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Delhi Election: क्या दिल्ली चुनाव में भाजपा के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित होगा वेतन आयोग, 7 लाख वोटों पर दांव
सार
Delhi Election: पूरे देश में सबसे अधिक कर्मचारी और पेंशनर, दिल्ली में रहते हैं। आठवें वेतन आयोग की घोषणा कर भाजपा ने दिल्ली चुनाव में एक बड़ा दांव चल दिया है।
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आठवां वेतन आयोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आठवें वेतन आयोग के गठन पर मुहर लग गई है। हालांकि केंद्रीय कर्मचारी संगठन, लंबे समय से आठवें वेतन आयोग के गठन की मांग कर रहे थे। गत वर्ष एक बार नहीं, बल्कि कई दफा संसद सत्र के दौरान इस बाबत सवाल पूछे गए थे। वहां पर भी सरकार ने दो टूक शब्दों में कह दिया था कि आठवें वेतन आयोग के गठन का अभी कोई विचार नहीं है। अब एकाएक सरकार ने इसकी घोषणा कर दी है। केंद्र सरकार में दो बड़े कर्मचारी संगठनों के वरिष्ठ नेताओं ने बताया, जब सभी कर्मचारी संगठनों ने सरकार से आठवां वेतन आयोग गठित करने की मांग की थी तो सरकार ने इस पर कोई विचार नहीं किया था। दरअसल, वेतन आयोग की घोषणा, दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर की गई है। दिल्ली में लगभग सात लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी और पेंशनर हैं। इनमें पेंशनर की संख्या पांच छह लाख बताई जा रही है। दिल्ली के 22 विधानसभा क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारी और पेंशनर, जीत हार के सूत्र बताए गए हैं। यानी इतने क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का प्रभाव बताया जा रहा है।
कर्मचारी नेताओं के मुताबिक, पूरे देश में सबसे अधिक कर्मचारी और पेंशनर, दिल्ली में रहते हैं। आठवें वेतन आयोग की घोषणा कर भाजपा ने दिल्ली चुनाव में एक बड़ा दांव चल दिया है। इससे पहले जब कभी कर्मचारी संगठनों ने आठवें वेतन आयोग के गठन की मांग की तो उन्हें निराशा हाथ लगी थी। यहां तक कि गत वर्ष संसद के शीतकालीन सत्र में सांसदों द्वारा केंद्र सरकार के कर्मचारियों और सशस्त्र बलों के लिए आठवें वेतन आयोग का गठन कब होगा, यह सवाल पूछा गया था। विभिन्न दलों के सांसद, आठवें वेतन आयोग को लेकर प्रश्न पूछ चुके थे। क्या सरकार, आठवें सीपीसी का गठन नहीं करने के कारण केंद्र सरकार के कर्मचारियों में व्याप्त आक्रोश से अवगत है तथा यदि हां, तो इस पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया है। जब यह सवाल पूछा गया तो केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जवाब देते हुए कहा था, वर्तमान में, सरकार के पास केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग के गठन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
लोकसभा सांसद जय प्रकाश, आनंद भदौरिया और वी. वैथिलिंगम ने आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) के गठन पर सरकार से सवाल पूछा था। सांसदों ने पूछा, क्या केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग का गठन फरवरी, 2013 में किया गया था। दूसरा, यदि हां, तो सातवें सीपीसी के गठन के 10 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अब तक आठवें सीपीसी का गठन नहीं करने तथा अभूतपूर्व मूल्य वृद्धि/जीवनयापन लागत और कर्मचारियों की दुर्दशा को नजरअंदाज करने के क्या कारण हैं। तीसरा, क्या सरकार आठवें सीपीसी का गठन नहीं करने के कारण केंद्र सरकार के कर्मचारियों में व्याप्त आक्रोश से अवगत है। यदि हां, तो इस पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया है। चौथा, क्या सरकार केंद्रीय कर्मचारियों, सशस्त्र बलों आदि के लिए आठवें वेतन आयोग के गठन पर विचार कर रही है। पांचवां, यदि हां, तो इसकी घोषणा कब तक की जाएगी।
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आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग के गठन को लेकर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया था, 7वां वेतन आयोग 28 फरवरी, 2014 को गठित किया गया था। बाकी सवालों के जवाब में वित्त राज्य मंत्री ने कहा, वर्तमान में, सरकार के पास केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग के गठन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। यदि हां, तो आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग की घोषणा कब तक की जाएगी, इस सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री ने कहा, प्रश्न ही नहीं उठता। केंद्र सरकार के इस जवाब से 48 लाख कर्मचारियों और लगभग 65 लाख पेंशनरों को तगड़ा झटका लगा था।
इससे पहले वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में यह बात साफ कर दी थी कि आठवें वेतन आयोग के गठन का कोई भी प्रस्ताव, सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है। मौजूदा समय में डीए/डीआर की दर 53 प्रतिशत पर पहुंच गई है। संसद सत्र में आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर राज्यसभा सांसद जावेद अली खान और रामजी लाल सुमन ने सवाल पूछा था। सांसदों ने जानना चाहा कि क्या सरकार 2025 के बजट के दौरान आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर सक्रिय है। क्या सरकार की वित्तीय स्थिति, कर्मचारियों के वेतनमान में वृद्धि करने की इजाजत नहीं दे रही। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने उक्त सवाल के जवाब में कहा था, सरकार के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
अब सरकार ने अचानक आठवें वेतन आयोग की घोषणा कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने इस बार दिल्ली चुनाव में अपनी रणनीति बदली है। वोटरों को एक प्लेटफार्म पर नहीं लुभाया जा रहा, बल्कि इसके लिए अलग अलग रणनीति तैयार की गई है। विभिन्न वर्गों के बीच कौन से केंद्रीय मंत्री या भाजपाई मुख्यमंत्री पहुंचेंगे, इसका अलग से खाका तैयार किया गया है। हर विधानसभा क्षेत्र में किसी बड़े नेता के नेतृत्व में एक समूह तैयार किया गया है। वह समूह, केवल अपने टास्क पर ही ध्यान देगा। इसी तर्ज पर केंद्रीय कर्मियों और पेंशनरों के लिए एक टीम बनाई गई है। वह टीम केंद्रीय कर्मियों और पेंशनरों से संपर्क कर रही है। आठवें वेतन आयोग की घोषणा, इसी दिशा में एक कदम बताया जा रहा है।
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कर्मचारी नेताओं के मुताबिक, पूरे देश में सबसे अधिक कर्मचारी और पेंशनर, दिल्ली में रहते हैं। आठवें वेतन आयोग की घोषणा कर भाजपा ने दिल्ली चुनाव में एक बड़ा दांव चल दिया है। इससे पहले जब कभी कर्मचारी संगठनों ने आठवें वेतन आयोग के गठन की मांग की तो उन्हें निराशा हाथ लगी थी। यहां तक कि गत वर्ष संसद के शीतकालीन सत्र में सांसदों द्वारा केंद्र सरकार के कर्मचारियों और सशस्त्र बलों के लिए आठवें वेतन आयोग का गठन कब होगा, यह सवाल पूछा गया था। विभिन्न दलों के सांसद, आठवें वेतन आयोग को लेकर प्रश्न पूछ चुके थे। क्या सरकार, आठवें सीपीसी का गठन नहीं करने के कारण केंद्र सरकार के कर्मचारियों में व्याप्त आक्रोश से अवगत है तथा यदि हां, तो इस पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया है। जब यह सवाल पूछा गया तो केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जवाब देते हुए कहा था, वर्तमान में, सरकार के पास केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग के गठन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
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लोकसभा सांसद जय प्रकाश, आनंद भदौरिया और वी. वैथिलिंगम ने आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) के गठन पर सरकार से सवाल पूछा था। सांसदों ने पूछा, क्या केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग का गठन फरवरी, 2013 में किया गया था। दूसरा, यदि हां, तो सातवें सीपीसी के गठन के 10 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अब तक आठवें सीपीसी का गठन नहीं करने तथा अभूतपूर्व मूल्य वृद्धि/जीवनयापन लागत और कर्मचारियों की दुर्दशा को नजरअंदाज करने के क्या कारण हैं। तीसरा, क्या सरकार आठवें सीपीसी का गठन नहीं करने के कारण केंद्र सरकार के कर्मचारियों में व्याप्त आक्रोश से अवगत है। यदि हां, तो इस पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया है। चौथा, क्या सरकार केंद्रीय कर्मचारियों, सशस्त्र बलों आदि के लिए आठवें वेतन आयोग के गठन पर विचार कर रही है। पांचवां, यदि हां, तो इसकी घोषणा कब तक की जाएगी।
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आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग के गठन को लेकर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया था, 7वां वेतन आयोग 28 फरवरी, 2014 को गठित किया गया था। बाकी सवालों के जवाब में वित्त राज्य मंत्री ने कहा, वर्तमान में, सरकार के पास केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग के गठन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। यदि हां, तो आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग की घोषणा कब तक की जाएगी, इस सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री ने कहा, प्रश्न ही नहीं उठता। केंद्र सरकार के इस जवाब से 48 लाख कर्मचारियों और लगभग 65 लाख पेंशनरों को तगड़ा झटका लगा था।
इससे पहले वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में यह बात साफ कर दी थी कि आठवें वेतन आयोग के गठन का कोई भी प्रस्ताव, सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है। मौजूदा समय में डीए/डीआर की दर 53 प्रतिशत पर पहुंच गई है। संसद सत्र में आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर राज्यसभा सांसद जावेद अली खान और रामजी लाल सुमन ने सवाल पूछा था। सांसदों ने जानना चाहा कि क्या सरकार 2025 के बजट के दौरान आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर सक्रिय है। क्या सरकार की वित्तीय स्थिति, कर्मचारियों के वेतनमान में वृद्धि करने की इजाजत नहीं दे रही। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने उक्त सवाल के जवाब में कहा था, सरकार के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
अब सरकार ने अचानक आठवें वेतन आयोग की घोषणा कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने इस बार दिल्ली चुनाव में अपनी रणनीति बदली है। वोटरों को एक प्लेटफार्म पर नहीं लुभाया जा रहा, बल्कि इसके लिए अलग अलग रणनीति तैयार की गई है। विभिन्न वर्गों के बीच कौन से केंद्रीय मंत्री या भाजपाई मुख्यमंत्री पहुंचेंगे, इसका अलग से खाका तैयार किया गया है। हर विधानसभा क्षेत्र में किसी बड़े नेता के नेतृत्व में एक समूह तैयार किया गया है। वह समूह, केवल अपने टास्क पर ही ध्यान देगा। इसी तर्ज पर केंद्रीय कर्मियों और पेंशनरों के लिए एक टीम बनाई गई है। वह टीम केंद्रीय कर्मियों और पेंशनरों से संपर्क कर रही है। आठवें वेतन आयोग की घोषणा, इसी दिशा में एक कदम बताया जा रहा है।