फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Winter 2020-21 Forecast indian meteorological department tells about la nina effect on indian winter

Winter 2020-21 Forecast : इस बार क्यों पड़ेगी कड़ाके की ठंड, जानें 'ला नीना' और 'एल नीनो' का क्या है इससे लेना-देना

Thu, 29 Oct 2020 08:27 AM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Thu, 29 Oct 2020 08:27 AM IST
विज्ञापन
Winter 2020-21 Forecast indian meteorological department tells about la nina effect on indian winter
सर्दी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई

इस बार मौसम पर ला नीना का प्रभाव रहेगा और सर्दी का सितम कहर ढा सकता है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा के मुताबिक, ला नीना के प्रभाव के कारण इस साल कड़ाके की ठंड पड़ेगी। उन्होंने कहा कि अगर आप शीत लहर की स्थिति के लिए बड़े पैमाने पर कारक को देखते हैं तो ला नीना और अल नीनो की परिस्थितियां इसमें बड़ी अहम भूमिका निभाती हैं। ला नीना के कमजोर पड़ने से पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्यादा ठंड पड़ने की संभावना है। ला नीना को स्पेनिश भाषा में छोटी बच्ची कहा जाता है। 

विज्ञापन


विज्ञापन


क्या है ला नीना और एल नीनो
पंतनगर विवि के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह के अनुसार, कमजोर ला नीना की वजह से सर्दियों में इस बार कड़ाके की ठंड रहेगी, क्योंकि यह ठंडी हवाओं के अनुकूल होता है। एल नीनो और ला नीना का मौसम के रुख को तय करने में काफी प्रभाव रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन




ला नीना समुद्री प्रक्रिया है, जिसमें समुद्र में पानी ठंडा होने लगता है। जिसका हवाओं पर भी असर होता है और तापमान पर प्रभाव पड़ता है। ये अंतर महासागरीय घटनाओं समेत दुनिया के मौसम और जलवायु को बड़े पैमाने पर प्रभावित करने का कारण बन सकते हैं।

जबकि एल नीनो में इसके विपरीत होता है। यानी समुद्र का पानी गर्म होता है और इसके प्रभाव से गर्म हवाएं चलती हैं और दोनों का असर मानसून पर भी पड़ता है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसके पीछे बड़ी वजह हवा की दिशा में बदलाव होना है। दरअसल एल निनो और ला नीना, एल नीनो-दक्षिणी ऑसीलेशन (ENSO) (ईएनएसओ) चक्र के हिस्से हैं और दोनों जलवायु घटना के विपरीत काम करते हैं। ईएनएसओ चक्र एक वैज्ञानिक शब्दावली है जो पूर्व-मध्य इक्वेटोरियल पैसिफिक में महासागर और वायुमंडल के बीच तापमान के उतार-चढ़ाव को बताता है। पूर्व-मध्य इक्वेटोरियल पैसिफिक भूमध्य रेखा के पास दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच का क्षेत्र कहलाता है। 


शुष्क मौसम के कारण पिछले चार पांच साल के बाद इस बार अक्तूबर में दिन का तापमान नार्मल से एक से तीन डिग्री ज्यादा चल रहा है। रात का तापमान एक दो दिन से कम हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि तीन-चार साल में ऐसा होता है।

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के वैज्ञानिक रोहित थपलियाल ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर न्यूनतम तापमान दो डिग्री नीचे जा सकता है। पर्वतीय जनपदों में तीन-चार दिन में हल्की बारिश और ऊंचाई वाली जगहों पर बर्फबारी भी हो सकती है। यानी भारत के उत्तरी हिस्सा में सामान्य सर्दी से ज्यादा ठंड पड़ सकती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed