फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Will the RTI Amendment Bill allow the government to refrain from giving information?

क्या आरटीआई संशोधन विधेयक सूचना देने के मामले में सरकार को मनमर्जी करने की छूट दे देगा?

Mon, 22 Jul 2019 08:12 PM IST
Trainee Trainee डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Mon, 22 Jul 2019 08:12 PM IST
विज्ञापन
Will the RTI Amendment Bill allow the government to refrain from giving information?
आरटीआई - फोटो : file photo

केंद्र सरकार ने विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद लोकसभा में सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक 2019 पेश कर दिया। सोमवार को इस पर चर्चा भी शुरु हो गई। विपक्षी दलों के अलावा सक्रिय आरटीआई कार्यकर्ता इस बाबत एक सवाल खड़ा कर रहे हैं। वह यह है कि क्या आरटीआई संशोधन विधेयक सूचना देने के मामले में सरकार को मनमर्जी करने की छूट दे देगा। इन्हें भय है कि इस संशोधन के बाद सूचना के अधिकार की मूल भावना यानी सूचना मिले, वह खत्म हो जाएगी। आरटीआई कार्यकर्ता एक और सवाल करते हैं, ये सरकार नई तो है नहीं। पिछले कार्यकाल में भी पारदर्शिता और जवाबदेही से बचने के प्रयास हुए हैं, सब इससे वाकिफ हैं। अब आरटीआई संशोधन विधेयक के जरिए केंद्र सरकार कुछ ऐसा करने की कोशिश में लगी है कि केवल वही सूचना बाहर आए, जिसे सरकार चाहेगी। 

विज्ञापन


सूचना के अधिकार का लगातार इस्तेमाल कर रहे अनुपम बताते हैं, सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक 2019 का सीधा मतलब है कि इसे लेकर सरकार की मंशा ठीक नहीं है। कौन नहीं जानता कि केंद्र सरकार ने चुनाव से पहले कई तरह की सूचनाओं को सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया था। बेरोजगारी का डॉटा, जीडीपी, रोजगार, किसानों की मौत, एनसीआरबी और न जाने दूसरे कितने विभाग, जिनकी सूचनाएं लोगों को पहले समय रहते मिलती रहती थी, वे नहीं मिली। अगर कोई भी सूचना बाहर आई भी तो उसमें सरकार की इच्छानुसार बदलाव किए गए थे। सवाल ये उठ रहा है कि पारदर्शिता का दावा करने वाली ये सरकार अब अचानक इससे पीछे क्यों हट रही है। क्या सरकार को जवाबदेही से डर लगने लगा है।  
विज्ञापन


'सूचना के अधिकार' की फाइनल अथॉरिटी कार्यपालिका के नियंत्रण में हो जाएगी तो ये अधिकार भी बेमानी होगा। सूचना आयोग की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी। इसके बाद तो सरकार ही तय करेगी कि कौन सी सूचना बाहर पहुंचानी है और कौन सी नहीं। सरकार का यह कदम भ्रष्टाचार विरोधी नीति, लोकपाल, पारदर्शिता और जवाबदेही, इन सबको धता बताने के लिए काफी होगा। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार के आरटीआई कानून में संशोधन के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने इस फैसले को खराब कदम बताया है। सीएम केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए कहा कि यह केंद्रीय और राज्यों के सूचना आयोगों की स्वतंत्रता को समाप्त कर देगा, जो आरटीआई के लिए बुरा होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


दूसरी ओर, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है कि पारदर्शिता के सवाल को लेकर मोदी सरकार की प्रतिबद्धता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता है। सरकार अधिकतम सुशासन और न्यूनतम सरकार के सिद्धांत के आधार पर काम करती है। विधेयक के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि इसका मकसद आरटीआई अधिनियम को संस्थागत स्वरूप प्रदान करना, व्यवस्थित बनाना तथा परिणामोन्मुखी बनाना है। 

संशोधन विधेयक 2019 में ये हैं प्रावधान 

-मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों और राज्यों के मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्तों के वेतन, भत्ते और सेवा की दूसरी शर्ते केंद्र सरकार तय करेगी

-मौजूदा कानून के मुताबिक, मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का वेतन मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं निर्वाचन आयुक्तों के बराबर है। दूसरी शर्तें भी वैसी ही हैं। 
-आरटीआई कानून में संशोधन होने के बाद आयुक्तों का वेतन, कार्यकाल और रोजगार की शर्तें और स्थितियां तय करने का अधिकार सरकार को मिल जाएगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed