Rahul Gandhi: क्या राहुल को मिली 'सजा' से एकता के सूत्र में बंधेगा विपक्ष? अब मामला पूछताछ से भी आगे निकला
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को सूरत कोर्ट ने मानहानि केस में दोषी करार देते हुए उन्हें दो साल की सजा सुनाई। हालांकि गुरुवार को ही राहुल गांधी को जमानत भी मिल गई, लेकिन इसके बाद यह मामला राजनीतिक दलों के बीच गर्मा गया। ऐसे सवाल उठने लगे कि क्या अब विपक्षी पार्टियां, एकता के सूत्र में बंध जाएंगी। राहुल को सजा सुनाए जाने के बाद सबसे पहला बयान दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल की तरफ से आया है। केजरीवाल ने कहा, गैर भाजपा नेताओं और पार्टियों पर मुकदमे कर उन्हें खत्म करने की साजिश हो रही है। हमारे कांग्रेस से मतभेद हैं, लेकिन राहुल गांधी को इस तरह मानहानि केस में फंसाना ठीक नहीं। जनता और विपक्ष का काम है सवाल पूछना। हम अदालत का सम्मान करते हैं, पर इस निर्णय से असहमत हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि पहले तो बात ईडी या सीबीआई की पूछताछ तक थी, लेकिन अब तो मामला सजा तक पहुंच रहा है।
आधी-अधूरी नजर आई विपक्षी एकता
देश में लंबे समय से विपक्षी एकता को लेकर प्रयास चल रहे हैं। अदाणी मसले पर जेपीसी के गठन को लेकर संसद के बजट सत्र के प्रथम एवं दूसरे चरण में गतिरोध जारी है। हालांकि पहले चरण के सत्र में विपक्ष, सत्ता पक्ष पर हमलावर था, मगर दूसरे चरण में भाजपा सांसदों ने ही सदन में हंगामा कर दिया। भाजपा सांसद, राहुल गांधी से उनके द्वारा ब्रिटेन में भारतीय लोकतंत्र के बारे में दिए गए एक बयान को लेकर माफी की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस एवं दूसरे विपक्षी दल, अदाणी मुद्दे पर जेपीसी गठन की बात कहते हैं। कांग्रेस सांसदों का आरोप है कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा। अदाणी मुद्दे पर कांग्रेस सहित दर्जनभर विपक्षी दल, भाजपा पर हमलावर हैं। संसद भवन से ईडी मुख्यालय तक जो पैदल मार्च निकालने का प्रयास हुआ, उसमें भी विपक्षी दल एक साथ नजर आए। संसद में जब कांग्रेस पार्टी ने अदाणी मुद्दे की जांच के लिए जेपीसी यानी 'संयुक्त संसदीय समिति' के गठन की मांग की, तो उसे विपक्षी दलों का पूरा समर्थन मिला। बजट सत्र के दूसरे चरण में जब भाजपा ने राहुल गांधी के बयान को लेकर हंगामा शुरू किया, तो भी विपक्षी पार्टियां एक साथ खड़ी रहीं। कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी को सदन में बोलने का अवसर न देने का मुद्दा जब सदन में उठाया तो उसे विपक्ष का उतना समर्थन नहीं मिल सका। लोकसभा में इस मुद्दे पर कांग्रेस, कुछ अकेली पड़ती नजर आई।
यहां भी खलती रही कांग्रेस की उपस्थिति
अब राहुल गांधी को हुई सजा के बाद एकाएक अरविंद केजरीवाल का बयान सामने आ गया। अभी तक केजरीवाल और कांग्रेस के बीच विपक्षी एकता को लेकर कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है, हालांकि आप सांसद विपक्षी एकता के लिए होने वाली बैठकों में शिरकत करते रहे हैं। पिछले दिनों दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था। उस वक्त विपक्षी दलों का जो प्रदर्शन हुआ, उसमें कांग्रेस की उपस्थिति खल रही थी।
यह भी पढ़ें: राहुल की सजा पर केजरीवाल: 'गैर भाजपा नेताओं-पार्टियों को खत्म करने की साजिश, मुकदमे में फंसाना ठीक नहीं'
कई पार्टियों के नेताओं ने सिसोदिया की गिरफ्तारी एवं जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा था। वहां भी कांग्रेस ज्यादा सक्रिय दिखाई नहीं पड़ी। इसके विपरित दिल्ली कांग्रेस ने सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली में सिसोदिया और 'आप' के खिलाफ पोस्टरबाजी की थी।
पीएम को पत्र लिखने में नहीं मिला कांग्रेस का साथ
