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India vs Pakistan: पाकिस्तान के साथ सीजफायर बढ़ने के बाद भारतीय सेना ने क्या कहा? विश्वास बहाली पर कही यह बात
Fri, 16 May 2025 10:06 AM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 16 May 2025 10:06 AM IST
सार
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बाद अब शांति बहाली की कोशिशें शुरू हो गई हैं। दोनों सेनाओं ने गोली न चलाने और सीमा से फौज कम करने जैसे अहम फैसले लिए हैं। हालांकि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं है, लेकिन भरोसा बढ़ाने वाले ये कदम दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की दिशा में एक सकारात्मक संकेत हैं।
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जनरल उपेंद्र द्विवेदी, सेना प्रमुख
- फोटो : X @adgpi
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विस्तार
भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनाव के बीच भारतीय सेना ने कहा है कि वह दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाएगी ताकि सीमा पर सतर्कता का स्तर कम किया जा सके। यह फैसला 10 मई को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बनी सहमति के बाद लिया गया है। भारतीय सेना की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान ने कहा है कि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने की समझौता अब 18 मई तक बढ़ा दी गई है।
10 मई को क्या हुआ था?
भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल्स ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) ने 10 मई को बात की थी और तय किया था कि दोनों ओर से सैन्य कार्रवाई रोकी जाएगी। यह फैसला तब हुआ जब दोनों देशों के बीच चार दिन तक भीषण गोलीबारी और हमले हुए, जिससे एक बड़े युद्ध की आशंका पैदा हो गई थी। भारतीय सेना ने एक बयान में कहा, '10 मई की बातचीत के आधार पर यह तय किया गया है कि हम भरोसा बढ़ाने वाले कदम जारी रखेंगे ताकि सीमा पर सतर्कता कम की जा सके। जैसे-जैसे स्थिति आगे बढ़ेगी, हम आपको सूचित करते रहेंगे।'
यह भी पढ़ें - Pakistan: इशाक डार ने अपनी ही संसद में फर्जी खबर के जरिए दिखाया बड़बोलापन, पाकिस्तानी मीडिया ने ही खोल दी पोल
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पाकिस्तान की ओर से क्या कहा गया?
वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि 15 मई को दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच फिर से हॉटलाइन पर बातचीत हुई और उन्होंने "सीजफायर" की अवधि 18 मई तक बढ़ाने पर सहमति जताई। डार के मुताबिक, 10 मई की बातचीत में युद्धविराम 12 मई तक तय हुआ था। फिर, 12 मई को बातचीत में इसे 14 मई तक बढ़ाया गया। वहीं 14 मई को फिर बातचीत में इसे 18 मई तक बढ़ाया गया। हालांकि भारत ने 14 मई की बातचीत को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
बातचीत में क्या कहा गया?
भारतीय सेना के अनुसार, 'दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि एक भी गोली नहीं चलाई जाएगी और कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं होगी।' इसके साथ ही यह भी सहमति बनी कि सीमा और अग्रिम इलाकों से फौजों की संख्या घटाने पर विचार किया जाएगा। वहीं भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 11 मई को बताया था कि दोनों देशों ने 'जमीन, समुद्र और हवा में सभी तरह की सैन्य कार्रवाइयां रोकने' पर सहमति बना ली है।
यह भी पढ़ें - Ex-DGMO Anil Bhatt: 'ड्रोन, अंतरिक्ष-साइबरस्पेस सैन्य संघर्षों में नए प्रतिमान', पूर्व डीजीएमओ अनिल भट्ट बोले
रक्षा मंत्री का जम्मू-कश्मीर दौरा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 15 मई को जम्मू-कश्मीर का दौरा किया और वहां की सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया। श्रीनगर के बडामी बाग कैंटोनमेंट में सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति को नए सिरे से परिभाषित किया है। अब भारत की नीति है कि भारतीय जमीन पर कोई भी हमला युद्ध माना जाएगा।' उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की अब तक की सबसे बड़ी आतंकवाद विरोधी कार्रवाई बताया और कहा, 'ये केवल बचाव नहीं था, बल्कि साहसिक निर्णय लेकर किया गया जवाब था। आतंकियों ने हमारे लोगों को धर्म देखकर मारा, हमने उन्हें उनके कर्मों की सजा दी। यह हमारा धर्म था।'
क्या है ऑपरेशन सिंदूर?
भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकियों के ठिकानों पर सटीक हमले किए। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पाहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में की गई थी। इसके बाद पाकिस्तान ने 8, 9 और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की, जिनका भारतीय सेना ने करारा जवाब दिया। इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा जिनमें एयर बेस, रडार साइट्स, और कमांड सेंटर शामिल हैं।
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10 मई को क्या हुआ था?
भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल्स ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) ने 10 मई को बात की थी और तय किया था कि दोनों ओर से सैन्य कार्रवाई रोकी जाएगी। यह फैसला तब हुआ जब दोनों देशों के बीच चार दिन तक भीषण गोलीबारी और हमले हुए, जिससे एक बड़े युद्ध की आशंका पैदा हो गई थी। भारतीय सेना ने एक बयान में कहा, '10 मई की बातचीत के आधार पर यह तय किया गया है कि हम भरोसा बढ़ाने वाले कदम जारी रखेंगे ताकि सीमा पर सतर्कता कम की जा सके। जैसे-जैसे स्थिति आगे बढ़ेगी, हम आपको सूचित करते रहेंगे।'
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पाकिस्तान की ओर से क्या कहा गया?
वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि 15 मई को दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच फिर से हॉटलाइन पर बातचीत हुई और उन्होंने "सीजफायर" की अवधि 18 मई तक बढ़ाने पर सहमति जताई। डार के मुताबिक, 10 मई की बातचीत में युद्धविराम 12 मई तक तय हुआ था। फिर, 12 मई को बातचीत में इसे 14 मई तक बढ़ाया गया। वहीं 14 मई को फिर बातचीत में इसे 18 मई तक बढ़ाया गया। हालांकि भारत ने 14 मई की बातचीत को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
बातचीत में क्या कहा गया?
भारतीय सेना के अनुसार, 'दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि एक भी गोली नहीं चलाई जाएगी और कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं होगी।' इसके साथ ही यह भी सहमति बनी कि सीमा और अग्रिम इलाकों से फौजों की संख्या घटाने पर विचार किया जाएगा। वहीं भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 11 मई को बताया था कि दोनों देशों ने 'जमीन, समुद्र और हवा में सभी तरह की सैन्य कार्रवाइयां रोकने' पर सहमति बना ली है।
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रक्षा मंत्री का जम्मू-कश्मीर दौरा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 15 मई को जम्मू-कश्मीर का दौरा किया और वहां की सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया। श्रीनगर के बडामी बाग कैंटोनमेंट में सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति को नए सिरे से परिभाषित किया है। अब भारत की नीति है कि भारतीय जमीन पर कोई भी हमला युद्ध माना जाएगा।' उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की अब तक की सबसे बड़ी आतंकवाद विरोधी कार्रवाई बताया और कहा, 'ये केवल बचाव नहीं था, बल्कि साहसिक निर्णय लेकर किया गया जवाब था। आतंकियों ने हमारे लोगों को धर्म देखकर मारा, हमने उन्हें उनके कर्मों की सजा दी। यह हमारा धर्म था।'
क्या है ऑपरेशन सिंदूर?
भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकियों के ठिकानों पर सटीक हमले किए। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पाहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में की गई थी। इसके बाद पाकिस्तान ने 8, 9 और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की, जिनका भारतीय सेना ने करारा जवाब दिया। इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा जिनमें एयर बेस, रडार साइट्स, और कमांड सेंटर शामिल हैं।
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