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जिस सेटेलाइट से मोदी ने पड़ोसियों को दिया बड़ा तोहफा, उसकी 10 बड़ी बातें

Sun, 30 Apr 2017 05:16 PM IST
amarujala.com-Presented by- हर्षित गौतम
amarujala.com-Presented by- हर्षित गौतम Updated Sun, 30 Apr 2017 05:16 PM IST
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with South Asia Satellite pm modi will give a big gift to his Neighbors
इसरो

लगातार अंतरिक्ष में अपना लोहा मनवाने वाला भारत अब अपने पड़ोसियों के लिए भी एक बड़ा तोहफा देने जा रहा है। इसरो अपनी एक नई उपग्रह योजना से दक्षिण एशियाई देशों को दूरसंचार, और आपदा प्रबंधन से संबंधित कई सुविधाएं देगा।

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दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल में 2014 में हुई सार्क समिट के दौरान कहा था कि वो सार्क देशों के लिए एक सेटेलाइट लांच करने जा रहे हैं। ये इस क्षेत्र के लोगों के लिए टेलीकम्यूनिकेशन, टेलीमेडिसिन सहित कई अन्य सेवाएं मुहैया कराएगा।
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पीएम ने आज अपने 31वें मन की बात कार्यक्रम में भी इस सेटेलाइट का जिक्र किया। पीएम की इस योजना को 'समतापमंडलीय कूटनीति' कहा जा रहा है, जिसमें भारत 450 करोड़ की एक खास योजना के जरिए दक्षिण एशियाई देशों तक 'सबका साथ और सबका विकास' के नारे को साकार करने जा रहा है। इस परियोजना में सबसे प्रमुख साउथ एशिया सेटेलाइट (SAS) का प्रक्षेपण है जो कि आगामी पांच मई को होना है।

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इस सेटेलाइट के बारे में जानिए सबकुछ

with South Asia Satellite pm modi will give a big gift to his Neighbors

पांच मई को अंतरिक्ष में नए कीर्तिमान स्थापित करने को तैयार SAS की कुल लागत 235 करोड़ है, जिसे 3 सालों की मेहनत के बाद तैयार किया गया है। इस सेटेलाइट का वजन 2230 किलोग्राम है। ये मुख्यरूप से एक संचार उपग्रह है, जो कि दक्षिण एशिया के देशों के लिए खास सहूलियत देने जा रहा है। SAS की ये खास बात है कि इसके लिए भारत किसी भी सहयोगी देश से किसी भी प्रकार का कोई खर्चा नहीं लेगा।

पांच मई को 412 टन और 50 मीटर लंबाई का एक रॉकेट श्रीहरिकोटा से दक्षिण एशिया उपग्रह को अंतरिक्ष में लेकर जाएगा। इस उपग्रह की मदद से सहयोगी देशों को एक हॉटलाइन मुहैया करवाने की सुविधा है। ये क्षेत्र भूकंप, सुनामी, चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए एक संवेदनशील है। ऐसे में ये उपग्रह इन देशों के बीच संचार कायम करने में मददगार साबित होगा।

नेपाल, भूटान, मालदीव, बांग्लादेश और श्रीलंका इस मिशन में अभी सहयोगी देश हैं वहीं अफगानिस्तान जल्द ही इस परियोजना से जुड़ने जा रहा है। पाकिस्तान को छोड़कर (पाकिस्तान इस योजना में शामिल नहीं) बाकी सारे सार्क देश इस उपग्रह की सुविधा का लाभ ले सकेंगे।

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