विपक्षी एकता की राह में तब भी कांग्रेस पार्टी अलग-थलग पड़ गई थी, जब उन पार्टियों ने सिसोदिया की गिरफ्तारी का विरोध किया, जो कई राज्यों में कांग्रेस के साथ सरकार में रही हैं। उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी), राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, सपा, टीएमसी, आप, नेशनल कांफ्रेंस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी व डीएमके आदि पार्टियों ने आप के डिप्टी सीएम की गिरफ्तारी को लेकर आवाज बुलंद की। इन दलों ने पीएम को पत्र लिखा, लेकिन यहां कांग्रेस का साथ नहीं मिला। विपक्ष का आरोप है कि पिछले दो दशकों में केंद्रीय जांच एजेंसियों के निशाने पर आए गैर-भाजपाई नेताओं का आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, लालू प्रसाद यादव, मायावती, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता से लेकर अनेक विपक्षी नेता, किसी न किसी मामले में जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। आने वाले समय में कौन सा नेता फंसेगा और कौन बचेगा, इस बाबत कुछ नहीं कहा जा सकता। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा था, प्रधानमंत्री किसी भी देश के 'फादर फिगर' की तरह होते हैं। आज देश में 'फादर फिगर' की भूमिका का सही निर्वहन नहीं हो रहा।
एकता के पक्के सूत्र में नहीं बंध सका विपक्ष
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अभी तक विपक्षी दल, एकता के पक्के सूत्र में नहीं बंध सके हैं। केसीआर, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल, जैसे नेताओं की कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत नहीं हो रही। अरविंद केजरीवाल ने कई बार पीएम मोदी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, अगर कहीं पर भाजपा को वोट नहीं मिलता, तो दूसरी पार्टी को काम नहीं करने दिया जाता। किसी राज्य में दूसरी पार्टी की सरकार बनती है, तो उसके नेताओं के पीछे ईडी और सीबीआई छोड़ दी जाती है। विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार कर उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित करते हैं। किसी राज्य में विपक्षी पार्टी को ही तोड़ देते हैं, तो कहीं सरकार गिरा देते हैं। गोवा और कर्नाटक में ऐसा देखने को मिला है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अब बात केवल पूछताछ तक नहीं रही, सजा होने लगी है। संभव है कि विपक्षी दल, एकता को लेकर ज्यादा गंभीरता से काम करें। हालांकि इसके लिए भी बहुत कुछ कांग्रेस पार्टी की पहल पर निर्भर करता है। पहले भी कांग्रेस पार्टी ने कई मुद्दों पर विपक्षी एकजुटता जैसी पहल नहीं की। अब चूंकि राहुल गांधी पर बात आ गई है तो संभव है कि कांग्रेस, विपक्ष के नेताओं को पूरी तरह अपने साथ लेकर चले।
इन विपक्षी नेताओं पर है जांच एजेंसियों का जाल
कांग्रेस नेता एवं मौजूदा पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से ईडी पूछताछ कर चुकी है। खरगे ने कहा था, केंद्र सरकार जांच एजेंसियों की मदद से विपक्ष को एकत्रित नहीं होने दे रही। केंद्र सरकार के खिलाफ जो बोलता है, वह टारगेट पर आ जाता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल भी ईडी का सामना कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे पार्थ चटर्जी को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था। शिवसेना के संजय राउत ईडी जांच का सामना कर रहे हैं। वे भी जेल में रह कर आए हैं। टीएमसी सांसद अभिषेक से भी पूछताछ जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से ईडी ने पूछताछ की है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी जांच का सामना कर रहे हैं। शरद पवार के भतीजे अजित पवार पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है। पूर्व मंत्री नवाब मलिक, ईडी मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं।
इन नेताओं पर है जांच एजेंसी की नजर
यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव का नाम भी माइनिंग घोटाले में आया था। चारा घोटाले में सजा होने के बाद लालू प्रसाद यादव पर रेलवे में जमीन लेकर नौकरी देने का मामले की जांच शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ में राम गोपाल अग्रवाल, भिलाई के विधायक देवेंद्र यादव, गिरीश देवांगन, आरपी सिंह, विनोद तिवारी और सन्नी अग्रवाल के निवास एवं कार्यालयों पर ईडी की रेड हो चुकी है। पूर्व सीएम ओपी चौटाला भी सलाखों के पीछे रहे हैं। आरजेडी के एमएलसी सुनील सिंह, सांसद अशफाक करीम, फैयाज अहमद और पूर्व एमएलसी सुबोध राय भी जांच एजेंसियों की रडार पर हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी ईडी की सुई घूम रही हैं। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल के करीबियों पर ईडी छापा मार चुकी है। ममता बनर्जी के खिलाफ चिट फंड मामला है तो कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार भी ईडी के निशाने पर आ चुके हैं।