज्यों की सियासत में राष्ट्रवाद का मुद्दा बेहद अहम है। चूंकि कश्मीर और आतंकवाद दोनों सैनिकों और हिंदुत्व समर्थकों के लिए अहम मामला है। ऐसे में चिदंबरम और पटेल के जरिए प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस को घेरने में आसानी होगी।

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